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बाबा साहब आधुनिक भारत के थे जनक, अपना पूरा जीवन समाज के सुधारने में लगा दिया : मुलायम सिंह यादव

भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर एक ऐसा समाज बनाना चाहते थे जो समानता ,स्वतंत्रता और बंधुता के विचारों पर आधारित आधुनिक और आत्मनिर्भर उत्कृष्ट राष्ट्र बने। इसीलिए उन्होंने हर भारतीय के शिक्षित होने का आह्वान किया था। उक्त विचार मुलायम सिंह यादव एडवोकेट पूर्व महामंत्री जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात ने डॉ. बी आर अंबेडकर की 131 वीं जयंती के अवसर पर जनपद न्यायालय परिसर कानपुर देहात में कही।

By संतोष सिंह 
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कानपुर देहात। भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर एक ऐसा समाज बनाना चाहते थे जो समानता ,स्वतंत्रता और बंधुता के विचारों पर आधारित आधुनिक और आत्मनिर्भर उत्कृष्ट राष्ट्र बने। इसीलिए उन्होंने हर भारतीय के शिक्षित होने का आह्वान किया था। उक्त विचार मुलायम सिंह यादव एडवोकेट पूर्व महामंत्री जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात ने डॉ. बी आर अंबेडकर की 131 वीं जयंती के अवसर पर जनपद न्यायालय परिसर कानपुर देहात में कही।

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उन्होंने कहा कि बाबा साहेब 32 डिग्री व 9 भाषाओं के जानकार थे। उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री और भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार थे। डॉ. बीआर अंबेडकर ने अपने जीवन की शुरुआत वकालत से की थी। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अपने जीवन में बहुत यातनाएं झेला, लेकिन कभी किसी कमजोर का साथ नहीं छोड़ा। यही वजह है कि वह आज भी लोगों के बीच जिंदा है। हम लोग भी निर्मल और कमजोर लोगों का साथ देते रहे। उनके विचारों को मान कर ही सपना पूरा किया जा सकता है।

अध्यक्षता चौ.संपत लाल यादव अध्यक्ष एकीकृत बार एसोसिएशन कानपुर देहात ने की। उन्होंने समापन सभा में कहा कि बाबा साहब आधुनिक भारत के जनक थे। अपना पूरा जीवन समाज के सुधारने के लिए लगा दिया हम लोग उनके विचारों को आगे बढ़ाते रहें। सर्वप्रथम उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए संचालन अभय सिंह ने किया। जिसमें प्रमुख रूप से ओमकार सिंह भदौरिया , रामसनेही कुशवाहा ,अशोक कुमार संखवार, राधेश्याम कटियार, हरिशंकर चतुर्वेदी, सिद्धार्थ शंकर सिंह , सुधीश कुमार पाल, रमेश चंद्र सिंह गौर, शैलेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह यादव, सुरेंद्र कुमार दिवाकर, जितेंद्र बाबू, राजकुमार पाल, अनूप सिंह यादव ,वंदना गुप्ता, सुलेखा यादव, महिपाल सिंह कुशवाहा, मनोज यादव ,प्रसून सचान, शिव शंकर लाल शुक्ला ,रवि वर्मा, दीपक यादव ,सर्वेंद्र सिंह ,विश्वनाथ कटियार, जय सिंह, सुभाष चंद्र, विश्वनाथ सिंह, हरि प्रकाश, चंद्रपाल चंद्रवंशी आदि अधिवक्ता प्रमुख रूप से शामिल रहे।

 

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