अमेरिका में कोरोना की दवा पौने दो लाख रुपये की, भारत में इतनी सस्‍ती

ट्रायल सफल होने पर इस खास दिन लॉन्च की जाएगी कोरोना वैक्सीन

नई दिल्‍ली: कोरोना वायरस के इलाज में इस्‍तेमाल हो रही दवा रेमडेसिवीर की डिमांड बहुत ज्‍यादा है। हालात ऐसे हैं कि दवा की कालाबाजारी तक होने लगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक वॉयल के लिए मरीजों को 30 हजार से 40 हजार रुपये तक चुकाने पड़े। जबकि लोगों को दवा सस्‍ती मिले, इसीलिए रेमडेसिवीर के जेनेरिक वर्जन को बनाया और बेचा जा रहा है। अमेरिका में इसी दवा की एक डोज करीब 29 हजार रुपये की पड़ रही है जबकि भारत में कीमत 5,500 रुपये से ज्‍यादा नहीं। अभी इस ड्रग के जेनेरिक वर्जन को भारत की दो कंपनियां बना रही हैं जबकि तीसरी दवा का प्रॉडक्‍शन भी शुरू हो गया है। बढ़ते कोरोना केसेज के बीच पर्याप्‍त दवा मुहैया करा पाना बड़ी चुनौती होगा। मगर अभी बात कीमत की करते हैं।

Corona Medicine In The Us Costs A Quarter Of Two Lakhs So Cheap In India :

भारत में ये कंपनियां बना रही हैं रेमडेसिवीर का जेनेरिक वर्जन
Gilead ने भारत में Dr.Reddy’s Laboratories Ltd , Jubilant Life Sciences Ltd , Syngene International Ltd और Zydus Cadila के साथ रेमडेसिवीर बनाने और बेचने का करार किया है। अबतक भारत में तीन दवा कंपनियों- Hetero Labs, Cipla Ltd और Mylan ने रेमडेसिवीर का जेनेरिक वर्जन लॉन्‍च किया है। इन सभी को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया से रेमडेसिवीर बनाने और बेचने की मंजूरी मिल चुकी है। भारत में नियम है कि डॉक्‍टर्स को दवाओं के जेनेरिक नाम प्रिस्क्रिप्‍शन में लिखने होते हैं।

अमीर देशों के लिए महंगी है दवा
क्लिनिकल ट्रायल में रिकवरी टाइम में कमी लाने में सफल रही दवा रेमडेसिवीर की भारी डिमांड है। इसे अमेरिका की Gilead Sciences ने डेवलप किया है और उसी ने 127 लो और मिडल-इनकम वाले देशों में दवा का लाइसेंस बांटा है। अमीर देशों के लिए दवा की कीमत 2,340 डॉलर (करीब पौने दो लाख रुपये) प्रति पेशंट रखी गई है। अगले तीन महीने तक कंपनी अपनी सारी सप्‍लाई अमेरिका को देगी। एक मरीज को छह डोज की जरूरत होती है। बाकी देशों में इस दवा के जेनेरिक वर्जन तैयार किए जा रहे हैं जो तुलनात्‍मक रूप से काफी सस्‍ते हैं।

भारत में कितने हैं इन दवाओं के दाम
दवा का नाम निर्माता कंपनी कीमत (प्रति वॉयल)
Cipremi Cipla करीब 4,000 रुपये (संभावित)
Covifor Hetero Labs 5,400 रुपये
Desrem Mylan 4,800 रुपये

इस लिस्‍ट से पता चलता है कि रेमडेसिवीर के एक पूरे कोर्स की कीमत भारत में 33 हजार रुपये से ज्‍यादा नहीं होगी। यानी विकसित या यूं कहें संपन्‍न देशों के मुकाबले भारत में यह दवा करीब पांच गुना तक सस्‍ती है।

जेनेरिक ड्रग और ब्रांडेड ड्रग के फर्क को यूं सम‍झें
जब कोई फार्मा कंपनी सालों की रिसर्च के बाद कोई दवा बनाती है तो उसका पेटेंट होता है। पेटेंट के जरिए एक तय समय तक किसी और कंपनी के वह दवा बनाने पर रोक होती है। रिसर्च और डेवलपमेंट की लागत निकालने के लिए कंपनियां अक्‍सर दवा की कीमत बढ़ा-चढ़ाकर तय करती हैं। पेटेंट खत्‍म होने के बाद, बाकी दवा कंपनियां भी उस दवा का डुप्‍लीकेट तैयार कर सकती हैं। इन दवाओं को ही जेनेरिक ड्रग्‍स कहते हैं। चूंकि जेनेरिक ड्रग्‍स को बनाने में लंबे-चौड़े क्लिनिकल ट्रायल से नहीं गुजरना होता इसलिए उनकी लागत कम होती है और इसी वजह से कीमत भी।

ब्रांडेड से कितनी सस्‍ती होती हैं जेनेरिक दवाएं?
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्‍ट्रेशन (FDA) के मुताबिक, जेनेरिक दवाएं अपने ब्रांडेड वर्जन से 80 से 85 फीसदी सस्‍ती होती हैं। भारत में नैशनल लिस्‍ट ऑफ इसेंशियल मेडिसिंस (NLEM) के तहत दवाओं की कीमत तय है। यह कीमतें सभी ब्रांडेड और जेनेरिक वर्जन पर लागू होती हैं। नॉन-शेड्यूल्‍ड दवाओं यानी जो दवाएं ड्रग्‍स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पहले शेड्यूल में शामिल नहीं हैं, उनकी कीमत कंपनियां तय कर सकती हैं। हालांकि वे कीमतों में पिछले 12 महीने की MRP के 10% से ज्‍यादा की बढ़ोतरी नहीं कर सकतीं।

