कोर्ट से गैर जमानती वारंट के बावजूद करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोपी को बचाने में जुटी नोएडा पुलिस

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कोर्ट से गैर जमानती वारंट के बावजूद करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोपी को बचाने में जुटी नोएडा पुलिस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लग रहे हैं। बीते एक साल पुराने मामले में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के संगीन आरोपी को बचाने में नोएडा पुलिस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। न्यायालय ने इस संदर्भ में आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है, लेकिन पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं और पीड़ित मदद के गुहार लगाते हुए अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट रहा है।

Dhokhadhai Ka Aropi Rajesh Malik :

दरअसल, सेक्टर 44 में रहने वाले संजय रस्तोगी ने साल 2012 में एक प्रॉपर्टी खरीदने के लिये फिल्म सिटी में राजेश मलिक से संपर्क किया था। संजय के मुताबिक, राजेश मलिक बसंत विहार दिल्ली में रहता है और खुद को एक नामी फाइनेंसर बताता है। संजय को राजेश ने रणदीप वरैच के साथ सेक्टर 96, 97, 98 में प्लाट दिखाये। उन्होंने चेक के जरिये 5 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन प्लाट की रजिस्ट्री उनके नाम नहीं की गई।

जब संजय को धोखाधड़ी का एहसास हुआ तो उन्होने इस संबंध में नोएडा की कोतवाली सेक्टर-20 में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने 9 अक्टूबर को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके बाद संजय रस्तोगी को जान से मारने की धमकियां मिलने लगी। जब इस मामले की शिकायत संजय ने कोतवाली में की तो उन्हे महज पुलिस मदद का आश्वासन मिलता रहा।

इस मामले में न्यायालय ने 25 जून 2019 को राजेश मालिक के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 आईपीएस के तहत थाना सेक्टर-20 में गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। बावजूद इसके पुलिस का उदासीन रवैया जारी रहा और जालसाज राजेश मालिक पर पुलिस की मेहरबानी जारी रही। पीड़ित संजय रस्तोगी ने कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए एसएसपी गौतमबुद्ध नागर वैभव कृष्ण को एक पत्र भी लिखा है लेकिन अभी तक जांच की बात कहकर पुलिस अपना पल्ला झाड रही है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की नोएडा पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लग रहे हैं। बीते एक साल पुराने मामले में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के संगीन आरोपी को बचाने में नोएडा पुलिस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। न्यायालय ने इस संदर्भ में आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है, लेकिन पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं और पीड़ित मदद के गुहार लगाते हुए अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट रहा है। दरअसल, सेक्टर 44 में रहने वाले संजय रस्तोगी ने साल 2012 में एक प्रॉपर्टी खरीदने के लिये फिल्म सिटी में राजेश मलिक से संपर्क किया था। संजय के मुताबिक, राजेश मलिक बसंत विहार दिल्ली में रहता है और खुद को एक नामी फाइनेंसर बताता है। संजय को राजेश ने रणदीप वरैच के साथ सेक्टर 96, 97, 98 में प्लाट दिखाये। उन्होंने चेक के जरिये 5 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन प्लाट की रजिस्ट्री उनके नाम नहीं की गई। जब संजय को धोखाधड़ी का एहसास हुआ तो उन्होने इस संबंध में नोएडा की कोतवाली सेक्टर-20 में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने 9 अक्टूबर को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसके बाद संजय रस्तोगी को जान से मारने की धमकियां मिलने लगी। जब इस मामले की शिकायत संजय ने कोतवाली में की तो उन्हे महज पुलिस मदद का आश्वासन मिलता रहा। इस मामले में न्यायालय ने 25 जून 2019 को राजेश मालिक के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 आईपीएस के तहत थाना सेक्टर-20 में गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। बावजूद इसके पुलिस का उदासीन रवैया जारी रहा और जालसाज राजेश मालिक पर पुलिस की मेहरबानी जारी रही। पीड़ित संजय रस्तोगी ने कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए एसएसपी गौतमबुद्ध नागर वैभव कृष्ण को एक पत्र भी लिखा है लेकिन अभी तक जांच की बात कहकर पुलिस अपना पल्ला झाड रही है।