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कोरोना वैक्सीन: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की बड़ी कामयाबी, बंदरों पर ट्रायल सफल

Corona Vaccine Oxford Universitys Big Success Trial On Monkeys Successful

By रवि तिवारी 
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ब्रिटेन के सबसे बड़े कोरोना वायरस वैक्सीन प्रॉजेक्ट में ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी को सकारात्मक नतीजे मिले हैं। बंदरों पर की गई स्टडी में वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी बढ़ती देखी गई है और कोई साइड इफेक्ट भी नहीं मिला है। ChAdOx1 nCoV-19 का ट्रायल कर रहे रीसर्चर्स ने बताया है कि वैक्सीन का ट्रायल 6 Rhesus Macaque बंदरों पर किया गया जिसमें पाया गया कि उनका इम्यूनिटी सिस्टम वायरस से लड़ने के लिए तैयार हो गया।

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फेफड़े बचे, निमोनिया भी नहीं

स्टडी में पाया गया कि वैक्सीन की एक डोज से फेफड़ों को होने वाला नुकसान भी बचाया जा सका। कोरोना का सबसे बड़ा हमला शरीर में फेफड़ों पर ही होता है। वैक्सीन शरीर को वायरस से लड़ने के लिए जरूरी सेल्स और ऐंटीबॉडी बनाने में मदद करती है। रीसर्चर्स ने बताया, ‘SARS-CoV-2 से पीड़ित जिन जानवरों को वैक्सीन दी गई थी, उनके फेफड़ों और सांस की नली के टिशू में वायरस काफी कम मात्रा में पाया गया जबकि जिन जानवरों को वैक्सीन नहीं दी गई थी उनमें यह काफी बढ़ा हुआ था। जिन जानवरों को वैक्सीन दी गई थी उन्हें निमोनिया भी नहीं हुआ।’

इंसानों पर असर देखना जरूरी

स्टडी में यह भी पाया गया कि ज्यादा कोरोना वायरस और फिर वैक्सीन से इन्जेक्ट किए जाने पर किसी भी बंदर में वायरल निमोनिया नहीं था। न ही वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट पाया गया। हालांकि, फिलहाल यह पुष्ट होना ज्यादा जरूरी है कि क्या इंसानों पर भी इसका इतना ही असर होगा। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के जेनर इंस्टिट्यूट की वैक्सनॉलजी प्रफेसर सेरा गिलबर्ट का कहना है कि ज्यादा आबादी पर इस्तेमाल करने से पहले इसे टेस्ट करके डेटा लिया जाना है और साबित करना है कि यह काम करती है और वायरस को फैलने से रोकती है।

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साल के अंत तक उत्पादन की उम्मीद

ब्रिटेन की दवा बनाने वाली कंपनी AstraZeneca ने ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के साथ पार्टनरशिप की है और दावा किया है कि ट्रायल सफल होने पर साल के अंत तक दवा के 100 मिलियन डोज तैयार कर लिए जाएंगे। हालांकि, अब यह भी एक समस्या है कि टेस्ट के लिए जरूरी प्राकृतिक तौर पर वायरस की चपेट में आने वाले ऐक्टिव ममलों की संख्या शायद पर्याप्त नहीं है।

विकासशील देशों के लिए जरूरी

अगर ब्रिटेन में ट्रायल सफल होता है तो ऑक्सफर्ड की टीम केन्या मेडिकल रीसर्च इंस्टिट्यूट के साथ मिलकर केन्या की सरकार से वहां टेस्ट करने की इजाजत लेगी। इस बात की भी तैयारी की जा रही है कि वैक्सीन के बनने के साथ ही बड़े स्तर पर इसका उत्पादन किया जा सके ताकि विकासशील देशों में इसे पहुंचाया जा सके जहां जरूरत ज्यादा है। दूसरी ओर अगले महीने तक ब्रिटेन के फ्रंटलाइन हेल्थवर्कर्स पर किए गए पहले बैच के ट्रायल के नतीजे आने की भी उम्मीद है।

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