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स्कूटी से पश्चिम बंगाल जा रही मां-बेटी की आपबीती, बोली- लोग रास्ते में दे रहे थे गाली, काशी में ही मिला प्यार

Dispute Of Mother Daughter Going From Scooty To West Bengal Quote People Were Abusing On The Way Love Was Found In Kashi

By टीम पर्दाफाश 
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वाराणसी: देश में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन जारी है। रोजी-रोटी के लिए घर से बाहर रह रहे लोग काम-धंधे बंद होने से अपने घरों को जाने को बेताब हैं ।कई लोगो तो सैकड़ों किमी की दूरी पैदल ही तय कर रहे हैं। ऐसे ही गुरुग्राम से अपने घर पश्चिम बंगाल जा रही एक मां-बेटी स्कूटी से वाराणसी पहुंची। वहां लोगों ने उनके बारे में पूंछने के बाद उन्हें खाने के लिए भोजन दिया। बनारसियों का स्नेह देखकर मां-बेटी की आंखें भर आईं। दोनों ने लोगों से अपने तीन दिन के सफर में आई तमाम मुश्किलों के बारे में बताया। लोगों से रास्ते में आई परेशानियां बताते हुए उनकी आंखें भर आईं। दोनों ने बनारस के लोगों के सेवा भाव की खूब तारीफ़ की।

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वाराणसी के रोहनिया में गुरुवार को अखरी बाईपास के समीप 16 वर्षीय श्रीलेखा अपनी मां संग स्‍कूटी से पहुंची। दोनों ने तीन दिन पहले गुड़गांव से अपनी यात्रा शुरु की थी। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल की निवासी है। उन्हें ये सफर पश्चिम बंगाल तक तय करना है। श्रीलेखा ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से मेरा पूरा परिवार गुड़गांव में फंसा हुआ था। श्रीलेखा गुड़गांव में बच्चों के केयर टेकर का कार्य करती है और उनकी मां काजल लोगों के घर में झाड़ू पोछा लगाने का काम कर परिवार का पालन पोषण करती हैं ।

रास्ते में लोग करते थे गाली गलौज
श्रीलेखा 25 तारीख की शाम में स्कूटी पर अपनी मां काजल को बैठाकर घर के कुछ सामान के साथ रवाना हुई थी। 3 दिन की सफर तय कर वह दोनों बनारस पहुचीं। वहां लोगों से उन्होंने रास्ते की आपबीती बताते हुए कहा कि हम लोगों को इन 3 दिनों के सफर में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। खाने की समस्या और रात में सोने की दिक्‍कत सबसे कष्‍टदायक रही। हम लोग जहां पर भी सोने की जगह खोजते तो वह के स्थानीय लोग गाली गलौज कर पुलिस को बुलाने की धमकी देते थे।

तीन दिन के सफर में बनारस में ही मिला प्यार
श्रीलेखा ने बताया कि जीवन के इस कठिन सफर के दौरान पहली बार कुछ समय के लिए बनारस में रुकी और यहां के लोगों का प्रेम भाव देखकर मुझे अपने परिवार के लोगों की याद सताने लगी।बनारस के लोगों द्वारा श्रीलेखा और उनकी मां काजल को भर पेट भोजन कराया गया और रास्ते के लिए भी पर्याप्त भोजन ले जाने के लिए दिए। बनारस वासियों के इस प्रेम भाव को देखकर मां-बेटी के आंखों में आंसू छलक उठे। कहा कि मैं इस दिन को कभी नहीं भूलंगी जब बाबा की नगरी में हमें इतना प्रेम और सहयोग मिला। कहना था कि जब यहां तक पहुंच गए तो घर भी पहुंच जाएंगे क्‍योंकि अब हमें बाबा का आशीर्वाद प्राप्‍त हो गया है।

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