दिल्ली हिंसा: शिवसेना ने केंद्र की मोदी सरकार पर बोला हमला, कहा-गृहमंत्री कहां थे और क्या कर रहे थे?

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दिल्ली हिंसा: शिवसेना ने केंद्र की मोदी सरकार पर बोला हमला, कहा-गृहमंत्री कहां थे और क्या कर रहे थे?

मुंबई। दिल्ली हिंसा को लेकर शिवसेना ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। शिवसेना ने हिंसा को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से सवाल पूछा है। उनका कहना है कि हिंसा के समय गृहमंत्री कहां थे और क्या कर रहे थे? वहीं, प्रधानमंत्री के तीन दिन बाद शांति की अपील करने पर उन्हें भी घेरा है।

Delhi Violence Shiv Sena Attacked The Modi Government At The Center Said Where Were The Home Ministers And What Were They Doing :

सामना के जरिए शिवसेना ने कहा है कि देश की राजधानी में 37 लोग मारे गए,​ जिसमें पुलिसकर्मी भी शामिल थे। ऐसे समय केंद्र का आधा मंत्रिमंडल उस समय अमदाबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को सिर्फ ‘नमस्ते, नमस्ते साहेब’ कहने के लिए गया था। सामना में लिखा है कि, केंद्र में कांग्रेस अथवा दूसरे गठबंधन की सरकार होती तथा विरोधी सीट पर बीजेपी का महामंडल होता तो दंगों के लिए गृहमंत्री का इस्तीफा मांगा गया होता।

गृहमंत्री के इस्तीफे के लिए दिल्ली में मोर्चा व घेराव का आयोजन किया गया होता। राष्ट्रपति भवन पर धावा बोला गया होता। गृहमंत्री को नाकाम ठहराकर ‘इस्तीफा चाहिए’ ऐसी मांग की गई होती, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि भाजपा सत्ता में है और विपक्ष कमजोर है। फिर भी सोनिया गांधी ने गृहमंत्री का इस्तीफा मांगा है। पीएम के शांति अपील को लेकर सामना में लिखा है कि केंद्रीय गृहमंत्री व उनके सहयोगी अहमदाबाद में थे।

इसी दौरान गृहविभाग के एक गुप्तचर अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या दंगों में हो गई। वहीं, तीन दिनों बाद पीएम ने शांति बनाए रखने का आह्वान किया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल चौथे दिन अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली की सड़कों पर लोगों से चर्चा करते दिखे, इससे क्या होगा? जो होना था वो नुकसान पहले ही हो चुका है।

मुंबई। दिल्ली हिंसा को लेकर शिवसेना ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। शिवसेना ने हिंसा को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से सवाल पूछा है। उनका कहना है कि हिंसा के समय गृहमंत्री कहां थे और क्या कर रहे थे? वहीं, प्रधानमंत्री के तीन दिन बाद शांति की अपील करने पर उन्हें भी घेरा है। सामना के जरिए शिवसेना ने कहा है कि देश की राजधानी में 37 लोग मारे गए,​ जिसमें पुलिसकर्मी भी शामिल थे। ऐसे समय केंद्र का आधा मंत्रिमंडल उस समय अमदाबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को सिर्फ ‘नमस्ते, नमस्ते साहेब’ कहने के लिए गया था। सामना में लिखा है कि, केंद्र में कांग्रेस अथवा दूसरे गठबंधन की सरकार होती तथा विरोधी सीट पर बीजेपी का महामंडल होता तो दंगों के लिए गृहमंत्री का इस्तीफा मांगा गया होता। गृहमंत्री के इस्तीफे के लिए दिल्ली में मोर्चा व घेराव का आयोजन किया गया होता। राष्ट्रपति भवन पर धावा बोला गया होता। गृहमंत्री को नाकाम ठहराकर ‘इस्तीफा चाहिए’ ऐसी मांग की गई होती, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि भाजपा सत्ता में है और विपक्ष कमजोर है। फिर भी सोनिया गांधी ने गृहमंत्री का इस्तीफा मांगा है। पीएम के शांति अपील को लेकर सामना में लिखा है कि केंद्रीय गृहमंत्री व उनके सहयोगी अहमदाबाद में थे। इसी दौरान गृहविभाग के एक गुप्तचर अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या दंगों में हो गई। वहीं, तीन दिनों बाद पीएम ने शांति बनाए रखने का आह्वान किया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल चौथे दिन अपने सहयोगियों के साथ दिल्ली की सड़कों पर लोगों से चर्चा करते दिखे, इससे क्या होगा? जो होना था वो नुकसान पहले ही हो चुका है।