क्या ​एशिया का सबसे करप्ट देश है भारत ..?

क्या ​एशिया का सबसे करप्ट देश है भारत ..?

नई दिल्ली। फोर्ब्स मैग्जीन की ओर से जारी एशिया के सबसे करप्ट देशों की सूची में भारत को पहला स्थान दिए जाने के बाद ट्विटर पर एक बहस शुरू हो चुकी है। देश के जाने माने हिन्दी कवि और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने इस लिस्ट में भारत को नंबर वन बताए जाने पर ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चुटकी ली है। उन्होंने लिखा है कि पहले ही कह दिया था कि नंबर वन बना दूंगा, लो बना दिया।

कुमार विश्वास के इस ट्वीट पर लोगों ने तरह तरह की प्रक्रियाएं दी है। किसी ने फोर्ब्स के सर्वे को मजाक करार दिया है तो किसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सम​र्थन करते हुए इस सर्वे को निराधार बताया है।

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वहीं कुछ लोग ऐसे भी है जो इस सर्वे की आड़ में सोशल मीडिया पर मौजूद तथाकथित मोदी समर्थकों यानी मोदी भक्तों पर हलवालर होने का मौका पा गए है। ऐसे लोगों में से एक का कहना है कि एशिया तो बहुत छोटा है उन्हें लगता है भारत दुनिया में टॉप करने की स्थिति में है।

फोर्ब्स की ओर से जारी सर्वे का आधार भारत में पांच मूल भूत सेवाओं जैसे चिकित्सा, शिक्षा, पुलिस, दस्तावेज बनवाने में और जनसेवी सेवाओं में होने वाले भ्रष्टाचार को माना गया है। फोर्ब्स का कहना है कि उनके सर्वे का हिस्सा बने लोगों ने माना है कि उन्होंने आधारभूत सेवाओं के नाम पर घूंस दी है।

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इस सू​ची भारत टॉप पर है तो वियतनाम दूसरे स्थान पर जबकि पाकिस्तान इस सूची में चौथे पायदान पर काबिज है। हालांकि इस सर्वे में यह बात भी सामने आई कि 53 प्रतिशत लोग मानते हैं कि देश में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से कुछ परिवर्तन आया है।

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सर्वे के गणित को समझने वाले एक दीपेन्द्र किशोर एनालिस्ट का कहना है कि सर्वे में सैंपल साइज क्या रहा और इस सैंपल साइज का हिस्सा बने लोग भारत में किस इलाके से थे यह अपने आप में बहुत बड़ा सवाल है। अगर हम भारत की बात करें तो मूल भूत सेवाएं उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार के अंतर्गत न आकर राज्य सरकारों के अंतर्गत आती है। हर राज्य में अलग—अलग सरकारें है, इस तरह के भ्रष्टाचार को रोकने की जिम्मेदारी इन सरकारों की ही है नाकि केन्द्र सरकार की। इस तरह के सर्वेज की विश्वसनीयता हमेशा से विवाद का विषय रही है। लेकिन राजनीति में किसी ऐसे सर्वे पर सियासी खीज को निकाला जाना आम है। इन सर्वेज को लोग सुर्खियों में रहने तक ही याद रखते हैं।

हमारा तो कहना इतना भर है कि भ्रष्टाचार एक ताली है जो दो हाथों के बिना बज ही नहीं सकती। जब कोई एक भी आदमी घूंस देता रहेगा तब तक घूंस लेने वाले मिलते रहेंगे। जिस दिन घूंस देने की विचारधारा खत्म हो जाएगी उसी दिन घूंस लेने वाले ढूंढ़ने से नहीं मिलेंगे। अगर देशों को लेकर होने वाले ऐसे सर्वे की चिंता है तो बदलाव स्वयं से लाना शुरू करें।

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