4 हजार दरोगा एवं प्लाटून कमांडर की चयन प्रक्रिया रद्द, ट्रेनिंग भी हो चुकी थी शुरू

लखनऊ| इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दरोगा और प्लाटून कमांडर के 4 हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति प्रकिया रद करने के एकल पीठ के आदेश पर गुरुवार को मुहर लगा दी| अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की विशेष अपील को भी खारिज कर दिया| इस परीक्षा की चयन सूची जारी करने के बाद सरकार चुने हुए दरोगाओं की ट्रेनिंग भी शुरू करवा चुकी थी|




फैसला सुनाते हुए बेंच ने कहा कि चयन प्रकिया मे तमाम अनियमिता स्पष्ट थी| चयन प्रकिया में क्षैत‍िज आरक्षण को गलत तरीके से लागू किया था| पदों के तीन गुना से अधिक अभ्यर्थियों केा इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था| कुछ अभ्यर्थ‍ियों को राउडिंग मार्क्स द‍िए गए थे जिससे अयेाग्य अभ्यर्थियों को भी साक्षात्कार के लिए बुला लिया गया था| चयन के समय जो प्रकिया अपनायी गई थी वह सेवा नियमावली में दी गई प्रकिया के इतर थी| इन्हीं आधारों पर एकल पीठ ने चयर प्रकिया रद कर लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित कर नए सिरे से पूरी भर्ती प्रकिया पूरी करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया था| डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के उक्त निर्णय मे केाई खामी नहीं पाई|




बतातें चलें कि राज्य सरकार ने 2011 में 4010 पदों पर सिविल पुलिस व प्लाटून कमांडरों की भर्ती प्रकिया प्रारम्भ की थी| 26 जून 2015 को उक्त चयन प्रकिया पूरी कर ली गई थी और सफल अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग पर भी भेज दिया गया था| कुछ असफल अभ्यर्थियों ने उक्त चयन प्रकिया केा रिट याचिका दायर कर हाईकेार्ट में चुनौती दी थी| उनका तर्क था कि लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित करने मे क्षैत‍िज आरक्षण का ठीक से पालन नहीं हुआ| नियमों के अनुसार पदों के सापेक्ष तीन गुना के बजाय 5 गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया| जस्टिस राजन राय की सिंगल बेंच ने 24 अगस्त 2015 को उन अभ्यर्थियों की यचिकाओं पर चयन प्रकिया खारिज कर सरकार को निर्देश दिया था कि लिखित परीक्षा से भर्ती प्रकिया आगे बढ़ाकर उसे पूरा किया जाए| सिंगल जज के उपरोक्त फैसले के खिलाफ धर्मेंद्र कुमारऔर अन्य ने डिवीजन बेंच के सामने उक्त फैसले केा चुनौती दी थी। राज्य सरकार ने भी अलग अपील फाइल कर उक्त फैसले को चुनौती दी थी। अलग-अलग दायर इन अपीलों पर सुनवाई कर डिवीजन बेंच ने गुरुवार को उन्हें खारिज कर दिया।

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