डेबिट कार्ड या UPI के जरिए करते हैं ऑनलाइन ट्रांजेक्शन तो जान लें ये बात

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ऑनलाइन ट्रांजेक्शन

नई दिल्ली। अगर आप भी डेबिट कार्ड या UPI के जरिए करते हैं ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते हैं तो यह खबर आपके लिए काम की हो सकती है। दरअसल अगर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के फेल होने की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सख्त कदम उठाया है। आरबीआई ने बैंकों को फेल ट्रांजेक्शन पर शिकायतों को निपटारे और रकम वापसी के लिए समयसीमा तय कर दी है। इस नए नियम के तहत अगर डेबिट कार्ड से ट्रांजेक्शन फेल होता है तो बैंकों को शिकायत निपटाने और रकम वापसी के लिए पांच दिन मिलेंगे। वहीं, यूपीआई और वॉलेट आधारित ट्रांजेक्शन के मामले में कंपनियों के पास एक दिन का समय होगा।

Debit Card Upi Online Transaction :

जान लें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को लेकर आरबीआई के नए नियम के बारे में

  • ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फेल होने का मतलब है कि ग्राहक ने एटीएम से पैसा निकालने के लिए डेबिट कार्ड लगाया।
  • खाते से पैसा कट गया लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसी तरह यूपीआई और वॉलेट से भुगतान किया लेकिन वह अगले को नहीं मिला। वॉलेट में जमा रकम कट गई।
  • रिजर्व बैंक के नए सकुर्लर के मुताबिक ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फेल होने पर सभी भुगतान प्लेटफॉर्म जिम्मेदार होंगे, अगर ग्राहक की गलती की वजह से भुगतान विफल नहीं हुआ है। आरबीआई ने एटीएम, पीओएस, यूपीआई, वॉलेट और ऑनलाइन बैंकिंग को इसके दायरे में ला दिया है। अच्छी बात तो यह है कि मुआवजा उसी स्थिति में दिया जाएगा, जब फेल ट्रांजेक्शन के लिए ग्राहक जिम्मेदार नहीं होंगे।
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने ताजा दिशानिर्देश टर्न अराउंड टाइम (टीएटी) को लेकर दिया है। इसके मुताबिक, जहां वित्तीय मुआवजे की बात हो ग्राहक के खाते में जल्द से जल्द पहुंच जाना चाहिए, ग्राहक की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
  • आरबीआई के सर्कुलर के मुताबिक, ट्रांजेक्शन फेल होने के कई कारण ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें ग्राहक की गलती न हो, जैसे इंटरनेट लिंक्स में गड़बड़ी, एटीएम में कैश न होना, टाइम आउट सेशंस आदि। अगर इनमे से किसी वजह से ग्राहक का ट्रांजेक्शन फेल हुआ है तो बैंकों को मुआवजा देना होगा। अगर किसी कस्टमर को मुआवजा नहीं मिलता है तो वह रिजर्व बैंक के बैंकिंग लोकपाल को शिकायत कर सकता है।
नई दिल्ली। अगर आप भी डेबिट कार्ड या UPI के जरिए करते हैं ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते हैं तो यह खबर आपके लिए काम की हो सकती है। दरअसल अगर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के फेल होने की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सख्त कदम उठाया है। आरबीआई ने बैंकों को फेल ट्रांजेक्शन पर शिकायतों को निपटारे और रकम वापसी के लिए समयसीमा तय कर दी है। इस नए नियम के तहत अगर डेबिट कार्ड से ट्रांजेक्शन फेल होता है तो बैंकों को शिकायत निपटाने और रकम वापसी के लिए पांच दिन मिलेंगे। वहीं, यूपीआई और वॉलेट आधारित ट्रांजेक्शन के मामले में कंपनियों के पास एक दिन का समय होगा। जान लें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को लेकर आरबीआई के नए नियम के बारे में
  • ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फेल होने का मतलब है कि ग्राहक ने एटीएम से पैसा निकालने के लिए डेबिट कार्ड लगाया।
  • खाते से पैसा कट गया लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इसी तरह यूपीआई और वॉलेट से भुगतान किया लेकिन वह अगले को नहीं मिला। वॉलेट में जमा रकम कट गई।
  • रिजर्व बैंक के नए सकुर्लर के मुताबिक ऑनलाइन ट्रांजेक्शन फेल होने पर सभी भुगतान प्लेटफॉर्म जिम्मेदार होंगे, अगर ग्राहक की गलती की वजह से भुगतान विफल नहीं हुआ है। आरबीआई ने एटीएम, पीओएस, यूपीआई, वॉलेट और ऑनलाइन बैंकिंग को इसके दायरे में ला दिया है। अच्छी बात तो यह है कि मुआवजा उसी स्थिति में दिया जाएगा, जब फेल ट्रांजेक्शन के लिए ग्राहक जिम्मेदार नहीं होंगे।
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने ताजा दिशानिर्देश टर्न अराउंड टाइम (टीएटी) को लेकर दिया है। इसके मुताबिक, जहां वित्तीय मुआवजे की बात हो ग्राहक के खाते में जल्द से जल्द पहुंच जाना चाहिए, ग्राहक की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
  • आरबीआई के सर्कुलर के मुताबिक, ट्रांजेक्शन फेल होने के कई कारण ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें ग्राहक की गलती न हो, जैसे इंटरनेट लिंक्स में गड़बड़ी, एटीएम में कैश न होना, टाइम आउट सेशंस आदि। अगर इनमे से किसी वजह से ग्राहक का ट्रांजेक्शन फेल हुआ है तो बैंकों को मुआवजा देना होगा। अगर किसी कस्टमर को मुआवजा नहीं मिलता है तो वह रिजर्व बैंक के बैंकिंग लोकपाल को शिकायत कर सकता है।