जेएनयू देशद्रोह मामला : कन्हैया कुमार के साथ इन लोगों को पुलिस ने माना दोषी

jnu 2016 case
जेएनयू देशद्रोह मामला : कन्हैया कुमार के साथ इन लोगों को पुलिस ने माना दोषी

नई दिल्ली। जेएनयू में देशद्रोह के कथित मामले में दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई ने पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने देशद्रोह, चोट पहुंचाना, जालसाजी, जाली दस्तावेज का उपयोग करना,गैरकानूनी तरीके से भीड़ इक्ट्ठा होना,समान लक्ष्य के लिए गैरकानूनी तरीके से इक्ट्ठा होना,दंगा करना और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया है। पुलिस की इस चार्जशीट पर कोर्ट मंगलवार को विचार करेगा।

Delhi Police File Chargesheet In Jnu Sedition Case Against Kanahiya Kumar With 10 Others :

इस चार्जशीट में माकपा नेता डी राजा की बेटी अपराजिता, जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान, शेहला रशीद, अकीब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रेयेया रसूल और बशीर भट समेत अन्य के नाम चार्जशीट में है।

उमर खालिद और दो अन्य छात्रों को 2016 में पैनल ने दोषी मानते हुए निष्कासित करने का फैसला सुनाया था। इसके साथ ही जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। इस मामले की सुनवाई जेएनयू की एक उच्च स्तरीय कमेटी कर रही थी, जिसने पैनल के फैसले को बरकरार रखा था।

नई दिल्ली। जेएनयू में देशद्रोह के कथित मामले में दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई ने पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने देशद्रोह, चोट पहुंचाना, जालसाजी, जाली दस्तावेज का उपयोग करना,गैरकानूनी तरीके से भीड़ इक्ट्ठा होना,समान लक्ष्य के लिए गैरकानूनी तरीके से इक्ट्ठा होना,दंगा करना और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया है। पुलिस की इस चार्जशीट पर कोर्ट मंगलवार को विचार करेगा। इस चार्जशीट में माकपा नेता डी राजा की बेटी अपराजिता, जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान, शेहला रशीद, अकीब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रेयेया रसूल और बशीर भट समेत अन्य के नाम चार्जशीट में है। उमर खालिद और दो अन्य छात्रों को 2016 में पैनल ने दोषी मानते हुए निष्कासित करने का फैसला सुनाया था। इसके साथ ही जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। इस मामले की सुनवाई जेएनयू की एक उच्च स्तरीय कमेटी कर रही थी, जिसने पैनल के फैसले को बरकरार रखा था।