दिवाली वही, अंदाज नया

लखनऊ। दिवाली सुख समृद्धि के साथ साथ खुशियों का त्यौहार है। इस त्यौहार में दीप जला कर कई तरह के संकल्प लिए जाते हैं। तरह तरह के व्यंजनों से मेहमानों का स्वागत करते हैं। लेकिन बीते कई वर्षों में परंपराओं को तोड़ने तथा आधुनिकता ने कई परिवारों व समाज को तोड़ दिया है। गोले व पटाखों की गूंज ने किसी को बहरा कर दिया तो किसी को बीमारी दे दी।




इलेक्ट्रॉनिक लाइटों की जगह हमे ज्यादा से ज्यादा मिट्टी के दीयों को जलाना चाहिए। इस बार कोशिश करिए जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके उतने दिए जलाइए और हो सके तो 3-4 दिन मिट्टी के दिए जलाएं। ऐसा करने से मिट्टी के दिए बनाने वाले कुम्हारों को भी सहारा मिल जाएगा और परम्पराओं का भी पालन हो जायेगा।

इस दिवाली कागज के या फिर कपड़ें के फूलों से घर को सजाने से अच्छा है कि ओरिजनल फूलों से घर को सजाया जाए। ओरिजनल फूल से घर भी महकता है साथ साथ पर्यावरण को भी बचाव मिलता है। वहीं, दिवाली अगर किसी को गिफ्ट करना चाहते हैं तो हर्बल प्रॉडक्ट जैसे हाथों से बनी कैंडल, आर्गेनिक गिफ्ट बास्केट या फिर स्पेशल पौधे गिफ्ट कर सकते हैं।




इस दिवाली सभी लोग अपना पुराना सामान बाहर निकालते हैं। इसलिए इस पुराने सामान जैसे कपड़े, जूते को उन लोगों को दें दें जिनको इनकी बेहद जरूरी है। दीपावली खुशियों का त्योहार है, ऐसे में सभी लोगों को पर्यावरण सुरक्षित रखते हुए किसी को कोई हानि न हो, इस तरह से त्योहार मनाया जाना चाहिये।

आस्था सिंह की रिपोर्ट