दिल्ली सरकार की इस पहल से देश की शिक्षा व्यवस्था शायद सुधर जाए

नई दिल्ली। देश की बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था के बीच दिल्ली सरकार एक ऐसे पहल की शुरुआत करने जा रही है जिसे धारा के विपरीत कहा जा सकता है। हालांकि सरकार ने जो करने को ठाना है वह उतना आसान तो नहीं लेकिन अगर यह प्रयास संभव हो जाता है तो जनता में सरकारी स्कूलों के प्रति विश्वसनीयता जरूर बढ़ जाएगी। दरअसल आज दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल महीनों बाद मीडिया से मुखातिब हुए, इस दौरान उन्होने बताया कि दिल्ली सरकार यहां के 499 निजी स्कूलों को टेकओवर करने की राय जाहिर की।

केजरीवाल ने कहा कि बहुत सारे स्कूल हैं जो अच्छी शिक्षा दिल्ली में दे रहे हैं, हमने उनको पहचाना है, ये सभी जिम्मेदार संस्थान हैं। अगर ये अच्छे लोग हैं, अच्छे संस्थान हैं, तो बेहतर तरीके से इसको समझेंगे। केजरीवाल ने कहा कि पिछली सरकारों ने भी ढिलाई की है या नहीं मुझे नहीं पता है, लेकिन हम ढिलाई नहीं करेंगे। हम देश के कुछ अच्छे सीए की मदद ले रहे हैं, सभी स्कूलों के अकाउंट चेक कराए जाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि फीस वापस हो।

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दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को दिए हलफनामे में कहा कि वह इन सभी स्कूलों की बागडोर अपने हाथ में लेने को तैयार है। इन सभी स्कूलों पर फीस बढ़ाने का आरोप है। दरअसल कुल 554 स्कूलों पर फीस बढ़ाने का आरोप था। इस मामले में हाईकोर्ट ने जस्टिस अनिल दवे कमेटी बनाई थी जिसमें बढ़ी फीस को 9 फीसदी ब्याज दर से अभिभावकों को लौटाना था लेकिन 554 में से 449 स्कूलों ने पैसा वापस नहीं किया।

इसी मुद्दे पर दोबारा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने डिफॉल्टर स्कूलों को टेकओवर करने की इच्छा जाहिर की है। सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि पैसा नहीं लौटाने वाले इन स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथों में लेने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब इसे उपराज्यपाल की मंजूरी मिलने की देरी है। इसके बाद इन स्कूलों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।

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