नागरिकता संशोधन बिल पर महाविकास अघाड़ी में मतभेद, कांग्रेस CM उद्धव से करेगी मुलाकात

महाविकास अघाड़ी
नागरिकता संशोधन बिल पर महाविकास अघाड़ी में मतभेद, कांग्रेस CM उद्धव से करेगी मुलाकात

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन बिल को केन्द्र की मोदी सरकार 9 दिसंबर को लोकसभा में चर्चा के लिए पेश करेगी। शिवसेना द्वारा विधेयक का समर्थन किए जाने के संकेत मिलने के बाद महाराष्ट्र के नए बने महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना गठबंधन) में मतभेद उभरने लगे हैं।कांग्रेस ने कहा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम में यह तय किया गया था कि राष्ट्रीय मुद्दों पर आम सहमति के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।

Differences In Mahavikas Aghadi On Citizenship Amendment Bill Congress To Meet Cm Uddhav :

बताया जा रहा है इस मामले को लेकर कांग्रेस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात करेगी। बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है।

वर्तमान में किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य है। इस संशोधन के जरिए सरकार नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर छह साल करना चाहती है। अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे। जबकि मुस्लिमों के लिए ऐसा नहीं है।

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन बिल को केन्द्र की मोदी सरकार 9 दिसंबर को लोकसभा में चर्चा के लिए पेश करेगी। शिवसेना द्वारा विधेयक का समर्थन किए जाने के संकेत मिलने के बाद महाराष्ट्र के नए बने महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना गठबंधन) में मतभेद उभरने लगे हैं।कांग्रेस ने कहा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम में यह तय किया गया था कि राष्ट्रीय मुद्दों पर आम सहमति के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा। बताया जा रहा है इस मामले को लेकर कांग्रेस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात करेगी। बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है। वर्तमान में किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य है। इस संशोधन के जरिए सरकार नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर छह साल करना चाहती है। अगर यह विधेयक पास हो जाता है, तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे। जबकि मुस्लिमों के लिए ऐसा नहीं है।