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इस दिन है देवउठनी एकादशी, जानें इसके महत्व और पूजन विधि के बारे में….

Dev Uthani Ekadashi 2019 Know The Significance And Puja Vidhi

By आस्था सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है और दिन दिन भगवान विष्णु की पूजा का खास महत्त्व होता है। देवउठनी एकादशी को हरिप्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी काहा जाता हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए सो जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस बार देवउठनी एकादशी 8 नवंबर को पड़ रही हैआइये जानते हैं इसकी पूजा विधि, महत्त्व और नियम के बारे में….

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देवउठनी एकादशी की पूजा विधि—-

  • गन्ने का मंडप बनाएं, बीच में चौक बनाया जाता है।
  • चौक के मध्य में चाहें तो भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति रख सकते हैं।
  • चौक के साथ ही भगवान के चरण चिन्ह बनाये जाते हैं ,जिसको कि ढंक दिया जाता है।
  • भगवान को गन्ना,सिंघाडा तथा फल-मिठाई समर्पित किया जाता है।
  • घी का एक दीपक जलाया जाता है जो कि रात भर जलता रहता है।
  • भोर में भगवान के चरणों की विधिवत पूजा की जाती है और चरणों को स्पर्श करके उनको जगाया जाता है।
  • शंख-घंटा-और कीर्तन की ध्वनि की जाती है।
  • इसके बाद व्रत-उपवास की कथा सुनी जाती है।
  • इसके बाद से सारे मंगल कार्य विधिवत शुरु किये जा सकते हैं।
  • भगवान के चरणों का स्पर्श करके जो मनोकामना कही जाती है वह पूरी होती है।

व्रत रखने का नियम

  • निर्जल या केवल जलीय पदार्थों पर उपवास रखना चाहिए।
  • अगर रोगी,वृद्ध,बालक,या व्यस्त व्यक्ति हैं तो केवल एक बेला का उपवास रखना चाहिए।
  • भगवान विष्णु या अपने इष्ट-देव की उपासना करें।
  • तामसिक आहार (प्याज़,लहसुन,मांस,मदिरा,बासी भोजन ) बिलकुल न खायें।
  • आज के दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ” मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • अगर आपका चन्द्रमा कमजोर है या मानसिक समस्या है तो जल और फल खाकर या निर्जल एकादशी का उपवास जरूर रखें।

देवउठनी एकादशी का महत्व

इन चार महीनो में देव शयन के कारण समस्त मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। कहा जाता है कि जब देव (भगवान विष्णु) जागते हैं तभी कोई मांगलिक कार्य संपन्न हो पाता है और देव जागरण या उत्थान होने के कारण इसको देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता हैं। इस दिन व्रत रख सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करने का खास महत्त्व है। मान्यता हैं कि ऐसा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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