दादरी कांड दुर्घटना नहीं बल्कि पूर्व नियोजित साजिश: अल्पसंख्यक आयोग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में हुए दादरी कांड मामले की जांच कर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना को एक पूर्व नियोजित साजिश करार दिया है। आयोग का कहना है कि दादरी के बिसाहड़ा गाँव में हुई अखलाक की हत्या कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक पूर्व नियोजित साजिश थी जिसे कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ को उकसाकर अंजाम दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, आयोग मामले की जांच के लिए बिसाहड़ा गाँव में जाकर यहाँ रहने वाले लोगों से पूछताछ की और इस मामले में जानकारी इकट्ठा की। मिली जानकारी के बाद पता चला कि पीड़ित परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी और न ही ऐसी कोई वजह थी जिसकी वजह से भीड़ उस परिवार पर हमला बोले।

आयोग की पदाधिकारी ने एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान बताया कि यह घटना उस वक्त हुई जब सब लोग अपने घरों में सो रहे थे। गांव के किसी भी मुसलमान को इस बात का बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि इस तरह की वारदात होने वाली है। उन्होने कहा कि बिना किसी पूर्व योजना के अचानक किसी को मारने के लिए गांव के इतने सारे लोगों को इकट्ठा करना मुमकिन नहीं था। वहां लोगों में जुनून भरा गया। उन्हें उकसाया गया।  

इस पदाधिकारी का मानना था कि यह घटना एक परिवार के खिलाफ नहीं बल्कि एक पूरे समुदाय के खिलाफ थी। यह एक समुदाय के खिलाफ हिंसा की बढ़ता ज्वार है। खासकर मुसलमानों के खिलाफ. और इसे हवा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आज महसूस हो रहा है कि मुसलमानों पर कभी भी हमला किया जा सकता है और इसके लिए कोई जवाबदेही नहीं है।

आपको बता दे कि बीते 29 सितंबर को दादरी में स्थित बिसाहड़ा गाँव में कुछ लोगों मंदिर में लगे लाउड स्पीकर से बिसाहड़ा गाँव में अफवाह फैला दी थी कि गाँव में रहने वाले मो.अखलाक के घर में गौमांस पका है जिसके उत्तेजित होकर गाँव वालों ने इकट्ठा होकर अखलाक के घर पर हमला बोल दिया था। गाँव वालों ने घर में जमकर तोडफोड करने के साथ-साथ अखलाक के परिवार वालों को भी बुरी तरह से पिटाई कर दी थी, जिससे अखलाक की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि उसका बेटा बुरी तरह से घायल हो गया था। हालांकि बाद में प्रशासन द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ था कि फैलाई गई अफवाह झूठी है। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों का माहौल खाफी गर्म हो गया था।

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