DMRC की लापरवाही आई सामने, मेट्रो ऑपरेटर की सूज-बूझ ने बचाई महिला की जान

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DMRC की लापरवाही आई सामने, मेट्रो ऑपरेटर की सूज-बूझ ने बचाई महिला की जान

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में DMRC द्वारा संचालित मेट्रो ट्रेनों को यात्रियों के आवागमन के लिहाज से काफी सुरक्षित माना जाता रहा है, लेकिन मंगलवार को दिल्ली के  मोतीनगर पर हुए हादसे ने इसकी पोल खोल दी है। दरअसल, DMRC का दावा है कि अगर कोई चीज गेट पर हो तो वह बंद नहीं होता और फिर ट्रेन के चलने का तो कोई सवाल ही नहीं है।

Dmrcs Negligence Came In Front By This Way Metro Operator Saved Womens Life :

दरअसल, मेट्रो के इस दावे के विपरीत मंगलवार सुबह मोती नगर मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के दौरान एक महिला की साड़ी गेट में फंस गई। इसके बाद ट्रेन का गेट बंद हो गया और ट्रेन चल पड़ी। इसके बाद महिला काफी दूर तक घिसटती रही। इस दौरान लोगों ने चिल्लाकर ट्रेन ऑपरेटर को ट्रेन रोकने के लिए मजबूर किया तब इस महिला की जान बची। मिली जानकारी के मुताबिक, महिला को चोट आई है और उसे नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत ठीक है।

ये है पूरा मामला

प्रत्यक्षदर्शी से मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार सुबह 9:20 पर मोती नगर मेट्रो स्टेशन पर वैशाली (गाजियाबाद) की ओर जाने वाली मेट्रो रुकी। ट्रेन से उतरने के दौरान पीड़ित गीता (40) की साड़ी का एक हिस्सा अटक गया, हालांकि गीता ट्रेन के बाहर यानी प्लेटफॉर्म पर थी। वहीं गीता अपनी साड़ी का हिस्सा गेट से निकालनी की कोशिश कर ही रही थी कि गेट बंद हुआ और ट्रेन चल पड़ी। गीता कुछ समझ पाती इससे पहले ही प्लेटफॉर्म पर गिर पड़ी और ट्रेन के साथ घिसटने लगी। ट्रेन ने गीता को काफी दूर तक प्लेटफॉर्म पर घसीटा, इस दौरान वह चिल्लाती रही।

वहीं उसी बीच महिला के चीखने का आवाज पर वहां खड़े यात्रियों ने ट्रेन रोकने के लिए शोर मचाया। इस दौरान शोर सुनकर ट्रेन ऑपरेटर ने तुरंत सतर्कता दिखाई और कुछ दूरी पर ट्रेन रोक दी। वहीं, महिला गीता के पति के मुताबिक, मेट्रो काफी दूर जाकर रुकी इस दौरान गीता आखिरी छोर पर जाकर रेलवे ट्रैक पर गिर गई थीं। उसे काफी चोट भी आई है। इस हादसे के चलते ब्लू लाइन पर मेट्रो का परिचालन तकरीबन 20 मिनट तक प्रभावित रहा।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में DMRC द्वारा संचालित मेट्रो ट्रेनों को यात्रियों के आवागमन के लिहाज से काफी सुरक्षित माना जाता रहा है, लेकिन मंगलवार को दिल्ली के  मोतीनगर पर हुए हादसे ने इसकी पोल खोल दी है। दरअसल, DMRC का दावा है कि अगर कोई चीज गेट पर हो तो वह बंद नहीं होता और फिर ट्रेन के चलने का तो कोई सवाल ही नहीं है। दरअसल, मेट्रो के इस दावे के विपरीत मंगलवार सुबह मोती नगर मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के दौरान एक महिला की साड़ी गेट में फंस गई। इसके बाद ट्रेन का गेट बंद हो गया और ट्रेन चल पड़ी। इसके बाद महिला काफी दूर तक घिसटती रही। इस दौरान लोगों ने चिल्लाकर ट्रेन ऑपरेटर को ट्रेन रोकने के लिए मजबूर किया तब इस महिला की जान बची। मिली जानकारी के मुताबिक, महिला को चोट आई है और उसे नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत ठीक है। ये है पूरा मामला प्रत्यक्षदर्शी से मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार सुबह 9:20 पर मोती नगर मेट्रो स्टेशन पर वैशाली (गाजियाबाद) की ओर जाने वाली मेट्रो रुकी। ट्रेन से उतरने के दौरान पीड़ित गीता (40) की साड़ी का एक हिस्सा अटक गया, हालांकि गीता ट्रेन के बाहर यानी प्लेटफॉर्म पर थी। वहीं गीता अपनी साड़ी का हिस्सा गेट से निकालनी की कोशिश कर ही रही थी कि गेट बंद हुआ और ट्रेन चल पड़ी। गीता कुछ समझ पाती इससे पहले ही प्लेटफॉर्म पर गिर पड़ी और ट्रेन के साथ घिसटने लगी। ट्रेन ने गीता को काफी दूर तक प्लेटफॉर्म पर घसीटा, इस दौरान वह चिल्लाती रही। वहीं उसी बीच महिला के चीखने का आवाज पर वहां खड़े यात्रियों ने ट्रेन रोकने के लिए शोर मचाया। इस दौरान शोर सुनकर ट्रेन ऑपरेटर ने तुरंत सतर्कता दिखाई और कुछ दूरी पर ट्रेन रोक दी। वहीं, महिला गीता के पति के मुताबिक, मेट्रो काफी दूर जाकर रुकी इस दौरान गीता आखिरी छोर पर जाकर रेलवे ट्रैक पर गिर गई थीं। उसे काफी चोट भी आई है। इस हादसे के चलते ब्लू लाइन पर मेट्रो का परिचालन तकरीबन 20 मिनट तक प्रभावित रहा।