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दिल्ली चुनाव: आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस पर क्यों पड़ी भारी?

Delhi Election Why Aam Aadmi Party Is Heavy On Bjp And Congress

नई दिल्ली। मंगलवार सुबह से ही दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर वोटिंग जारी हैं, रूझानो के हिसाब से ​आम आदमी पार्टी स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है। वहीं बीजेपी 20 कों आंकड़े के पार जाती हुई भी नही दिखाई दे रही है जबकि कांग्रेस का खाता खुलना भी मुश्किल नजर आ रहा है। दिल्ली की जनता ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में हर मुद्दे पर गौर करने के बाद अरविंद केजरीवाल पर भरोसा जताया है। अब सवाल यह उठता है कि दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी की यह बढ़त किस कारण से है?

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चेहरा नही तो पूरे मन से वोट नही

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आये शुरुआती रुझानों से एक बात साफ है कि दिल्ली के दिल में फिलहाल अरविंद केजरीवाल बसते हैं। दिल्ली वालों को केजरीवाल के वादे और उनके नेतृत्व पर ज़्यादा भरोसा है। भारतीय जनता पार्टी के जीतने की स्थिति में दिल्ली की कमान किसे मिलेगी? इस सवाल का जवाब बीजेपी कभी नहीं दे पाई। बीजेपी पूरे चुनाव के दौरान सिर्फ मोदी के कार्यों को गिनाती रही, बीजेपी के पास कोई चेहरा नही था जबकि आम आदमी पार्टी के पास अरविंद केजरीवाल के रूप में वर्तमान मुख्यमंत्री चेहरा था। वहीं कांग्रेस के पास न तो मुद्दे थे और न ही चेहरा। दिल्ली के नतीजों ने ये तो साफ कर दिया है कि चेहरा नहीं तो पूरे मन से वोट भी नहीं।

बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर हुआ चुनाव

जहां एक तरफ बीजेपी लगातार राष्ट्रीय मुद्दे भुनाने में लगी रही वहीं आम आदमी पार्टी ने हर समय सिर्फ बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य की बात की। दिल्ली की जनता ने ये साबित कर दिया कि जब चुनाव स्थानीय है तो राष्ट्रीय मुद्दे का क्या करना? अरविंद केजरीवाल की सरकार ने बीते एक साल में हमेशा ही स्थानीय मुद्दों पर ज़ोर दिया। चाहे बात बिजली की हो या पानी की। इन्हें बार-बार मुद्दा बनाया गया। यही नही स्कूलों की हालत को बेहतर कर आम आदमी पार्टी ने अपनी मंशा को जाहिर कर दिया था कि वह दिल्ली के हर तबके के लोगों के बारे में सोचती है। आम आदमी पार्टी ने कभी भी हिंदू और मुस्लिम का मुद्दा नही उठाया। वहीं दूसरी तरह बीजेपी पाकिस्तान, शाहीनबाग वाले हमले से बाज नही आयी।

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मु्फ्त सेवा भी खूब भाया

आम जनता हमेश यह कहती है कि अगर जनता सरकार को टैक्स देती है तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसकी दैनिक जरूरतों का ख्याल रखे। बिजली, पानी और सफर जैसे पहलुओं इनमें सबसे अहम हैं। और अरविंद केजरीवाल की सरकार दिल्ली की ज़्यादातर आबादी को बिजली और पानी मुफ्त देती है। वहीं, महिलाओं के लिए डीटीसी बसों और दिल्ली मेट्रो में सफर मुफ्त कर दिया गया। एक तरह मोदी सरकार की मंहगाई की मार जनता झेल रही थी, दूसरी तरफ केजरीवाल सरकार की मुफ्त सेवा का लाभ उठा रही थी। ऐसे में जनता को अरविंद केजरीवाल के मुद्दे ज्यादा भाये। हालांकि कि कांग्रेस ने भी कई मुफ्त वाले वादे किया लेकिन जनता को ये रास नही आये।

मोदी पर नही किया चुनावी हमला, बाकी किसी को नही छोड़ा

अरविंद केजरीवाल वैसे तो लगातार 5 सालों तक केन्द्र की मोदी सरकार के फैसलों की आलोचना करते रहे लेकिन चुनाव के दौरान उन्होने पीएम मोदी पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली। उन्होने अनुभवों से सीखा है कि नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला उनके पक्ष में नहीं जाता। क्योंकि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अब भी बरकरार है। लेकिन उनके बाद भारतीय जनता पार्टी में कोई ऐसा नेता नहीं जिस पर सियासी हमले का कोई नुकसान हो। इसलिए अरविंद केजरीवाल ने दूसरे बीजेपी नेताओं पर जमकर हमला बोला। चुनाव प्रचार के दौरान जब पाकिस्तान से प्रतिक्रिया आई तो इस पर अरविंद केजरीवाल ने साफ तौर पर कहा कि मोदी इस देश के प्रधानमंत्री हैं और पड़ोसी मुल्क को इस पर बोलने का कोई हक नहीं है।

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