वाराणसी : समाज के विरोध के बाद भी बेटी व बहुओं ने दी महिला की अर्थी को दिया कंधा

वाराणसी। समाज की बनाई गई कुरीति को नकारते हुए सोमवार को वाराणसी में वो हुआ जो पूरा समाज और रिस्तेदार देखते रह गए। हुआ ये कि मां की मौत के बाद उसकी बेटी ने उसे कंधा दिया। ननद को देखकर उसकी भाभियां भी उसके समर्थन आ गई और उन लोगों ने भी सास की अर्थी को कंधा दिया। इस दौरान पूरा समाज हतप्रभ था। युवती के मुताबिक उसके ऐसा मां की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए किया है।

Daughter Carry Bier Of Her Mother On Their Shoulder In Varanasi On Monday :

वाराणसी के बरियासनपुर गांव निवासी बुजुर्ग महिला संतोरा देवी (95) के पति का निधन 20 वर्ष पहले हो चुका था। पति की मौत के वक्त संतोरा ने नेत्रदान करने का संकल्प लेते हुए कहा था कि उनकी अर्थी को कंधा मेरी इकलौती बेटी ही देगी। रविवार को संतोरा देवी का निधन हो गया। दो बेटों के होते हुए बेटी पुष्पावती पटेल जब कंधा देने आई तो वहां मौजूद लोगों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया। लेकिन भाई-भाभियों के समर्थन और मां की अंतिम इच्छा को ध्यान में रखते हुए पुष्पा पीछे नहीं हटी।

बता दें कि ननद के फैसले का समर्थन करते हुए बहुओं ने भी अपनी सास की अर्थी को कंधा दिया, जिसके बाद सरायमोहाना घाट पर महिला का अंतिम संस्कार किया गया। मां को कंधा देने वाली पुष्पावती का कहना है कि मैंने सिर्फ अपनी मां की अंतिम इच्छा पूरी की है। वहीं दोनों बेटे बाबूलाल व त्रिभुवन नारायण पटेल का कहना है कि हमें अपनी बहन पर नाज है। उसने मां की अंतिम इच्छा पूरी कीं।

वाराणसी। समाज की बनाई गई कुरीति को नकारते हुए सोमवार को वाराणसी में वो हुआ जो पूरा समाज और रिस्तेदार देखते रह गए। हुआ ये कि मां की मौत के बाद उसकी बेटी ने उसे कंधा दिया। ननद को देखकर उसकी भाभियां भी उसके समर्थन आ गई और उन लोगों ने भी सास की अर्थी को कंधा दिया। इस दौरान पूरा समाज हतप्रभ था। युवती के मुताबिक उसके ऐसा मां की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए किया है। वाराणसी के बरियासनपुर गांव निवासी बुजुर्ग महिला संतोरा देवी (95) के पति का निधन 20 वर्ष पहले हो चुका था। पति की मौत के वक्त संतोरा ने नेत्रदान करने का संकल्प लेते हुए कहा था कि उनकी अर्थी को कंधा मेरी इकलौती बेटी ही देगी। रविवार को संतोरा देवी का निधन हो गया। दो बेटों के होते हुए बेटी पुष्पावती पटेल जब कंधा देने आई तो वहां मौजूद लोगों ने इसका विरोध करना शुरु कर दिया। लेकिन भाई-भाभियों के समर्थन और मां की अंतिम इच्छा को ध्यान में रखते हुए पुष्पा पीछे नहीं हटी। बता दें कि ननद के फैसले का समर्थन करते हुए बहुओं ने भी अपनी सास की अर्थी को कंधा दिया, जिसके बाद सरायमोहाना घाट पर महिला का अंतिम संस्कार किया गया। मां को कंधा देने वाली पुष्पावती का कहना है कि मैंने सिर्फ अपनी मां की अंतिम इच्छा पूरी की है। वहीं दोनों बेटे बाबूलाल व त्रिभुवन नारायण पटेल का कहना है कि हमें अपनी बहन पर नाज है। उसने मां की अंतिम इच्छा पूरी कीं।