दिल्ली चुनाव: क्यों टूटा भाजपा का सपना? 21 साल से सत्ता से थी गायब

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दिल्ली चुनाव: क्यों टूटा भाजपा का सपना, 21 साल से सत्ता से थी गायब

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के वोटिंग की गिनती आज जारी है, अभी तक आये रूझानो और परिणामों में आम आदमी पार्टी दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है वहीं बीजेपी किसी तरह दहाई का आंकड़ा पार करती दिखी है। बीजेपी ने हर पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे का इस्तेमाल किया और मोदी सरकार के 6 साल के कार्यों को ही मुद्दा बनाया लेकिन इसके बावजूद दिल्ली की जनता को ये रास नही आया। दिल्ली में 21 साल से बीजेपी सत्ता से गायब हे, आखिर दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में बीजेपी की हार का क्या रहा कारण हैं? ये हैं वज़हें…

Delhi Election Why Bjps Dream Was Broken Disappeared From Power For 21 Years :

स्थानीय चुनाव में नही हुई स्थानीय मुद्दो की बात

बीजेपी के दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार पर गौर करें तो लगता है कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव नहीं, लोकसभा के चुनाव लड़े जा रहे हैं। पार्टी का कहना था कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से 370 को हटाया । पड़ोसी मुल्क में अल्पसंख्यकों को मदद से लिए नागरिकता संशोधन कानून बनाया और मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक को गैर-कानूनी घोषित किया। आये दिद हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद करते रहे लेकिन जनता इतनी भी भोला नहीं है कि वह स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों में फर्क कर सके। दिल्ली में रहने वाले वोटरों के लिए पानी, बिजली, शिक्षा और चिकित्सा जैसे मुद्दे ज़्यादा अहमियत रखते हैं। इन मुद्दों का बोलबाला आम आदमी पार्टी के कैंपेन में दिखा।

भाजपा रही सिर्फ मोदी लहर के भरोषे

जहां 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्णबहुमत के साथ केन्द्र में मोदी के नेत्रत्व वाली सरकार बनायी थी और दिल्ली में लोकसभा चुनाव में सभी 7 सीटों पर बीजेपी की जीत हुई थी लेकिन जब 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को करारी सिकस्त झेलनी पड़ी। 2019 में एकबार फिर लोकसभा चुनाव हुए, मोदी सरकार दोबारा केन्द्र में सत्ता में आयी और इसबार भी लोकसभा की सारी सीटों पर बीजेपी ने जीती। बीजेपी को लगा था कि मोदी लहर विधानसभा चुनाव में भी बरकरार रहेगी। इसलिए बीजेपी ने सिर्फ मोदी के चेहरे पर चुनाव लडा। आजकल बीजेपी की सिर्फ एक ताकत है, वो हैं नरेंद्र मोदी। लेकिन हाल में हुए सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों में उनके नाम के इस्तेमाल ने मन-मुताबिक नतीज़े नहीं दिए हैं। दिल्ली के लोगो को पता था कि मोदी को वोट देने से वो यहां के मुख्यमंत्री नही बनने वाले इसलिए उन्होने अरविंद केजरीवाल के चेहरे वाली आम आदमी पार्टी पर भरोषा जताया।

नही नजर आयी सकारात्मक सोंच, विवादित बयान दिल्ली वालों को नही आये रास

भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र में कई लोकलुभावने वादे थे, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी पार्टियों पर किए गए हमले बेहद ही नकारात्मक चरित्र के थे। अरंविद केजरीवाल को दिल्ली की जनता अपना आईडल मानती है और उन्हे बीजेपी ने ‘आतंकवादी’ जैसे शब्दों से नवाजा। ये शायद किसी भी दिल्ली वासी को नही पंसद आया। इसके अलावा पार्टी ने आखिरी 10 दिनों में चुनाव प्रचार को शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन पर केंद्रित करने की कोशिश की। इस दौरान भी बीजेपी के कई स्टार प्रचारकों ने बेबुनियादी और संप्रदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए। अनुराग ठाकुर ने गोली मारो, प्रवेश वर्मा और हेगड़े जैसे लोगों ने भी विवादित बयान दिये। इस तरह का चुनाव प्रचार कहीं से भी वोटरों को किसी एक पार्टी के लिए वोट डालने के लिए प्रेरित नहीं करता।

