बिहार: चमकी बुखार ने 68 बच्चों की ली जान, कहर अभी भी जारी

chamki bukhar
बिहार में 'चमकी' की चपेट में सैकड़ों मासूम, जानिए क्या होते हैं लक्षण

पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानि AES बीमारी की चपेट में आने से इस साल 54 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी को चमकी बुखार भी कहा जाता है। इस साल जनवरी से अब तक कुल 179 संदिग्ध AES के मामले सामने आ चुके हैं। आज यानि 15 जून तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो चुकी है। जिसमें 55 बच्चों की मौत श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुई है, जबकि 11 की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस बुखार से पीड़ित और मरने वाले सभी बच्चों की उम्र 5 से 10 साल के बीच की है।

Death Toll Rises To 66 Due To Acute Encephalitis Syndrome In Bihar :

जाने चमकी बुखार के लक्षण

  • शुरुआत तेज बुखार से होती है।फिर शरीर में ऐंठन महसूस होती है।
  • इसके बाद शरीर के तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आने लगती है।
  • मानसिक भटकाव महसूस होता है।
  • बच्चा बेहोश हो जाता है।
  • दौरे पड़ने लगते हैं।घबराहट महसूस होती है।
  • कुछ केस में तो पीड़ित व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है।
  • अगर समय पर इलाज न मिले तो पीड़ित की मौत हो जाती है।
  • आमतौर पर यह बीमारी जून से अक्टूबर के बीच देखने को मिलती है।
पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानि AES बीमारी की चपेट में आने से इस साल 54 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी को चमकी बुखार भी कहा जाता है। इस साल जनवरी से अब तक कुल 179 संदिग्ध AES के मामले सामने आ चुके हैं। आज यानि 15 जून तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो चुकी है। जिसमें 55 बच्चों की मौत श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुई है, जबकि 11 की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस बुखार से पीड़ित और मरने वाले सभी बच्चों की उम्र 5 से 10 साल के बीच की है। जाने चमकी बुखार के लक्षण
  • शुरुआत तेज बुखार से होती है।फिर शरीर में ऐंठन महसूस होती है।
  • इसके बाद शरीर के तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आने लगती है।
  • मानसिक भटकाव महसूस होता है।
  • बच्चा बेहोश हो जाता है।
  • दौरे पड़ने लगते हैं।घबराहट महसूस होती है।
  • कुछ केस में तो पीड़ित व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है।
  • अगर समय पर इलाज न मिले तो पीड़ित की मौत हो जाती है।
  • आमतौर पर यह बीमारी जून से अक्टूबर के बीच देखने को मिलती है।