नाबालिग के स्केच ने दुष्कर्मी रिश्तेदार को पहुंचाया जेल

नई दिल्ली। नई दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए 10 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में रिश्तेदार को दोषी करार देते हुए पांच साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दो साल से विचाराधीन इस मामले में बच्ची के पास से मिले एक स्केच को आधार मानते हुए आरोपी रिश्तेदार के खिलाफ फैसला सुनाया।

मिली जानकारी के मुताबिक मूल रूप से कोलकाता में रहने वाली बच्ची को मां के देहान्त के बाद शराबी पिता ने घर में नजरबंद कर दिया था। दिल्ली में रहने वाली बच्ची की महिला रिश्तेदार उसे अपने साथ दिल्ली ले आई। दिल्ली पहुंचने के साथ ही बच्ची के साथ यातनाओं का दूसरा दौर शुरू हो गया। उसकी रिश्तेदार के पति अख्तर अहमद ने कई बार बच्ची का शारीरिक शोषण किया। महिला ने भी बच्ची से दूसरों के घरों में काम करवाया। जब प्रताणनाओं की हद हो गई तो बच्ची घर से भाग गई। नवंबर 2014 को यह बच्ची एक बस में मिली थी जिसे एक संस्था के माध्यम से बालगृह पहुंचाया गया।




इस बच्ची के मामले को लेकर दो वर्ष पूर्व समाजसेवी संस्था की ओर से उसके रिश्तेदारों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया था। कानूनी के फंदे से बचने के लिए अख्तर अहमद भाग निकला। जिसे जून 2016 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। अख्तर के वकील ने अदालत के सामने दलील रखी कि बच्ची को बहला फुसलकार ऐसे आरोप लगवाए जा रहे हैं।
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इसी दौरान अदालत के समक्ष बच्ची के पास से मिले एक स्केच को रखा गया। ​उस स्केच को देखने के ​बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आठ साल जैसी उम्र में बच्ची ने तरह तरह की प्रताड़नाएं झेली हैं। जिनका असर उसकी मानसिकता पर पड़ा है जो उसके द्वारा बनाए गए स्केच में भावनाओं के रूप में सामने आया है। इस आधार पर अदालत ने बच्ची की काउंसलिंग भी करवाई।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा है​ कि जिस उम्र में बच्ची का अलग—अलग तरह की प्रताडनाओं से सामना हुआ निश्चित ही उस उम्र में इन सब बातों की समझ वह नहीं रखती थी। स्केच के माध्यम से जिस तरह से उसने एक बंद मकान और उतरे हुए कपड़ों को बनाया, उसे देखने के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि इन चीजों ने उसके मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। कहीं न कहीं इन सभी से उसकी बुरी यादें जुड़ीं हैं, जिन्हें उसने कागज पर भावनाओं के रूप में उतारा। चिकित्सीय परीक्षण में बच्ची के साथ शरीरिक शोषण किए जाने की बात नकारी नहीं जा सकी, चूंकि दो साल बाद चिकित्सीय आधार पर यह सबित नहीं हो सकता। इसलिए यह माना जाएगा कि बच्ची के संरक्षण की जिम्मेदारी लेने वाले ने ही उसके साथ बार बार शोषण किया।




इसी आधार पर अदालत ने अख्तर के खिलाफ पांच साल की जेल और 10 हजार के हर्जाने की सजा सुनाते हुए कहा कि संभव है कि आगे की अपील में दोषी जेल की सजा से बच जाए, इसलिए अदालत बच्ची के नाम 3 लाख की एफडी (फिक्स डिपॉजिट) करवाने का निर्देश देती है। जिससे बच्ची का भविष्य संवर सके।

आपको बता दें कि अब दस साल की हो चुकी पीड़िता दिल्ली के ही एक बालगृह में पढ़ाई कर रही है। बालगृह के अधिकारियों का कहना है कि बच्ची पढ़ाई में बेहतर कर रही है। प्रयास है कि उसे बेहतर माहौल मिले और वह पुरानी यादों से छुटकारा पाकर एक बेहतर शिक्षा हासिल कर अपनी नई जिन्दगी शुरू कर सके।

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