‘पहले शौचालय फिर राशन’, इस फार्मूले से डीएम साहब हाथरस को बनाएंगे शौच मुक्त

'पहले शौचालय फिर राशन', इस फार्मूले से डीएम साहब हाथरस को बनाएंगे शौच मुक्त

लखनऊ। जिसके पास खाना पकाने के लिए रसोई और खाने के लिए रोटी न हो उसे शौचालय न बनवाने की स​जा मिलना कितना जायज है। लेकिन हा​थरस के डीएम साहब के नजरिए से यह सजा कानूनी है। साहब का मानना है कि उसी गरीब के घर का चूल्हा जलेगा जिसके दरवाजे पर पक्का शौचालय खड़ा होगा। इसीलिए उन्होंने अपने जिले के 129 गरीब मजबूर लोगों के पीडीएस (Public Distribution System) के तहत मिलने वाली राशन पर रोक लगा दी है।

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के डीएम अमित कुमार सिंह इन दिनों जिले को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंके हुए हैं। प्रदेश सरकार के सामने अपने नंबर बढ़ाने के लिए डीएम साहब ने एक ओर तो जिले के कई दर्जन गांवों को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया है तो अन्य गांवों व नगर पंचायतों को खुले में शौचमुक्त करवाने के लिए तमाम तरह के प्रयास कर रहे है।

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इन्हीं कोशिशों के तहत डीएम साहब ने जिले की नगर पंचायत सादाबाद की अधिशाषी अधिकारी को एक आदेश जारी किया है। जिसमें 129 गरीब परिवारों को शौचालय नहीं बनवाने तक सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से मिलने वाले राशन पर रोक लगा दी गई है।

पर्दाफाश को मिली जानकारी के मुताबिक हाथरस जिले की नगर पंचायत सादाबाद की अधिशाषी अधिकारी ने 129 परिवारों के राशन को रोकने के लिए सादाबाद नगर के सभी राशन डीलरों को निर्देश दे दिए हैं। जिन लोगों के यहां शौचालय नहीं है उन्हें कोटे का राशन नही दिया जाए।

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इस आदेश से इन गरीब परिवारों के सामने पेट भरने की समस्या खड़ी होती नजर आ रही है।उनकी समझ मे यह नही आ रहा कि वे मजदूरी मेहनत की कमाई से अपना और अपने बच्चों का पेट भरें या फिर कर्ज लेकर शौचालय बनवाएं।

इस मामले में पीड़िता गरीब विधवा महिला लज्जावती से बात की गई तो उसने बताया की घर के नाम पर केवल एक कमरा है खाना बनाने के लिए रसोई घर नहीं है, घर में पीने के पानी के लिए तो नल है नहीं पक्के शौचालय के लिए पानी कहां से लाएगी।

वहीं कुछ अन्य लोगों से भी बात हुई तो उन्होंने बताया कि शौचालय के चक्कर में लोग कर्ज की चपेट में आ रहे हैं। कुछ लोग खुद ही अपने शौचालय बना रहे है तो कुछ को सरकारी मदद भी मिल गई है लेकिन सरकार इतना पैसा नहीं दे रही कि शौचालय बनाने के लिए मजदूर रखे जाए इसीलिए खुद मेहनत कर रहे है।

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वही जब सादाबाद नगर पंचायत की अधिशाषी अधिकारी दीपिका शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने बताया की ये आदेश जिलाधिकारी महोदय के आदेशानुसार दिया गया है। साथ ही वह यह कहने से भी नहीं चूकिं कि अकेले सादाबाद नगर पंचायत में ही विना शौचालय वालो का राशन नही रोका गया है वल्कि डीएम साहब के आदेश पर जिले की अन्य नगर पंचायतों के व्यक्तियों के राशन पर भी रोक लगा दी गई है।

अब सवाल ये उठता है कि जहां सरकार का प्रयास है कि कोई गरीब भूखा ना रहे। उसी सरकार के नुमाइंदे अपने कार्यक्षमता को दिखाने के लिए गरीबों के पेट पर लात मारने का काम कैसे कर सकते हैं। अगर जिला प्रसाशन जिले को खुले में शौच से मुक्त घोषित कराना चाहता है तो उसके लिए सबसे पहले बिना शौचालय वाले परिवारों को चिन्हित किया जाना चाहिए और उनकी समस्या को ध्यान में रखते हुए उनकी शौचालय की समस्या को दूर करवाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, डीएम साहब ने अपनी ताकत के दम पर गरीबों को रोटी के लिए मोहताज करने देने का डर दिखाकर शौचालय बनवाने के लिए मजबूर कर डाला।

डीएम साहब का यह कृत्य उन्हें एक अपराधी बनाता है, जो अपने ही देश के नागरिकों को मिले रोटी के अधिकार से वंचित कर रहा है। हर देशवासी को दो समय भरपेट भोजन मिले इसके लिए ही सरकार गरीबों को सस्ते में राशन उपलब्ध करवाती है, इसका मतलब ये नहीं है कि इस व्यवस्था को सुनिश्चित करवाने वाले जिम्मेदार लोग इसी राशन के नाम पर ब्लैकमेलिंग को कानून बना डालेंगे।

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