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रैतिक परेड के बाद किंग्सवे डॉज कार से विदा हुए डीजीपी ओपी सिंह

By बलराम सिंह 
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Dgp Op Singh Departs From Kingsway Dodge Car After Ceremonial Parade

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्य सूचना आयुक्त के पद की दौड़ में शामिल होने वाले प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश (ओपी) सिंह शुक्रवार को यानी आज सेवानिवृत हो गए हैं। लखनऊ पुलिस लाइन में सुबह डीजीपी ओपी सिंह की विदाई में रैतिक परेड का आयोजन किया गया। दशकों पुरानी परंपरा के अनुरूप किंग्सवे डॉज कार को खींचकर डीजीपी ओपी सिंह को विदाई दी गई। 1956 में खरीदी गई यह कार डीजीपी के विदाई समारोह की पहचान रही है। डीजी स्तर के कई अधिकारियों के नाम रेस में रहे। डीजीपी ओपी सिंह की विदाई में एक फरवरी को पुलिस आफिसर्स मेस में रात्रिभोज का आयोजन होगा।

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ओपी सिंह के रिटायरमेंट के बाद नए डीजीपी की रेस में 1986 बैच के आइपीएस अधिकारी डीजी सुजान वीर सिंह, 1987 बैच के आइपीएस अधिकारी डीजी ईओडब्ल्यू डॉ.आरपी सिंह, इसी बैच के डीजी उप्र राज्य मानवाधिकार आयोग जीएल मीणा, डीजी फायर सर्विस विश्वजीत महापात्रा, 1988 बैच के डीजी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड आरके विश्वकर्मा, डीजी जेल आनन्द कुमार व केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस आ रहे डीजी डीएस चौहान के नाम चल रहे हैं।

आईपीएस ने उठाए सवाल
आइजी सिविल डिफेंस अमिताभ ठाकुर ने डीजी स्तर के तीन अधिकारियों का सेवाकाल पूरा होने पर अलग-अलग ढंग से विदाई समारोह के आयोजन को लेकर सवाल उठाए हैं। अमिताभ ठाकुर ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर कमेंट भी किया है। उन्होंने कहा कि 31 जनवरी को तीन डीजी रिटायर हो रहे हैं। इनमें एक डीजी महेंद्र मोदी की विदाई 31 जनवरी की रात पुलिस आफिसर्स मेस में तथा दूसरे डीजीपी ओपी सिंह की अलग से एक फरवरी को पुलिस आफिसर्स मेस में होगी। तीसरे डीजी भवेश कुमार सिंह की विदाई भी 31 जनवरी की रात थी, लेकिन अब उनकी विदाई की कोई सूचना नहीं है। अमिताभ ठाकुर ने इसे लेकर सवाल उठाया है कि हम समान रैंक के अधिकारियों को बराबर सम्मान भी नहीं दे सकते।

हितेश चन्द्र अवस्थी बने कार्यवाहक डीजीपी

शासन ने डीजी विजिलेंस हितेश चंद्र अवस्थी को कार्यवाहक डीजीपी बनाने का निर्णय लिया है। डीजीपी बनने की रेस में वरिष्ठता सूची के क्रम में 1985 बैच के आइपीएस अधिकारी डीजी विजिलेंस हितेश चंद्र अवस्थी सबसे आगे थे। वरिष्ठता के आधार पर डीजीपी के चयन होने की स्थिति में हितेश चंद्र अवस्थी ही दावेदार थे।

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