गांधी और जिन्ना पर दिए बयान पर दलाईलामा ने मांगी माफी

dalailama statement
गांधी और जिन्ना पर दिए बयान पर दलाईलामा ने मांगी माफी

नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और जिन्ना पर गुरुवार को दिए गए बयान पर तिब्बती आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने माफी मांगी है। उनके इस विवा​दित बयान के बाद काफी बवाल मच गया था। जिसे देखते हुए शुक्रवार को उन्होने सार्वजनिक रूप से माफी मांग की। दलाई लामा ने कहा कि उन्होंने कहा कि अगर मेरा बयान गलत था, तो मैं उसके लिए माफी मांगता हूं।

Dalailama Say Sorry For His Statement Over Mahatma Gandhi And Mohammad Ali Jinnah :

बता दें कि गुरुवार को उन्होने कहा था कि महात्मा गांधी चाहते थे कि मोहम्मद अली जिन्ना देश के शीर्ष पद पर बैठें, लेकिन पहला प्रधानमंत्री बनने के लिए जवाहरलाल नेहरू ने ‘आत्म केंद्रित रवैया’ अपनाया था। साथ ही उन्होने कहा था कि अगर जिन्ना को भारत का पहला प्रधानमंत्री बनाए जाने की बात का सभी ने समर्थन कर दिया होता तो बंटवारा न होता। गोवा प्रबंध संस्थान के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 83 वर्षीय बौद्ध भिक्षु संबोधित ने यह बात कही।

कार्यक्रम के दौरान द्वारा सही निर्णय लेने संबंधी एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए दलाईलामा ने कहा था कि ‘मेरा मानना है कि सामंती व्यवस्था के बजाय प्रजातांत्रिक प्रणाली बहुत अच्छी होती है। सामंती व्यवस्था में कुछ लोगों के हाथों में निर्णय लेने की शक्ति होती है, जो बहुत खतरनाक होता है। अब भारत की तरफ देखें। मुझे लगता है कि महात्मा गांधी जिन्ना को प्रधानमंत्री का पद देने के बेहद इच्छुक थे। लेकिन पंडित नेहरू ने इसे स्वीकार नहीं किया। अध्यात्मिक गुरु ने कहा कि मैं पंडित नेहरू को बहुत अच्छी तरह जानता हूं, वह बेहद अनुभवी और बुद्धिमान व्यक्ति थे, लेकिन इसके बावजूद भी वो कभी-कभी बड़ी गलतियां कर बैठते थे।

नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और जिन्ना पर गुरुवार को दिए गए बयान पर तिब्बती आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा ने माफी मांगी है। उनके इस विवा​दित बयान के बाद काफी बवाल मच गया था। जिसे देखते हुए शुक्रवार को उन्होने सार्वजनिक रूप से माफी मांग की। दलाई लामा ने कहा कि उन्होंने कहा कि अगर मेरा बयान गलत था, तो मैं उसके लिए माफी मांगता हूं।बता दें कि गुरुवार को उन्होने कहा था कि महात्मा गांधी चाहते थे कि मोहम्मद अली जिन्ना देश के शीर्ष पद पर बैठें, लेकिन पहला प्रधानमंत्री बनने के लिए जवाहरलाल नेहरू ने ‘आत्म केंद्रित रवैया’ अपनाया था। साथ ही उन्होने कहा था कि अगर जिन्ना को भारत का पहला प्रधानमंत्री बनाए जाने की बात का सभी ने समर्थन कर दिया होता तो बंटवारा न होता। गोवा प्रबंध संस्थान के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 83 वर्षीय बौद्ध भिक्षु संबोधित ने यह बात कही।कार्यक्रम के दौरान द्वारा सही निर्णय लेने संबंधी एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए दलाईलामा ने कहा था कि 'मेरा मानना है कि सामंती व्यवस्था के बजाय प्रजातांत्रिक प्रणाली बहुत अच्छी होती है। सामंती व्यवस्था में कुछ लोगों के हाथों में निर्णय लेने की शक्ति होती है, जो बहुत खतरनाक होता है। अब भारत की तरफ देखें। मुझे लगता है कि महात्मा गांधी जिन्ना को प्रधानमंत्री का पद देने के बेहद इच्छुक थे। लेकिन पंडित नेहरू ने इसे स्वीकार नहीं किया। अध्यात्मिक गुरु ने कहा कि मैं पंडित नेहरू को बहुत अच्छी तरह जानता हूं, वह बेहद अनुभवी और बुद्धिमान व्यक्ति थे, लेकिन इसके बावजूद भी वो कभी-कभी बड़ी गलतियां कर बैठते थे।