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Dev Uthani Ekadashi: कल है देवउठनी एकादशी, भूल से भी न करें ये काम

By आस्था सिंह 
Updated Date

लखनऊ। कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी के चार महीने बाद अपनी निंद्रा तोड़कर जागते हैं। इस बार देवउठनी एकादशी 8 नवंबर यानि कल के दिन मनाई जाएगी। यही नहीं इसी दिन शालीग्राम के साथ तुलसी विवाह भी कराया जाता है। मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में प्रेम और अटूटता आती है। आज हम आपको बताएंगे तुलसी विवाह के दौरान किन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए नहीं तो नाराज़ हो सकते हैं भगवान विष्णु।

इन चीजों का रखें ध्यान

  • विवाह के समय तुलसी के पौधे को आंगन, छत या पूजास्थल के बीचोंबीच रखें।
  • तुलसी का मंडप सजाने के लिए गन्ने का प्रयोग करें।
  • विवाह के रिवाज शुरू करने से पहले तुलसी के पौधे पर चुनरी जरूर चढ़ाएं।
  • गमले में शालिग्राम रखकर चावल की जगह तिल चढ़ाएं।
  • तुलसी और शालिग्राम पर दूध में भीगी हल्दी लगाएं।
  • अगर विवाह के समय बोला जाने वाला मंगलाष्टक आपको आता है तो वह अवश्य बोलें।
  • विवाह के दौरान 11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करें।
  • प्रसाद को मुख्य आहार के साथ ग्रहण करें और उसका वितरण करें।
  • पूजा खत्म होने पर घर के सभी सदस्य चारों तरफ से पटिए को उठा कर भगवान विष्णु से जागने का आह्वान करें- उठो देव सांवरा, भाजी, बोर आंवला, गन्ना की झोपड़ी में, शंकर जी की यात्रा।
  • एकादशी के दिन संयम के साथ पति-पत्नी को ब्रह्राचार्य का पालन करना चाहिए इसलिए इस दिन शारीरिक संबंध नहीं बनना चाहिए।

सभी तिथियों में एकादशी कि तिथि बहुत शुभ मानी गई है। एकादशी का लाभ पाने के लिए इस दिन किसी को कठोर शब्द नहीं कहना चाहिए। लड़ाई-झगड़ा से बचना चाहिए।

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