कोरोना ने रफ्तार पकड़ ली, दिल्‍ली में मुंबई से दोगुनी रफ्तार

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Coronavirus: राजधानी दिल्ली में मिले 1,192 नए संक्रमित, 23 लोगों की मौत

नई दिल्ली: देश की राजधानी में कोरोना वायरस ने भयानक रफ्तार पकड़ ली है। शुक्रवार को यहां नए केसेज की संख्‍या पुराने सारे रेकॉर्ड्स तोड़ दिए। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को दिल्‍ली में 2,137 लोग पॉजिटिव टेस्‍ट हुए। इसी के साथ, दिल्‍ली में कोविड-19 के मरीजों की संख्‍या 36,824 हो चुकी है। पिछले 15 दिन के आंकड़े देखें तो दिल्‍ली और चेन्‍नई में मुंबई से दोगुनी रफ्तार से कोरोना के मामले सामने आए हैं। वहीं, दिल्‍ली में अहमदाबाद से तीन गुना तेजी से मरीज बढ़े हैं।

Corona Gained Momentum Double The Speed Of Mumbai In Delhi :

देश के चार महानगरों का एनालिसिस बताता है कि वहां हालात कितने खराब हैं। चारों को मिला दें तो देश के 44% कोरोना केसेज यहीं पर हैं। 11 जून तक देश में कोविड-19 से जितनी मौतें हुईं, उनमें से 43% इन्‍हीं चार महानगरों में हुईं। मुंबई में कोरोना के 54 हजार से ज्‍यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहां रोज 1,000 से ज्‍यादा केस सामने आ रहे हैं। हालांकि इन्‍फेक्‍शन रेट चेन्‍नई और मुंबई में तेजी से बढ़ा हैं। 29 मई के आंकड़ों के हिसाब से चेन्‍नई में 105% तो दिल्‍ली में 100% मरीज बढ़े हैं। जबकि मुंबई में 29 मई के मुकाबले 52 प्रतिशत केस बढ़े हैं। पूरे देश में पिछले दो हफ्तों के दौरान मामलों की संख्‍या में 72% का इजाफा हुआ है।

देश में कोरोना वायरस के मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं और हाल फिलहाल इसमें कमी आने की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक जुलाई के मध्य में या अगस्त की शुरुआत में देश में देश में कोरोना के मामलों की संख्या चरम पर पहुंच सकती है, जबकि अभी से देश में कई राज्य सरकारों की स्वास्थ्य व्यवस्था का दम फूलने लगा है। दिल्‍ली में कोरोना से मरने वालों की संख्‍या 1,214 पहुंच गई है। इनमें से 129 मरीजों की मौत की पुष्टि शुक्रवार को की गई। इनमें से 71 पिछले 24 घंटों में हुईं थीं, बाकी 58 मरीज 9 और 10 मई के बीच मारे गए। महाराष्‍ट्र (3,717) और गुजरात (1,416) के बाद दिल्‍ली में कोरोना वायरस से सबसे ज्‍यादा लोगों की मौत हुई है। टेंशन देने वाली बात ये है कि 741 मौतें (61%) सिर्फ पिछले 12 दिन में हुई हैं। मार्च में दिल्‍ली के भीतर 2 मौतें, अप्रैल में 57 मौतें और मई में कोरोना से दिल्‍ली में 414 लोगों की मौत हुई थी।

29 मई से 11 जून के बीच, कोरोना से मरने वालों के आंकड़े देखें तो प्रति 100 केसेज में अहमदाबाद में 8 मरीजों की मौत हुई है। मुंबई में यह आंकड़ा 4.4% है और दिल्ली में 4%। चारों में से चेन्‍नई का फैटलिटी रेट (1.2%) सबसे कम है। हाई फैटलिटी रेट को एक्‍सपर्ट्स बेहतर क्लिनिकल मैनजमेंट की कमी बताते हैं। यानी वहां पर या तो मामले देरी से डिटेक्‍ट हो रहे हैं या फिर टेस्टिंग कम हो रही है या फिर सिर्फ बहुत ज्‍यादा बीमार लोगों का ही टेस्‍ट हो रहा है।

दिल्‍ली में 28 मई के बाद से रोज 1,000 से ज्‍यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। सिर्फ 1 जून को 1,000 से कम केस आए थे। शुक्रवार को एक बयान में दिल्‍ली के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सत्‍येंद्र जैन ने कहा कि ‘बेड्स और वेंटिलेटर्स बढ़ाए जाएंगे।’ उन्‍होंने केंद्र सरकार से भी मदद मांगी है। दिल्‍ली सरकार का प्‍लान स्‍टेडियम, बैंक्‍वेंट, कम्‍युनिटी हॉल्‍स और धर्मस्‍थलों को टेम्‍प्रेरी अस्‍पताल के तौर पर इस्‍तेमाल करने का है।

