राजस्थान : दो दिनों में 700 गायों की मौत, सैकड़ों की स्थिति गंभीर

जोधपुर। जालोरी-सिरोही में हुई बारिश यहां की गौशाला की गायों पर आफत बनकर टूटी है। इस बारिश से हुए जलभराव से अभी तक सात सौ से अधिक गायों की मौत हो चुकी है। वहीं पानी में फंसी सैकड़ों गायें अभी मदद का इंतजार कर रही है। गौशाला के पानी में डूबने से चारा तक नहीं बचा है। गौशाला के संचालक विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं और ग्रामीणों की मदद से गायों को बचाने की मुहिम में जुटे है।

जालोर व सिरोही क्षेत्र में पथमेड़ा गौशाला की विभिन्न शाखाओं में दो लाख गाय है। इसका मुख्यालय पथमेड़ा में है। एक सप्ताह से इन दोनों जिलों में सबसे अधिक बारिश हुई। जोरदार बारिश के कारण इन गौशालाओं में पानी भर गया। लगातार हो रही बारिश के चलते कर्मचारियों को गायों को पानी से बाहर निकलने का अवसर तक नहीं मिला। पानी में फंसने के कारण गायों की मौत हो गई। वहीं कई गाय पानी में फंसी हुई है। ये गायें अब खड़े होने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में स्वयं सेवक इन गायों को पानी से निकाल कर किसी सूखे स्थान की तरफ ले जा रहे है।

यहां करीब 200 गाय मरणासन्न हालत में हैं जिन्हें बचाने के लिए ग्वाले, प्रबंधन के लोग और संन्यासी जी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं। सरकार के पक्ष से थोड़ी बहुत जो मदद पहुंची है उसे ऊंट के मुंह में जीरा ही कहा जा सकता है। गायों के लिए दवाइयों और पौष्टिक आहार की भारी किल्लत महसूस की जा रही है।

पथमेड़ा के गोविन्द वल्लभ महाराज ने दुखी मन से बताया कि बड़ी संख्या में गायों की मौत हो चुकी है और बची हुई गायों को तुरंत मदद की दरकार है। यदि समय रहते चिकित्सा सुविधा व आहार नहीं मिला तो सैकड़ों गायों की और मौत हो सकती है। मोटे अनुमान के अनुसार अब तक सात सौ गायों की मौत हो चुकी है। जबकि एक हजार से अधिक गाय पानी में फंसी हुई है। बताया जा रहा है कि तेज बारिश के कारण कई गोशालाओं में बहुत तेज प्रवाह के साथ घुसे पानी के साथ कई गाय बह गई। जालोर सांसद देवजी पटेल व सांचौर विधायक सुखराम विश्नोई गोशालाओं का जायजा ले गए है, लेकिन अभी तक सरकारी स्तर पर किसी तरह की मदद गोशाला को नहीं मिल पाई है।