कई बार SPG होते हुए भी गांधी परिवार उठा चुका है जोखिम

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कई बार SPG होते हुए भी गांधी परिवार उठा चुका है जोखिम

नई दिल्ली। हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा गांधी परिवार को दी गयी एसपीजी सुरक्षा हटा दी गयी है। जबसे सुरक्षा हटायी गयी तभी से कांग्रेस के कार्यकर्ता मोदी सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन से ही कांग्रेस ने ये मुददा उठा लिया है। लेकिन कहा जा रहा है कि सुरक्षा हटाने के पीछे गांधी परिवार की ही लापरवाही सामने आ रही है।

Despite Spg Many Times The Gandhi Family Has Taken Risks :

मंगलवार को कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने कहा था कि यूपीए सरकार जब सत्ता में थी तब कभी भी अपने विरोधियों से सुरक्षा कवर वापस नहीं लिया था। उनका कहना था कि सुरक्षा के विषय पर पक्षपातपूर्ण राजनीतिक नही करना चाहिए। बुधवार को उनके सवाल का जबाब देते हुए भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि गांधी परिवार को सबसे ज्यादा खतरा लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) से था, जो अब खत्म हो चुका है।

सूत्रों की माने तो एसपीजी होते हुए भी गांधी परिवार ने कई बार जोखिम उठाया था। ऐसा कई बार हुआ जब सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने एसपीजी के अधिकारियों की बात नही मानी। कई बार गांधी परिवार के लोग बिना एसपीजी को बताए बाहर चले गये। लेकिन एसपीजी सुरक्षा पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को भी दी गयी थी, वो हमेशा अपने साथ एसपीजी लेकर जाते थे।

राहुल गांधी ने 2005-2014 के दौरान कई बार गैर-बीआर (बुलेट प्रतिरोधी) वाहनों में सफर किया है। यही नही सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने भी सैकड़ो बार एसपीजी द्वारा तैयार वाहन का इस्तेमाल नहीं किया। इसके अलावा राहुल गांधी ने मोटर वाहन अधिनियम और सुरक्षा सलाह के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए कई बार वाहनों के छत पर बैठकर यात्रा की। इसी का नतीजा था कि 4 अगस्त 2017 को बनासकांठा (गुजरात) में उनकी गाड़ी पर पथराव हुआ तो एक एसपीजी का जवान घायल हो गया था, वो गाड़ी भी बुलेट प्रूफ नही थी। अक्सर वो विदेश यात्रा में एसपीजी साथ नही ले गये।

नई दिल्ली। हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा गांधी परिवार को दी गयी एसपीजी सुरक्षा हटा दी गयी है। जबसे सुरक्षा हटायी गयी तभी से कांग्रेस के कार्यकर्ता मोदी सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन से ही कांग्रेस ने ये मुददा उठा लिया है। लेकिन कहा जा रहा है कि सुरक्षा हटाने के पीछे गांधी परिवार की ही लापरवाही सामने आ रही है। मंगलवार को कांग्रेस के नेता आनंद शर्मा ने कहा था कि यूपीए सरकार जब सत्ता में थी तब कभी भी अपने विरोधियों से सुरक्षा कवर वापस नहीं लिया था। उनका कहना था कि सुरक्षा के विषय पर पक्षपातपूर्ण राजनीतिक नही करना चाहिए। बुधवार को उनके सवाल का जबाब देते हुए भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि गांधी परिवार को सबसे ज्यादा खतरा लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) से था, जो अब खत्म हो चुका है। सूत्रों की माने तो एसपीजी होते हुए भी गांधी परिवार ने कई बार जोखिम उठाया था। ऐसा कई बार हुआ जब सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने एसपीजी के अधिकारियों की बात नही मानी। कई बार गांधी परिवार के लोग बिना एसपीजी को बताए बाहर चले गये। लेकिन एसपीजी सुरक्षा पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को भी दी गयी थी, वो हमेशा अपने साथ एसपीजी लेकर जाते थे। राहुल गांधी ने 2005-2014 के दौरान कई बार गैर-बीआर (बुलेट प्रतिरोधी) वाहनों में सफर किया है। यही नही सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने भी सैकड़ो बार एसपीजी द्वारा तैयार वाहन का इस्तेमाल नहीं किया। इसके अलावा राहुल गांधी ने मोटर वाहन अधिनियम और सुरक्षा सलाह के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए कई बार वाहनों के छत पर बैठकर यात्रा की। इसी का नतीजा था कि 4 अगस्त 2017 को बनासकांठा (गुजरात) में उनकी गाड़ी पर पथराव हुआ तो एक एसपीजी का जवान घायल हो गया था, वो गाड़ी भी बुलेट प्रूफ नही थी। अक्सर वो विदेश यात्रा में एसपीजी साथ नही ले गये।