नई दिल्‍ली: कोरोना वायरस के इलाज में इस्‍तेमाल हो रही दवा रेमडेसिवीर की डिमांड बहुत ज्‍यादा है। हालात ऐसे हैं कि दवा की कालाबाजारी तक होने लगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक वॉयल के लिए मरीजों को 30 हजार से 40 हजार रुपये तक चुकाने पड़े। जबकि लोगों को दवा सस्‍ती मिले, इसीलिए रेमडेसिवीर के जेनेरिक वर्जन को बनाया और बेचा जा रहा है। अमेरिका में इसी दवा की एक डोज करीब 29 हजार रुपये की पड़ रही है जबकि भारत में कीमत 5,500 रुपये से ज्‍यादा नहीं। अभी इस ड्रग के जेनेरिक वर्जन को भारत की दो कंपनियां बना रही हैं जबकि तीसरी दवा का प्रॉडक्‍शन भी शुरू हो गया है। बढ़ते कोरोना केसेज के बीच पर्याप्‍त दवा मुहैया करा पाना बड़ी चुनौती होगा। मगर अभी बात कीमत की करते हैं। भारत में ये कंपनियां बना रही हैं रेमडेसिवीर का जेनेरिक वर्जन Gilead ने भारत में Dr.Reddy’s Laboratories Ltd , Jubilant Life Sciences Ltd , Syngene International Ltd और Zydus Cadila के साथ रेमडेसिवीर बनाने और बेचने का करार किया है। अबतक भारत में तीन दवा कंपनियों- Hetero Labs, Cipla Ltd और Mylan ने रेमडेसिवीर का जेनेरिक वर्जन लॉन्‍च किया है। इन सभी को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया से रेमडेसिवीर बनाने और बेचने की मंजूरी मिल चुकी है। भारत में नियम है कि डॉक्‍टर्स को दवाओं के जेनेरिक नाम प्रिस्क्रिप्‍शन में लिखने होते हैं। अमीर देशों के लिए महंगी है दवा क्लिनिकल ट्रायल में रिकवरी टाइम में कमी लाने में सफल रही दवा रेमडेसिवीर की भारी डिमांड है। इसे अमेरिका की Gilead Sciences ने डेवलप किया है और उसी ने 127 लो और मिडल-इनकम वाले देशों में दवा का लाइसेंस बांटा है। अमीर देशों के लिए दवा की कीमत 2,340 डॉलर (करीब पौने दो लाख रुपये) प्रति पेशंट रखी गई है। अगले तीन महीने तक कंपनी अपनी सारी सप्‍लाई अमेरिका को देगी। एक मरीज को छह डोज की जरूरत होती है। बाकी देशों में इस दवा के जेनेरिक वर्जन तैयार किए जा रहे हैं जो तुलनात्‍मक रूप से काफी सस्‍ते हैं। भारत में कितने हैं इन दवाओं के दाम दवा का नाम निर्माता कंपनी कीमत (प्रति वॉयल) Cipremi Cipla करीब 4,000 रुपये (संभावित) Covifor Hetero Labs 5,400 रुपये Desrem Mylan 4,800 रुपये इस लिस्‍ट से पता चलता है कि रेमडेसिवीर के एक पूरे कोर्स की कीमत भारत में 33 हजार रुपये से ज्‍यादा नहीं होगी। यानी विकसित या यूं कहें संपन्‍न देशों के मुकाबले भारत में यह दवा करीब पांच गुना तक सस्‍ती है। जेनेरिक ड्रग और ब्रांडेड ड्रग के फर्क को यूं सम‍झें जब कोई फार्मा कंपनी सालों की रिसर्च के बाद कोई दवा बनाती है तो उसका पेटेंट होता है। पेटेंट के जरिए एक तय समय तक किसी और कंपनी के वह दवा बनाने पर रोक होती है। रिसर्च और डेवलपमेंट की लागत निकालने के लिए कंपनियां अक्‍सर दवा की कीमत बढ़ा-चढ़ाकर तय करती हैं। पेटेंट खत्‍म होने के बाद, बाकी दवा कंपनियां भी उस दवा का डुप्‍लीकेट तैयार कर सकती हैं। इन दवाओं को ही जेनेरिक ड्रग्‍स कहते हैं। चूंकि जेनेरिक ड्रग्‍स को बनाने में लंबे-चौड़े क्लिनिकल ट्रायल से नहीं गुजरना होता इसलिए उनकी लागत कम होती है और इसी वजह से कीमत भी। ब्रांडेड से कितनी सस्‍ती होती हैं जेनेरिक दवाएं? अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्‍ट्रेशन (FDA) के मुताबिक, जेनेरिक दवाएं अपने ब्रांडेड वर्जन से 80 से 85 फीसदी सस्‍ती होती हैं। भारत में नैशनल लिस्‍ट ऑफ इसेंशियल मेडिसिंस (NLEM) के तहत दवाओं की कीमत तय है। यह कीमतें सभी ब्रांडेड और जेनेरिक वर्जन पर लागू होती हैं। नॉन-शेड्यूल्‍ड दवाओं यानी जो दवाएं ड्रग्‍स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पहले शेड्यूल में शामिल नहीं हैं, उनकी कीमत कंपनियां तय कर सकती हैं। हालांकि वे कीमतों में पिछले 12 महीने की MRP के 10% से ज्‍यादा की बढ़ोतरी नहीं कर सकतीं।