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भारत में अगले महीने से लोगों को मिल सकती है कोरोना वैक्सीन, चल रहा है ट्रायल

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन का इंतजार आखिरकार अगले महीने खत्म हो सकता है। देश के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बताया है कि भारत में जनवरी से लोगों को कोविड-19 की वैक्सीन देने का काम शुरू किया जा सकता है। उन्होंने बताया है कि सरकार की प्राथमिकता वैक्सीन की सुरक्षा और असर है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया है कि वैक्सीन के विकास में भारत किसी से कम नहीं है। हर्षवर्धन ने बताया है, ‘मुझे निजी तौर पर लगता है कि जनवरी में ऐसा वक्त आ सकता है कि हम भारत में लोगों को पहली कोविड-19 वैक्सीन देने के लिए तैयार हों।’ उन्होंने कहा कि रेग्युलेटर सभी वैक्सीनों का अनैलेसिस करेगा, उनका भी जिन्होंने इमर्जेंसी में इस्तेमाल के लिए आवेदन किया है। उन्होंने बताया है कि भारत कोविड-19 वैक्सीन और रिसर्च के मामले में किसी देश से पीछे नहीं है। इससे पहले शनिवार को उन्होंने कहा था कि वैज्ञानिक और एक्सपर्ट्स स्वदेशी वैक्सीन पर काम कर रहे हैं और 6-7 महीने में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन देनी की क्षमता हासिल कर ली जाएगी। उन्होंने बताया था, ‘जीनोम सीक्वेंसिंग और कोरोना वायरस का आइसोलेशन कर वैक्सीन बनाई जा रही है।’

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डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में क्रिसमस के तुरंत बाद ऑक्सफर्ड की कोरोना वायरस वैक्सीन को मंजूरी दी जा सकती है। ब्रिटेन के मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट रेगुलेटरी एजेंसी (MHRA) इस वैक्सीन को 28 या 29 दिसंबर को मंजूरी दे सकता है। यह एजेंसी ऑक्सफर्ड के वैज्ञानिकों के अंतिम आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि ये आंकड़े इनको सोमवार को सौंप दिए जाएंगे। ब्रिटेन में अबतक 1 लाख 40 हजार लोगों को फाइजर बायोएनटेक की कोरोना वायरस वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है।

इस वैक्सीन को माइनस 70 डिग्री के तापमान पर रखने की जरूरत होती है। जबकि, ऑक्सफर्ड की कोरोना वायरस वैक्सीन को कमरे के तापमान पर भी रखा जा सकता है। ऐसे में इस वैक्सीन की मांग और इसे दूर दराज के इलाकों तक लेकर जाने में काफी सहूलियत होने वाली है। वहीं ब्रिटेन के पूर्व स्वास्थ्य सचिव जेरेमी हंट ने शनिवार को दावा किया कि फाइजर वैक्सीन की उपलब्ध खुराक जनवरी में खत्म जाएगी और मार्च तक कोई अन्य शिपमेंट नहीं आ पाएगा। इसका सीधा साअर्थ है कि ब्रिटेन में अगर जल्दी कोरोना की दूसरी वैक्सीन नहीं आती है तो टीकाकरण कार्यक्रम रुक सकता है। हालांकि, फाइजर के प्रवक्ता ने जेरेमी हंट के इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी वैक्सीन की डिलिवरी तय समय पर की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन को मार्च से पहले ही नई शिपमेंट मिल जाएगी।

ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्रालय नेशनल हेल्थ सर्विस ने ऑक्सफर्ड को 10 करोड़ वैक्सीन की डोज बनाने का ऑर्डर पहले ही दे दिया है। टेलिग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, अगर ब्रिटेन में ऑक्सफर्ड की कोरोना वायरस वैक्सीन को दिसंबर में अनुमति दे दी जाती है तो देश के सभी फुटबाल और क्रिकेट के मैदानों को जनवरी के पहले हफ्ते में खोला जा सकता है। ब्रिटेन के मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट रेगुलेटरी एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा है कि ‘ऑक्सफर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर हमारी समीक्षा अब भी जारी है। टीके को मंजूरी देने के लिए हमारी प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन की गई है कि कोई भी अधिकृत कोरोना वायरस वैक्सीन सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता के अपेक्षित उच्च मानकों को पूरा करता हो।

देश में कई वैक्सीनों का चल रहा ट्रायल
आपको बता दें कि देश में 6 वैक्सीन कैंडिडेट ट्रायल के अलग-अलग चरणों पर हैं जिनमें Covishield, Covaxin, ZyCoV-D, Sputnik V, NVX-CoV2373 और रीकॉम्बिनेंट प्रोटीन ऐंटीजन पर आधारित वैक्सीन शामिल हैं। इनके अलावा तीन वैक्सीन प्री-क्लिनिकल स्टेज पर हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया था कि सभी वैक्सीनों की दो से तीन खुराकें दी जाएंगी। उन्होंने साफ किया था कि वैक्सीन देने के बाद भी कोविड-19 से सुरक्षा के लिए लोगों को एहतियात बरतने होंगे। आपको बता दें कि ब्रिटेन और अमेरिका में Pfizer-BioNTech की कोरोना वायरस वैक्सीन को इमर्जेंसी में इस्तेमाल की इजाजत दे दी गई है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ऐलान किया है कि Moderna की वैक्सीन को भी देश में इस्तेमाल की इजाजत दे दी गई है।

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