एक घंटे तक नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस, ई रिक्शे पर जन्म लेते ही चोटिल हुआ नवजात

108-Ambulance
एक घंटे तक नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस, ई रिक्शे पर जन्म लेते ही चोटिल हुआ नवजात

लखनऊ। सरकारें अरबों रूपए खर्च कर जनकल्याण की सेवाएं चलातीं हैं, जिनके प्रचार पर भी करोड़ों रूपए खर्च किए जाते हैं ताकि अधिक से अधिक लोग उन सेवाओं का लाभ ले सकें। लेकिन सरकारी व्यवस्था है जो तमाम प्रयासों पर पानी फेर ही देती है। जिस वजह से आम लोगों का सरकारी सेवाओं पर विश्वास जम नहीं पाता। ताजा मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का है, जहां एक प्रसूता को प्रसव पीड़ा में अस्पताल तक पहुंचाने के लिए डायल 108  पर एंबुलेंस सेवा मांगी गई। एक घंटे के इंतजार के बाद प्रसूता के परिजन उसे ई रिक्शा पर अस्पताल पहुंचाने के लिए निकले लेकिन रास्ते में ही महिला का प्रसव हो गया।

मिली जानकारी के मुताबिक यह वाकया गुरुवार का है जब लखनऊ के चिनहट इलाके में रहने वाली सादिया खातून को प्रसव के लिए पास के लोहिया अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों ने डॉयल 108 एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया। एक घंटे के इंतजार के बाद सादिया की प्रसव पीड़ा को देखते हुए परिजनों ने ई रिक्शा से ही उसे अस्पताल ले जाने का फैसला किया। ई रिक्शा पर अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्रसूता ने बच्चे को जन्म दे दिया। प्रसव के दौरान नवजात के रिक्शे पर गिरने से उसे चोटें भी आई हैं।

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जिसके बाद परिजन मां और बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे। जहां एकबार फिर उन्हें सरकारी लापरवाई का साक्षी बनना पड़ा। रिक्शे से अस्पताल पहुंची सादिया और उसके बच्चे को अस्पताल में भर्ती करने के लिए ​स्टॉफ की ओर से किसी ने सहायता करना तक मुनासिफ नहीं समझा। परिजनों ने ही मां और बच्चे को स्ट्रेचर पर लिटाकर अंदर ले जाने का प्रयास किया, इस दौरान नवजात बच्चा स्ट्रेचर से गिरते—गिरते बचा और जन्म के चंद मिनटों के भीतर ही वह दोबारा चोटिल हो गया।

परिजनों की माने तो अस्पताल कर्मियों का रवैया बेहद नकारात्मक था। अस्पताल के स्टॉफ को कहा गया था कि डिलीवरी रास्ते में ही हो गई थी, इसके बावजूद कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया।

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हालांकि इस पूरे मामले पर लोहिया अस्पताल की सीएमएस का कहना है कि वह इस मामले को गंभीरता से देखेंगी। जिन कर्मचारियों ने ड्यूटी पर रहते हुए लापरवाई की है उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जच्चा और बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

वहीं दूसरी ओर गर्भवती ​महिलाओं के लिए विशेष रूप से चलाई जाने वाली 108 सेवा को लेकर उत्तर प्रदेश के डीजी हेल्थ डॉक्टर पद्माकर सिंह ने कहा है कि यह सेवा निजी सेवाप्रदात्ता द्वारा चलाई जाती है। इस विषय में उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है, जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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लखनऊ। सरकारें अरबों रूपए खर्च कर जनकल्याण की सेवाएं चलातीं हैं, जिनके प्रचार पर भी करोड़ों रूपए खर्च किए जाते हैं ताकि अधिक से अधिक लोग उन सेवाओं का लाभ ले सकें। लेकिन सरकारी व्यवस्था है जो तमाम प्रयासों पर पानी फेर ही देती है। जिस वजह से आम लोगों का सरकारी सेवाओं पर विश्वास जम नहीं पाता। ताजा मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का है, जहां एक प्रसूता को प्रसव पीड़ा में अस्पताल तक पहुंचाने के लिए डायल…
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