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव के वोटिंग की गिनती आज जारी है, अभी तक आये रूझानो और परिणामों में आम आदमी पार्टी दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है वहीं बीजेपी किसी तरह दहाई का आंकड़ा पार करती दिखी है। बीजेपी ने हर पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे का इस्तेमाल किया और मोदी सरकार के 6 साल के कार्यों को ही मुद्दा बनाया लेकिन इसके बावजूद दिल्ली की जनता को ये रास नही आया। दिल्ली में 21 साल से बीजेपी सत्ता से गायब हे, आखिर दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में बीजेपी की हार का क्या रहा कारण हैं? ये हैं वज़हें... स्थानीय चुनाव में नही हुई स्थानीय मुद्दो की बात बीजेपी के दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार पर गौर करें तो लगता है कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव नहीं, लोकसभा के चुनाव लड़े जा रहे हैं। पार्टी का कहना था कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से 370 को हटाया । पड़ोसी मुल्क में अल्पसंख्यकों को मदद से लिए नागरिकता संशोधन कानून बनाया और मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक को गैर-कानूनी घोषित किया। आये दिद हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद करते रहे लेकिन जनता इतनी भी भोला नहीं है कि वह स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों में फर्क कर सके। दिल्ली में रहने वाले वोटरों के लिए पानी, बिजली, शिक्षा और चिकित्सा जैसे मुद्दे ज़्यादा अहमियत रखते हैं। इन मुद्दों का बोलबाला आम आदमी पार्टी के कैंपेन में दिखा। भाजपा रही सिर्फ मोदी लहर के भरोषे जहां 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्णबहुमत के साथ केन्द्र में मोदी के नेत्रत्व वाली सरकार बनायी थी और दिल्ली में लोकसभा चुनाव में सभी 7 सीटों पर बीजेपी की जीत हुई थी लेकिन जब 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी को करारी सिकस्त झेलनी पड़ी। 2019 में एकबार फिर लोकसभा चुनाव हुए, मोदी सरकार दोबारा केन्द्र में सत्ता में आयी और इसबार भी लोकसभा की सारी सीटों पर बीजेपी ने जीती। बीजेपी को लगा था कि मोदी लहर विधानसभा चुनाव में भी बरकरार रहेगी। इसलिए बीजेपी ने सिर्फ मोदी के चेहरे पर चुनाव लडा। आजकल बीजेपी की सिर्फ एक ताकत है, वो हैं नरेंद्र मोदी। लेकिन हाल में हुए सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों में उनके नाम के इस्तेमाल ने मन-मुताबिक नतीज़े नहीं दिए हैं। दिल्ली के लोगो को पता था कि मोदी को वोट देने से वो यहां के मुख्यमंत्री नही बनने वाले इसलिए उन्होने अरविंद केजरीवाल के चेहरे वाली आम आदमी पार्टी पर भरोषा जताया। नही नजर आयी सकारात्मक सोंच, विवादित बयान दिल्ली वालों को नही आये रास भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र में कई लोकलुभावने वादे थे, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी पार्टियों पर किए गए हमले बेहद ही नकारात्मक चरित्र के थे। अरंविद केजरीवाल को दिल्ली की जनता अपना आईडल मानती है और उन्हे बीजेपी ने 'आतंकवादी' जैसे शब्दों से नवाजा। ये शायद किसी भी दिल्ली वासी को नही पंसद आया। इसके अलावा पार्टी ने आखिरी 10 दिनों में चुनाव प्रचार को शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन पर केंद्रित करने की कोशिश की। इस दौरान भी बीजेपी के कई स्टार प्रचारकों ने बेबुनियादी और संप्रदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए। अनुराग ठाकुर ने गोली मारो, प्रवेश वर्मा और हेगड़े जैसे लोगों ने भी विवादित बयान दिये। इस तरह का चुनाव प्रचार कहीं से भी वोटरों को किसी एक पार्टी के लिए वोट डालने के लिए प्रेरित नहीं करता।