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कोरोना का कहर: दिवालिया होने की कगार पर दुनिया के विकसित देश?

Coronas Havoc Developed Countries On The Verge Of Bankruptcy

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: आईएमएफ (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड) की जो नई रिपोर्ट आई है उसके अनुसार पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था माइनस 3 वार्षिक की रफ्तार से आगे बढ़ेगी। वैश्विक स्तर पर जीडीपी में गिरावट आएगी। वर्तमान में विश्व की विकास दर 2.9 फ़ीसदी आगे बढ़ रही थी। जो अब 3 फ़ीसदी माइनस में चली जाएगी। अमेरिका की विकास दर माइनस 5.9 जर्मनी की – 7 फ्रांस की, 7.2 इटली की – 9.1 ब्राजील – 5.3 दक्षिण अफ्रीका – 5.8 की विकास दर होगी उसकी तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था 1.9 फ़ीसदी तथा चीन की अर्थव्यवस्था 1.2 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ेगी सारी दुनिया के देशों में 1930 के बाद सबसे बड़ी आर्थिक मंदी के हालात बन गए हैं विकसित देशों के ऊपर आर्थिक भार बहुत ज्यादा बढ़ गया है कर्ज और राजकोषीय घाटा ज्यादा होने से कोरोनावायरस का जो संकट सामने आया है उसके बाद वैश्विक मंदी की सबसे खराब चपेट में विकसित राष्ट्र आ रहे हैं।

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आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका जर्मनी फ्रांस इटली ब्राजील जैसे दर्जनों देश आर्थिक रूप से दिवालियापन की कगार पर खड़े हो गए हैं कोरोनावायरस के कारण यह लॉक डाउन कुछ माह और चला तो आर्थिक दिवालियापन से विकसित राष्ट्र भी नहीं बच पाएंगे आर्थिक मंदी तथा बेरोजगारी के कारण सारी दुनिया के देश 90 साल बाद आर्थिक बदहाली का सामना करेंगे। वर्तमान में लगभग सभी देशों की सरकारों के ऊपर संस्थाओं और व्यक्तियों के ऊपर भारी कर्ज है। यह पहली बार हुआ है। जब सभी अर्थव्यवस्था कर्ज के बोझ से दबी हुई हैं। जिसके कारण दिवालिया होने जैसी स्थितियां लगभग सभी देशों में बड़ी तेजी के साथ बन रही हैं। 2008 की आर्थिक मंदी में अमेरिका के सैकड़ों बैंक और नगरीय संस्थाएं दिवालिया हो गई थी ।2020 में अब ऐसी ही स्थिति कई देशों की बन गई है। अमेरिका सहित तेल उत्पादक देशों की कमाई तेजी से कम हुई है। वहीं सभी देशों के आर्थिक मंदी के इस दौर में खर्च बढ़ें हैं। जिसके कारण सरकारों का राजकोषीय घाटा बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहा है। सरकारें भी कर्ज का भुगतान करने की स्थिति में नहीं रहेगी।

चीन ने 1992 के बाद से विकास दर के आंकड़े देना शुरू किए थे। चीन में पिछली तिमाही में 6 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। 1992 के बाद चीन के लिए यह सबसे बड़ी गिरावट है। नवंबर माह से चीन में कोरोनावायरस का संक्रमण फैल गया था। उसके बाद लगभग 4 महीने तक चीन के विभिन्न प्रांतों में लॉकडाउन की स्थिति बनी रही। जिसके फलस्वरूप चीन की आर्थिक विकास दर बड़ी तेजी के साथ गिरी। अप्रैल माह में चीन ने फिर अपनी औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। जिसके कारण यह माना जा रहा है कि वर्ष 2020 में चीन की आर्थिक विकास दर 1.2 फ़ीसदी होगी। भारत में भी आर्थिक संकट बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहा है। सरकार ने अपने खर्चों में कटौती शुरू कर दी है। सीएसआर फंड, सांसद निधि, एवं अन्य फंड को सरकार सीधे अपने कोष में लाने के प्रावधान करना शुरू कर दिया हैं। अमेरिका ने भी बड़े पैमाने पर आर्थिक स्थिति से निपटने के लिए बेरोजगारों और औद्योगिक संगठनों को आर्थिक पैकेज दिया है। भारत में अभी तक जो पैकेज दिया है।

वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। भारत सरकार,राज्य सरकारों तथा नगरीय निकायों के ऊपर पिछले 15 वर्षों में कर्ज़ काफी बढा है। भारत में टेक्स्ट का कलेक्शन लक्ष्य से इस साल कम हुआ है। लॉक डाउन के कारण 40 दिनों में लगभग 12 लाख का नुकसान होने की बात कही जा रही है। किसानों एवं व्यापारियों को मार्च एवं अप्रैल माह में लाख डाउन के कारण अरबों रुपए का नुकसान हुआ है। भारत की सारी गतिविधियां पहली बार सारे देश में थम गई हैं। रेल, बसें, ट्रांसपोर्ट हवाई जहाज सब बंद है। औद्योगिक प्रतिष्ठान एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान लगभग एक माह से बंद है। जनता कर्फ्यू के कारण लोग अपने घरों में कैद हैं। ऐसी स्थिति में लगभग सभी सेक्टर सरकार से आर्थिक सहयोग की मांग कर रहे हैं। भारत में करोड़ों युवा बेरोजगार हैं। लॉकडाउन के कारण करीब दो करोड़ कामगारों का हाल ही में काम छिन गया है। भारत के लोगों की क्रय शक्ति, कर्ज के कारण बहुत कम है। ऐसी स्थिति में भारत के बारे में यदि आईएमएफ का यह अनुमान है कि भारत की विकास दर 1.9 फ़ीसदी होगी तो इसके पीछे भारत की बड़ी आबादी एक मात्र कारण है। कृषि अर्थव्यवस्था भारत की अन्य देशों के मुकाबले काफी अच्छी है। ऐसी स्थिति में चीन और भारत ही दो देश ऐसे हैं, जो इस आर्थिक मंदी के दौर में सारी दुनिया के देशों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

कोरोनावायरस का कहर अभी कम नहीं हुआ है। अमेरिका में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 771197 तथा मृतकों की संख्या 41356 ,स्पेन में संक्रमित लोगों की संख्या 2.00210 तथा मृतकों की संख्या 20852, इटली में संक्रमित लोगों की संख्या 1.81228, तथा मृतकों की संख्या 201141, फ्रांस में संक्रमित लोगों की संख्या 1.52894, तथा मृतक संख्या 19418 तथा जर्मनी में संक्रमित लोगों की संख्या 1,46293 तथा मृतक संख्या 4683 इगलैंड में संक्रमित124743 तथा मृतकों की संख्या 16509 पर पहुंच गई है। इन देशों में संक्रमण कम होने की स्थान पर बढ़ता जा रहा है। वही सिंगापुर और चीन में कोरोनावायरस का संक्रमण दोबारा फैल रहा है। ऐसी स्थिति में सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंता देखने को मिल रही है।

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2003 के बाद से सारी दुनिया के देश वैश्विक व्यापार संधि के अंतर्गत आर्थिक लेनदेन, आयात निर्यात एवं कर्ज तथा निवेश एक-दूसरे देशों में कर रहे थे आर्थिक मंदी और कोरोनावायरस के लाक डाउन के बाद जब सारे विकसित एवं विकासशील देशों की विकास दर माइनस की ओर जा रही है। ऐसी स्थिति में सारी दुनिया में क्रय शक्ति बड़ी तेजी के साथ घटी है। अभी तक जीडीपी का जो पैमाना था। वह विकास का था। अब जीडीपी का जो पैमाना होगा वह माइनस का होगा ऐसी। स्थिति में चीन और भारत किस तरह से दुनिया का नेतृत्व कर सकते हैं। आर्थिक संकट के इस दौर में कौन अपनी अहमियत बना सकता है। यह दोनों देशों के नेतृत्व और उनकी नीतियों पर निर्भर करेगा। अमेरिका और चीन के संबंध इन दिनों काफी खराब चल रहे हैं । कोरोनावायरस का संक्रमण चीन से सारी दुनिया में फैला है। जिसके कारण चीन की मुश्किलें भी भारत की तुलना में ज्यादा है। भारत के चीन के साथ सीमा संबंधी विवाद पिछले कई वर्षों से लंबित चल रहे हैं। हाल ही में भारत सरकार ने सीमावर्ती देशों के निवेश पर जो प्रतिबंध लगाया है। उससे चीन भड़का हुआ है। वैश्विक मंदी और आर्थिक संकट के इस दौर में दुनिया के सभी देशों के बीच आपसी विवाद बढ़ रहे हैं।

जर्मनी ने चीन से कोरोना संक्रमण के कारण जो नुकसान हुआ है। उसके भुगतान की मांग की है। अमेरिका भी चीन पर दबाव बना रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद तथा डब्ल्यूएचओ जैसी संस्थाएं कमजोर पड़ गई हैं। विश्व बैंक और एशियाड बैंक जैसे वित्तीय संस्थान भी आर्थिक मंदी के इस दौर में अपना अस्तित्व किस तरह बनाए रखेंगे। इसको लेकर अनिश्चितता का माहौल सारी दुनिया में देखने को मिल रहा है। राजनीतिक एवं आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार सारी दुनिया एक बार फिर 100 साल पुराने संकट के दौर में जाती हुई दिख रही है। भारत का नेतृत्व यदि भारत की बड़ी आबादी और भारतीय संसाधनों का बेहतर ढंग से उपयोग करने के लिए नीतियों में व्यापक बदलाव करें. ऐसी स्थिति में कोई आश्चर्य नहीं है, कि आने वाला समय भारत के लिए आर्थिक, सामरिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विश्व गुरु बनने का समय है। कोरोनावायरस और आर्थिक मंदी ने भारत के लिए एक नया अवसर पैदा किया है। इसके लिए वर्तमान सरकार को अपने राजनीतिक एवं आर्थिक सोच में परिवर्तन लाने की जरूरत है।

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