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चीन की लैब में ही बना कोरोना वायरस, एक हादसे से पूरी दुनिया में फैला

By रवि तिवारी 
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नई दिल्ली। कोरोना वायरस की शुरुआत को लेकर जारी मतभेदों के बीच फ्रांस के वायरोलॉजिस्ट और मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार जीत चुके ल्यूक मॉन्टेनियर ने सनसनीखेज दावा किया है। मॉन्टेनियर का दावा है कि दुनियाभर में महामारी फैलाने वाला नया कोरोना वायरस ‘कृत्रिम’ है और यह चीन की एक लैबोरेट्री में AIDS वायरस के खिलाफ वैक्सीन बनाने के दौरान निकला है। AIDS वायरस की खोज के लिए मॉन्टेनियर को 2008 में दो अन्य वैज्ञानिकों के साथ नोबेल पुरस्कार मिला था।

‘कोरोना वायरस के जीनोम (Genome) में एचआईवी (HIV) सहित मलेरिया (Malaria) के जर्म के तत्व पाए गए हैं, जिससे शक होता है कि यह वायरस प्राकृतिक रूप से पैदा नहीं हो सकता। वुहान (Wuhan) की बायोसेफ्टी लैब चूंकि साल 2000 के आसपास से ही कोरोना वायरसों को लेकर विशेषज्ञता के साथ रिसर्च कर रही है इसलिए यह नोवल कोरोना वायरस (Novel Corona Virus) एक तरह के औद्योगिक हादसे का नतीजा हो सकता है।’

एड्स वायरस की खोज करने में शामिल रहे लूक ने हाल ही, एक फ्रांसीसी चैनल को दिए इंटरव्यू में इस तरह की थ्योरी दी और हंगामा खड़ा कर दिया। आइए जानें कि इस थ्योरी पर भरोसा कितना किया जा सकता है।

सोशल मीडिया और चीन की प्रतिक्रिया

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर इस तरह की अफ़वाहें थीं कि कोविड 19 महामारी किसी किस्म के जैनेटिक छल कपट से पैदा की गई है। लूक की थ्योरी के आने के बाद इन थ्योरीज़ को और बल मिला। दूसरी तरफ, चीन ने लूक के दावे का पूरी खंडन करते हुए कहा है कि लैब से वायरस विकसित होने का कोई सबूत नहीं है और न ही लूक की थ्योरी का कोई वैज्ञानिक आधार है।

क्या है इस थ्योरी का वैज्ञानिक आधार?

लूक की पूरी थ्योरी एक आधार पर टिकी है कि SARS-CoV-2 नामक वायरस के पूरे जीनोम में एचआईवी-1 के कुछ न्यूक्लिओटाइड सीक्वेंस पाए गए हैं। बाकी का बयान इसी आधार पर लूक की परिकल्पना है। अब इस आधार को कैसे समझा जाए?

यह वैज्ञानिक आधार ही गलत है?

यूरोपियन साइन्टिस्ट पर प्रकाशित ताज़ा लेख में लूक की इस थ्योरी का पूरा विश्लेषण करते हुए कोरोना वायरस यानी SARS-CoV-2 और एचआईवी-1 के जेनेटिक कोड्स बताकर समझाया गया है कि दोनों में कोई सीधी समानता नहीं है। कहा गया है कि SARS-CoV-2 में एचआईवी का कोई अंश नहीं पाया जाता।

तमाम वैज्ञानिक डिटेल्स के ज़रिये समझाने के बाद इस विश्लेषण में लिखा गया है कि ताज़ा कोरोना वायरस कहां से पैदा हुआ, इसके बारे में संभावित और तार्किक थ्योरीज़ पहले ही आ चुकी हैं। लगातार साज़िश के तहत कई भ्रामक थ्योरीज़ सामने आ रही हैं लेकिन अगर आप सच्चाई जानना चाहते हैं तो नेचर पत्र के उस लेख को पढ़ें जिसमें ताज़ा कोरोना वायरस के जीनोम को लेकर विस्तार से चर्चा है और दूसरे कोरोना वायरसों के साथ इसके अंतर को साफ तौर पर समझाया गया है।  

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