अनोखा मामला: जिस घर के सामने रुकी गाय, कोर्ट ने माना उसे मालिक

cow

नई दिल्ली। जोधपुर की अदालत में पिछले 6 महीने से चल रहे अनोखे मुकदमे का शन‍िवार को महानगर मजिस्ट्रेट ने गाय के मालिकाना हक को लेकर अपना फैसला सुना दिया। दरअसल, इस गाय के स्‍वामित्‍व को लेकर दो लोगों के बीच पिछले साल से ही विवाद चल रहा था। दोनों पक्षों ने इसके हल के लिए अदालत की शरण ली थी। अंतत: अदालत ने सभी सबूतों को ध्‍यान में रखते हुए इस गाय को ओम प्रकाश को सौंप दिया।

Cow Produced Before Jodhpur Local Court On Ownership Issue :

गाय के मालिकाना हक को लेकर पिछले एक साल से कॉन्स्टेबल ओमप्रकाश व पक्षकार श्यामलाल अध्यापक के बीच विवाद चल रहा है। दोनो ही पक्ष गाय पर अपना हक जता रहे थे। विवाद इतना बढ गया कि मंडोर थाने में मुकदमा दर्ज होने के साथ ही गाय के मालिकाना हक को तय करने के लिए फाइल कोर्ट तक पहुच गई।

कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्त को अपनाते हुए निष्पक्ष रूप से दोनों पक्षो के गवाहों को सुनने के साथ ही मामले में कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट देखने के बाद शनि‍वार को आखिरकार इस मामले का खत्म करते हुए अपना फैसला सुना दिया है। प्रार्थी अध्यापक श्याम लाल ने इस फैसले को लेकर कहा कि उसे न्याय की उम्मीद थी लेकिन फैसला उसके खिलाफ गया है। वो अब न्याय की लड़ाई को लड़ेगा और ऊपरी अदालत में अपील पेश करेगा, लेकिन अपनी गाय को लेकर रहेगा।

वहीं, पक्षकार ओमप्रकाश के हक में फैसला होने से उसके अधिवक्ता रमेश विश्नोई व पक्षकार दोनो खुश थे और कहा कि न्याय की जीत हुई है। उनको पूरी उम्मीद थी कि फैसला उनके हक में होगा क्योकि कोर्ट कमिश्नर ने जब गाय को खुला छोड़ा था तो उनके घर के सामने ही गाय आकर खड़ी हो गई थी।

दरअसल, कहानी 6 माह पहले की है। जोधपुर के रहने वाले पुलिस कांस्टेबल ओम प्रकाश व स्कूल के मास्टर शिव राम परिहार दोनों में एक गाय के मालिकाना हक को लेकर ठन गई और दोनों पुलिस थाने पहुंचे। पुलिस थाने में लंबी पूछताछ के बाद न्याय तक नहीं पहुंचा तो पुलिस ने गाय को गौशाला में भेज दिया।

गाय के गौशाला में जाने के बाद गाय के मालिकाना हक के लिए दोनों ही पक्ष कोर्ट पहुंचे और कोर्ट में अपनी अपनी दावेदारी करने लगे। कभी-कभी कोर्ट में भी ऐसे मामले आते हैं जिनका न्याय और निर्णय करना नामुमकिन सा होता है और ऐसा ही इस केस में हुआ। मजिस्ट्रेट ने एक नया फार्मूला निकाला और दोनों पक्षों से रजामंदी लेकर आगे बढ़े।

नई दिल्ली। जोधपुर की अदालत में पिछले 6 महीने से चल रहे अनोखे मुकदमे का शन‍िवार को महानगर मजिस्ट्रेट ने गाय के मालिकाना हक को लेकर अपना फैसला सुना दिया। दरअसल, इस गाय के स्‍वामित्‍व को लेकर दो लोगों के बीच पिछले साल से ही विवाद चल रहा था। दोनों पक्षों ने इसके हल के लिए अदालत की शरण ली थी। अंतत: अदालत ने सभी सबूतों को ध्‍यान में रखते हुए इस गाय को ओम प्रकाश को सौंप दिया। गाय के मालिकाना हक को लेकर पिछले एक साल से कॉन्स्टेबल ओमप्रकाश व पक्षकार श्यामलाल अध्यापक के बीच विवाद चल रहा है। दोनो ही पक्ष गाय पर अपना हक जता रहे थे। विवाद इतना बढ गया कि मंडोर थाने में मुकदमा दर्ज होने के साथ ही गाय के मालिकाना हक को तय करने के लिए फाइल कोर्ट तक पहुच गई। कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्त को अपनाते हुए निष्पक्ष रूप से दोनों पक्षो के गवाहों को सुनने के साथ ही मामले में कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट देखने के बाद शनि‍वार को आखिरकार इस मामले का खत्म करते हुए अपना फैसला सुना दिया है। प्रार्थी अध्यापक श्याम लाल ने इस फैसले को लेकर कहा कि उसे न्याय की उम्मीद थी लेकिन फैसला उसके खिलाफ गया है। वो अब न्याय की लड़ाई को लड़ेगा और ऊपरी अदालत में अपील पेश करेगा, लेकिन अपनी गाय को लेकर रहेगा। वहीं, पक्षकार ओमप्रकाश के हक में फैसला होने से उसके अधिवक्ता रमेश विश्नोई व पक्षकार दोनो खुश थे और कहा कि न्याय की जीत हुई है। उनको पूरी उम्मीद थी कि फैसला उनके हक में होगा क्योकि कोर्ट कमिश्नर ने जब गाय को खुला छोड़ा था तो उनके घर के सामने ही गाय आकर खड़ी हो गई थी। दरअसल, कहानी 6 माह पहले की है। जोधपुर के रहने वाले पुलिस कांस्टेबल ओम प्रकाश व स्कूल के मास्टर शिव राम परिहार दोनों में एक गाय के मालिकाना हक को लेकर ठन गई और दोनों पुलिस थाने पहुंचे। पुलिस थाने में लंबी पूछताछ के बाद न्याय तक नहीं पहुंचा तो पुलिस ने गाय को गौशाला में भेज दिया। गाय के गौशाला में जाने के बाद गाय के मालिकाना हक के लिए दोनों ही पक्ष कोर्ट पहुंचे और कोर्ट में अपनी अपनी दावेदारी करने लगे। कभी-कभी कोर्ट में भी ऐसे मामले आते हैं जिनका न्याय और निर्णय करना नामुमकिन सा होता है और ऐसा ही इस केस में हुआ। मजिस्ट्रेट ने एक नया फार्मूला निकाला और दोनों पक्षों से रजामंदी लेकर आगे बढ़े।