राज्यसभा उपसभापति चुनाव: क्षेत्रीय दलों को लुभाने में लगा सत्ता पक्ष-विपक्ष

rajysabha election
राज्यसभा उपसभापति चुनाव: क्षेत्रीय दलों को लुभाने में लगा सत्ता पक्ष-विपक्ष

नई दिल्ली। कर्नाटक में विपक्ष की एकजुटता के सुखद परिणाम के बाद  भाजपा के खिलाफ दिखा विपक्षी एकता का साया राज्यसभा उपसभापति के चुनाव में भी पड़ना तय माना जा रहा है। यही वजह है कि इस चुनाव को लेकर केंद्र में सत्तारूढ़ राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी पार्टियाें के बीच अभी से रस्‍साकसी शुरू हो गई है। इस चुनाव को विपक्ष की एकता के लिए परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

Deputy Speaker Elections In The Rajya Sabha The Candidate Will Need 122 Votes :

हालांकि , 245 सदस्यीय सदन में जीतने वाले उम्मीदवार को 122 मतों की जरूरत होगी। बीजेपी उच्च सदन में सबसे बड़ी पार्टी है। उसे 106 सदस्यों का समर्थन हासिल है। इसमें AIADMK के भी 14 सदस्य शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन विपक्ष की तरफ से एक गैर कांग्रेसी, लेकिन कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार उतारने पर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

इस पद के लिये तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर रॉय और बीजेडी के प्रसन्न आचार्य के नाम की चर्चा है। बीजेडी के राज्यसभा में नौ सदस्य हैं। हालांकि, वह बीजेपी और कांग्रेस से समान दूरी रख रही है और वह किस तरफ जाएगी इसपर उसने अब तक फैसला नहीं किया है। इसी तरह, टीआरएस के राज्यसभा में 6 और वाईएसआरसीपी के दो सदस्य हैं। उन्होंने भी इस महत्वपूर्ण चुनाव को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

बता दें कि कांग्रेस सांसद पीजे कुरियन का कार्यकाल इस माह की 30 जून को समाप्त हो रहा है। वह 77 वर्ष के हैं। वह 2012 से इस पद बने हुए हैं। उनकी जगह नए उप सभापति की चयन प्रक्रिया संसद के आगामी सत्र के बीच में होनी है। अब तक परंपरा यही रही है कि राज्यसभा में सभापति की तरह उपसभापति के निर्वाचन में भी केंद्र में सत्ताधारी पार्टी की अहम भूमिका होती है।

नई दिल्ली। कर्नाटक में विपक्ष की एकजुटता के सुखद परिणाम के बाद  भाजपा के खिलाफ दिखा विपक्षी एकता का साया राज्यसभा उपसभापति के चुनाव में भी पड़ना तय माना जा रहा है। यही वजह है कि इस चुनाव को लेकर केंद्र में सत्तारूढ़ राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी पार्टियाें के बीच अभी से रस्‍साकसी शुरू हो गई है। इस चुनाव को विपक्ष की एकता के लिए परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।हालांकि , 245 सदस्यीय सदन में जीतने वाले उम्मीदवार को 122 मतों की जरूरत होगी। बीजेपी उच्च सदन में सबसे बड़ी पार्टी है। उसे 106 सदस्यों का समर्थन हासिल है। इसमें AIADMK के भी 14 सदस्य शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ ब्रायन विपक्ष की तरफ से एक गैर कांग्रेसी, लेकिन कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार उतारने पर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं।इस पद के लिये तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर रॉय और बीजेडी के प्रसन्न आचार्य के नाम की चर्चा है। बीजेडी के राज्यसभा में नौ सदस्य हैं। हालांकि, वह बीजेपी और कांग्रेस से समान दूरी रख रही है और वह किस तरफ जाएगी इसपर उसने अब तक फैसला नहीं किया है। इसी तरह, टीआरएस के राज्यसभा में 6 और वाईएसआरसीपी के दो सदस्य हैं। उन्होंने भी इस महत्वपूर्ण चुनाव को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।बता दें कि कांग्रेस सांसद पीजे कुरियन का कार्यकाल इस माह की 30 जून को समाप्त हो रहा है। वह 77 वर्ष के हैं। वह 2012 से इस पद बने हुए हैं। उनकी जगह नए उप सभापति की चयन प्रक्रिया संसद के आगामी सत्र के बीच में होनी है। अब तक परंपरा यही रही है कि राज्यसभा में सभापति की तरह उपसभापति के निर्वाचन में भी केंद्र में सत्ताधारी पार्टी की अहम भूमिका होती है।