देवरिया सेल्टर होम कांड में नया मोड़, प्रमुख सचिव रेणुका कुमार पर उठे सवाल

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देवरिया सेल्टर होम कांड में नया मोड़, प्रमुख सचिव रेणुका कुमार पर उठे सवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल का कारण बने रहे देवरिया जिले के बालिका सेल्टर होम के सेक्स स्कैंडल कांड को एक अन्य समाजिक संस्था ने नया मोड़ देने का काम किया है। सीतापुर की समग्र प्र​गति संस्थान नामक समाज सेवी संस्था का आरोप की महिला कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने कमीशन न मिलने की वजह से केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के साझा आर्थिक सहयोग से चलने वाले सेल्टर होम्स को मिलने वाली सरकारी मदद को पूर्ववर्ती सरकार के दौरान ही रोक दिया था। ​नई सरकार बनने के बाद भी रेणुका कुमार विभाग में जमी रहीं और उन्होंने अपनी तानाशाही के चलते ही साल 2017 में इन सेल्टर होम्स की मान्यता को ही रद्द कर दिया। उनकी इस तानाशाही के खिलाफ देवरिया का सेल्टर होम चलाने वाली समाजसेविका गिरिजा ति​वारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ले रखी थी।

Deoria Shelter Home Case Takes New Turn After Another Ago Blames Principle Secretary Renuka Kumar For Asking Commission :

आरोप है कि प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने गिरिजा तिवारी की याचिका से परेशान होकर पूरा षड्यंत्र रचा जिसके तहत गिरिजा तिवारी और उनके पति को जेल जाना पड़ा है। गिरिजा तिवारी के परिजनों का अरोप है कि पिछले दो सालों से जिस स्थिति में वह सेल्टर होम चला रहीं थी, यह बात उनका परिवार ही जानता है।

आपको बता दें कि इस मामले में कूदी सीतापुर की समाजसेवी संस्था ने उन पत्रों को भी सार्वजनिक किया है, जिनमें रेणुका कुमार की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति कार्यालय को करीब एक वर्ष पूर्व यानी 24 अगस्त 2017 को भेजी गई थी। इन शिकायतों में गोरखपुर मेडिकल कालेज में आॅक्सीजन की कमी के कारण हुई बच्चों की मौत मामले में कमीशनखोरी को कारण बताते हुए सेल्टर होम्स के मामलों की तुलना उससे की गई है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल का कारण बने रहे देवरिया जिले के बालिका सेल्टर होम के सेक्स स्कैंडल कांड को एक अन्य समाजिक संस्था ने नया मोड़ देने का काम किया है। सीतापुर की समग्र प्र​गति संस्थान नामक समाज सेवी संस्था का आरोप की महिला कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने कमीशन न मिलने की वजह से केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के साझा आर्थिक सहयोग से चलने वाले सेल्टर होम्स को मिलने वाली सरकारी मदद को पूर्ववर्ती सरकार के दौरान ही रोक दिया था। ​नई सरकार बनने के बाद भी रेणुका कुमार विभाग में जमी रहीं और उन्होंने अपनी तानाशाही के चलते ही साल 2017 में इन सेल्टर होम्स की मान्यता को ही रद्द कर दिया। उनकी इस तानाशाही के खिलाफ देवरिया का सेल्टर होम चलाने वाली समाजसेविका गिरिजा ति​वारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ले रखी थी।आरोप है कि प्रमुख सचिव रेणुका कुमार ने गिरिजा तिवारी की याचिका से परेशान होकर पूरा षड्यंत्र रचा जिसके तहत गिरिजा तिवारी और उनके पति को जेल जाना पड़ा है। गिरिजा तिवारी के परिजनों का अरोप है कि पिछले दो सालों से जिस स्थिति में वह सेल्टर होम चला रहीं थी, यह बात उनका परिवार ही जानता है।आपको बता दें कि इस मामले में कूदी सीतापुर की समाजसेवी संस्था ने उन पत्रों को भी सार्वजनिक किया है, जिनमें रेणुका कुमार की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति कार्यालय को करीब एक वर्ष पूर्व यानी 24 अगस्त 2017 को भेजी गई थी। इन शिकायतों में गोरखपुर मेडिकल कालेज में आॅक्सीजन की कमी के कारण हुई बच्चों की मौत मामले में कमीशनखोरी को कारण बताते हुए सेल्टर होम्स के मामलों की तुलना उससे की गई है।