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नई दिल्ली: देश की राजधानी में कोरोना वायरस ने भयानक रफ्तार पकड़ ली है। शुक्रवार को यहां नए केसेज की संख्‍या पुराने सारे रेकॉर्ड्स तोड़ दिए। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को दिल्‍ली में 2,137 लोग पॉजिटिव टेस्‍ट हुए। इसी के साथ, दिल्‍ली में कोविड-19 के मरीजों की संख्‍या 36,824 हो चुकी है। पिछले 15 दिन के आंकड़े देखें तो दिल्‍ली और चेन्‍नई में मुंबई से दोगुनी रफ्तार से कोरोना के मामले सामने आए हैं। वहीं, दिल्‍ली में अहमदाबाद से तीन गुना तेजी से मरीज बढ़े हैं। देश के चार महानगरों का एनालिसिस बताता है कि वहां हालात कितने खराब हैं। चारों को मिला दें तो देश के 44% कोरोना केसेज यहीं पर हैं। 11 जून तक देश में कोविड-19 से जितनी मौतें हुईं, उनमें से 43% इन्‍हीं चार महानगरों में हुईं। मुंबई में कोरोना के 54 हजार से ज्‍यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहां रोज 1,000 से ज्‍यादा केस सामने आ रहे हैं। हालांकि इन्‍फेक्‍शन रेट चेन्‍नई और मुंबई में तेजी से बढ़ा हैं। 29 मई के आंकड़ों के हिसाब से चेन्‍नई में 105% तो दिल्‍ली में 100% मरीज बढ़े हैं। जबकि मुंबई में 29 मई के मुकाबले 52 प्रतिशत केस बढ़े हैं। पूरे देश में पिछले दो हफ्तों के दौरान मामलों की संख्‍या में 72% का इजाफा हुआ है। देश में कोरोना वायरस के मामले अब तेजी से बढ़ रहे हैं और हाल फिलहाल इसमें कमी आने की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक जुलाई के मध्य में या अगस्त की शुरुआत में देश में देश में कोरोना के मामलों की संख्या चरम पर पहुंच सकती है, जबकि अभी से देश में कई राज्य सरकारों की स्वास्थ्य व्यवस्था का दम फूलने लगा है। दिल्‍ली में कोरोना से मरने वालों की संख्‍या 1,214 पहुंच गई है। इनमें से 129 मरीजों की मौत की पुष्टि शुक्रवार को की गई। इनमें से 71 पिछले 24 घंटों में हुईं थीं, बाकी 58 मरीज 9 और 10 मई के बीच मारे गए। महाराष्‍ट्र (3,717) और गुजरात (1,416) के बाद दिल्‍ली में कोरोना वायरस से सबसे ज्‍यादा लोगों की मौत हुई है। टेंशन देने वाली बात ये है कि 741 मौतें (61%) सिर्फ पिछले 12 दिन में हुई हैं। मार्च में दिल्‍ली के भीतर 2 मौतें, अप्रैल में 57 मौतें और मई में कोरोना से दिल्‍ली में 414 लोगों की मौत हुई थी। 29 मई से 11 जून के बीच, कोरोना से मरने वालों के आंकड़े देखें तो प्रति 100 केसेज में अहमदाबाद में 8 मरीजों की मौत हुई है। मुंबई में यह आंकड़ा 4.4% है और दिल्ली में 4%। चारों में से चेन्‍नई का फैटलिटी रेट (1.2%) सबसे कम है। हाई फैटलिटी रेट को एक्‍सपर्ट्स बेहतर क्लिनिकल मैनजमेंट की कमी बताते हैं। यानी वहां पर या तो मामले देरी से डिटेक्‍ट हो रहे हैं या फिर टेस्टिंग कम हो रही है या फिर सिर्फ बहुत ज्‍यादा बीमार लोगों का ही टेस्‍ट हो रहा है। दिल्‍ली में 28 मई के बाद से रोज 1,000 से ज्‍यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। सिर्फ 1 जून को 1,000 से कम केस आए थे। शुक्रवार को एक बयान में दिल्‍ली के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सत्‍येंद्र जैन ने कहा कि 'बेड्स और वेंटिलेटर्स बढ़ाए जाएंगे।' उन्‍होंने केंद्र सरकार से भी मदद मांगी है। दिल्‍ली सरकार का प्‍लान स्‍टेडियम, बैंक्‍वेंट, कम्‍युनिटी हॉल्‍स और धर्मस्‍थलों को टेम्‍प्रेरी अस्‍पताल के तौर पर इस्‍तेमाल करने का है। असम में भारी बारिश और बाढ़ से जीवन अस्त-व्यस्त, वज्रपात से 4 बच्चे समेत पांच लोगों की मौत