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Pitru Paksha 2022 : पितृ पक्ष में पितरों के लिए हरगिज़ ना करें ये 10 काम, हो सकता है भयानक नुकसान

पितृ पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए ये 10 काम हरगीज़ ना करें ! मान्यता है कि पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष के दौरान सभी पितर यानि परिवार के वो बुजुर्ग जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनकी आत्माएं पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने परिवार के लोगों के बीच आकर रहती हैं.

By आराधना शर्मा 
Updated Date

Pitru Paksha: पितृ पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए ये 10 काम हरगीज़ ना करें ! मान्यता है कि पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष के दौरान सभी पितर यानि परिवार के वो बुजुर्ग जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनकी आत्माएं पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने परिवार के लोगों के बीच आकर रहती हैं.

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ऐसा माना जाता है कि अगर पितृ नाराज़ हो जाएं तो मनुष्य को अपने जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसलिए पितृ पक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करना ज़रूरी माना जाता है.

पितृ पक्ष के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखना ज़रूर है क्योंकि इनकी अनदेखी करने से पितृ नाराज़ हो जाते हैं और उनकी अशांति के कारण हमारे में जीवन में अशांति आ जाती है. अगर आप अपने पितरों को प्रसन्न करके उनकी कृपा पाना चाहते हैं तो पितृ पक्ष या पितरों का श्राद्ध के दौरान इन 10 कामों को भूलकर भी न करें.

पितरों का श्राद्ध- पितृपक्ष में न करें ये 10 काम

  • पितृ पक्ष के दौरान घर पर आए किसी भी अतिथि को बिना भोजन पानी के नहीं जाने देना चाहिए. मान्यता है कि इन दिनों पितर किसी भी रूप में आपके घर पर आ सकते हैं. इसलिए अपने दरवाजे पर आने वाले किसी भी जीव का निरादर ना करें.
  • पितृ पक्ष में बनाए गए भोजन में से एक हिस्सा निकालकर सबसे पहले पितरों को अर्पण करना चाहिए, यानि आप जो भी भोजन बनाएं उसमें एक हिस्सा गाय, कुत्ता, बिल्ली या कौए को खिला दें. उसके बाद परिवार के साथ स्वयं भोजन करें. ऐसा करने से आप पुण्य और पितरों के आशीर्वाद के भागीदार बनते हैं.

  • पितृ पक्ष के दौरान खाने में मसूर की दाल, चना, लहसुन, जीरा, काले उडद, काला नमक, राई, और बासी भोजन नहीं खाना चाहिए. इसके अलावा खान-पान में मांस मछली को शामिल नहीं करना चाहिए.
  • जो व्यक्ति पितरों का श्राद्ध करता है, उसे पितृ पक्ष में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. यानि स्त्री-पुरुष संसर्ग से बचना चाहिए. इसके पीछे मान्यता है कि इस दौरान पितर घर में होते हैं और यह उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का समय होता है. इसलिए इन दिनों संयम का पालन करना चाहिए.
  • ऐसा कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान नया घर नहीं लेना चाहिए. वैसे नया घर लेने में कोई बुराई तो नहीं है लेकिन स्थान परिवर्तन करने से पितरों को तकलीफ होती है. माना जाता है कि जहां पितरों की मृत्यु हुई होती है वो अपने उसी स्थान पर लौटते हैं. अगर उनके परिजन उस स्थान पर नहीं मिलते हैं तो उन्हें तकलीफ होती है.
  • पितृ पक्ष को लेकर मान्यता है कि इन दिनों नए वाहन नहीं खरीदने चाहिए. क्योंकि नए वाहन को भौतिक सुख से जोड़कर देखा जाता है और पितृ पक्ष अपने पितरों के प्रति शोक प्रकट करने का समय होता है. इसलिए धारणा है कि इन दिनों वाहन की खरीददारी नहीं करनी चाहिए.

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  • मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान स्वर्ण और नए वस्त्र नहीं खरीदने चाहिए. इसके अलावा नए वस्त्र पहनने भी नहीं चाहिए. ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि पितृपक्ष उत्सव नहीं बल्कि एक तरह से पूर्वजों के प्रति शोक प्रकट करने का समय होता है, जो अब हमारे बीच नहीं रहे.
  • श्राद्ध एवं तर्पण क्रिया में काले तिल का बड़ा महत्त्व होता है. श्राद्ध करने वालों को पितृ कर्म में काले तिल का इस्तेमाल करना चाहिए. लाल और सफेद तिल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
  • शास्त्रों के मुताबिक गया, प्रयाग, बद्रीनाथ में श्राद्ध एवं पिंडदान करने से पितरों को मुक्ति मिलती है. जो लोग इन स्थानों पर पिंडदान या श्राद्ध नहीं कर सकते वो अपने घर के आंगन में ज़मीन पर कहीं भी तर्पण कर सकते हैं, लेकिन किसी और के घर की जमीन पर तर्पण नहीं करना चाहिए.
  • पितृ पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाने का नियम है. भोजन पूर्ण सात्विक एवं धार्मिंक विचारों वाले ब्राह्मण को ही करवाना चाहिए.

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