दिल्ली अग्निकांड : संकरी गलियां, न लोग निकल पाए, न पहुंच सकी एंबुलेंस, बढ़ी मौतों की संख्या

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दिल्ली अग्निकांड : संकरी गलियां, न लोग निकल पाए, न पहुंच सकी एंबुलेंस, बढ़ी मौतों की संख्या

नई दिल्ली। दिल्ली की जिस अनाज मंडी इलाके में भीषण आग लगी थी, वहां की गलियां बहुत संकरी हैं। इसके कारण फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की गाड़ियां वहां नहीं पहुंच सकीं। इसके साथ ही आस—पास पानी का भी कोई साधन नहीं था, जिस कारण दमकल की गाड़ियों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ा। इस कारण बचाव कार्य में दमकल को काफी मशक्कत उठानी पड़ी।

Delhi Fire Narrow Lanes No People Could Come Out Ambulances Could Not Reach Number Of Deaths Increased :

मौके पर पहुंचे फायर ऑफिसर ने बताया कि उन्हें जब आग लगने की जानकारी दी गई तो सिर्फ यह बताया गया था कि एक बिल्डिंग में आग लग गई है, यह नहीं बताया गया कि वहां लोग फंसे हैं। बहरहाल, बिल्डिंग मालिक के भाई को हिरासत में ले लिया गया है और आग लगने से 43 लोगों की जान चली गयी और 50 से ज्यादा लोग गंभीर हैं।

फायर के अधिकारियों ने बताया कि वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि 600 स्क्वैयर फीट के प्लॉट में आग लगी। यहां अंदर से बेहद अंधेरा है। यहां फैक्ट्री है जहां स्कूल बैग, बोतलें और कई अन्य सामान रखे गए थे। उन्होंने कहा कि रिहाइशी इलाके में अवैध तरह से फैक्ट्री संचाललित हो रही थी।

उन्होंने बताया कि वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि कमरे के अंदर से बचाव—बचाव की आवाज आ रही थी। जब कमरों के दरवाजे खोले गए तो कुछ लोग अंदर से निकल सके। मारे जाने वाले लोगों में ज्यादातर बिहार के बेगुसराय, समस्तीपुर जैसे जिलों से हैं। वहीं, कुछ मृतक उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बताए जा रहे हैं।

आग से झुलसे लोगों का चार अस्पतालों में हो रहा इलाज
इस अग्निकांड में बाहर निकाले गए करीब 50 लोगों को एलएनजेपी, सफदरजंग, हिंदूराव और आरएमएल अस्पतालों में पहुंचाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। इसमें से कई लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि इन अस्पतालों का बर्न वॉर्ड घटना के शिकार लोगों से भर चुका है। इनके इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों से भी डॉक्टरों को बुलाया गया है। एलएनजेपी, सफदरजंग समेत चार अस्पतालों में घायलों का इलाज चल रहा है।

नई दिल्ली। दिल्ली की जिस अनाज मंडी इलाके में भीषण आग लगी थी, वहां की गलियां बहुत संकरी हैं। इसके कारण फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की गाड़ियां वहां नहीं पहुंच सकीं। इसके साथ ही आस—पास पानी का भी कोई साधन नहीं था, जिस कारण दमकल की गाड़ियों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ा। इस कारण बचाव कार्य में दमकल को काफी मशक्कत उठानी पड़ी। मौके पर पहुंचे फायर ऑफिसर ने बताया कि उन्हें जब आग लगने की जानकारी दी गई तो सिर्फ यह बताया गया था कि एक बिल्डिंग में आग लग गई है, यह नहीं बताया गया कि वहां लोग फंसे हैं। बहरहाल, बिल्डिंग मालिक के भाई को हिरासत में ले लिया गया है और आग लगने से 43 लोगों की जान चली गयी और 50 से ज्यादा लोग गंभीर हैं। फायर के अधिकारियों ने बताया कि वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि 600 स्क्वैयर फीट के प्लॉट में आग लगी। यहां अंदर से बेहद अंधेरा है। यहां फैक्ट्री है जहां स्कूल बैग, बोतलें और कई अन्य सामान रखे गए थे। उन्होंने कहा कि रिहाइशी इलाके में अवैध तरह से फैक्ट्री संचाललित हो रही थी। उन्होंने बताया कि वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि कमरे के अंदर से बचाव—बचाव की आवाज आ रही थी। जब कमरों के दरवाजे खोले गए तो कुछ लोग अंदर से निकल सके। मारे जाने वाले लोगों में ज्यादातर बिहार के बेगुसराय, समस्तीपुर जैसे जिलों से हैं। वहीं, कुछ मृतक उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बताए जा रहे हैं। आग से झुलसे लोगों का चार अस्पतालों में हो रहा इलाज इस अग्निकांड में बाहर निकाले गए करीब 50 लोगों को एलएनजेपी, सफदरजंग, हिंदूराव और आरएमएल अस्पतालों में पहुंचाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। इसमें से कई लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि इन अस्पतालों का बर्न वॉर्ड घटना के शिकार लोगों से भर चुका है। इनके इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों से भी डॉक्टरों को बुलाया गया है। एलएनजेपी, सफदरजंग समेत चार अस्पतालों में घायलों का इलाज चल रहा है।