टॉर्च की रोशनी में हुआ मोतियाबिंद का आॅपरेशन, सीएमओ उन्नाव निलंबित

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Doctor Operated Cataract Surgery In Torchlight Chief Medical Officer Unnao Suspended

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेहत के साथ कैसे कैसे खिलवाड़ होते हैं, यह सोमवार को राजधानी लखनऊ के सीमावर्ती जिले उन्नाव के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर देखने को मिला। जहां एक डॉक्टर के मरीज की आॅंख का आॅपरेशन करने के दौरानबिजली चली गई और फिर डॉक्टर साहब ने टॉर्च की रोशनी में आॅपरेशन को पूरा कर डाला।इस मामले में सबसे अच्छी बात यह रही की मरीज को छुट्टी देते समय किसी प्रकार की समस्या सामने नहीं आई।

इस पूरे मामले को मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने ​अपने मोबाइल में रिकार्ड कर लिया। वीडियो सामने आने के बाद लखनऊ में बैठे स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों ने इस लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए उन्नाव के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ उन्नाव) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को निलंबित कर दिया है।

निलंबित हुए डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने मीडिया को बताया कि उन्होंने लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा तो उन्होंने जवाब में कहा कि वह आॅपरेशन कर रहे थे, इसी दौरान बिजली चली गर्ई। जनरेटर की व्यवस्था करने में कुछ देर लग रही थी, ऐसे में आॅपरेशन को बीच में रोकना मरीज के लिए दुष्परिणामकारी हो सकता था। इसलिए टॉर्च की रोशनी में आॅपरेशन को पूरा किया।

ये था मामला —

सरकारी सूत्रों की माने तो जगदम्बा सेवा संस्थान नामक एक समाजसेवी संस्था की ओर से उन्नाव के ग्रामीण इलाकों से 32 मरीजों को मोतियाबिंद के आॅपरेशन के लिए समुदायिक केन्द्र में कैम्प लगाया गया था। सरकारी अनुदान पर नि:शुल्क होने वाले इन आॅपरेशनों के लिए समाजसेवी संस्था ने कानपुर के एक प्राइवेट डॉक्टर की सेवाएं लीं गईं। आॅपरेशनों को करने के लिए संस्था की ओर से सामुदायिक केन्द्र के संसाधनों के प्रयोग के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी से आज्ञा ली गई थी। सीएमओ कार्यालय की ओर से 24 घंटे के लिए मोतियाबिंद कैंप लगाने के लिए अनुमति दी गई थी।

बताया जा रहा है कि ऐसी दशा में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात एक चिकित्सक को आॅपरेशन के दौरान मौजूद रहना होता है। लेकिन सोमवार को आॅपरेशन होते समय जिम्मेदार डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं रहे।

समाजसेवी संस्था को लाना था जनरेटर —

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी ने बताया है कि मोतियाबिन्द कैंप के लिए अस्पताल की बिल्डिंग और मरीजों को आपरेशन के बाद लिटाने के लिए बिस्तर दिए जाने का प्रबंध किया गया था। जनरेटर आदि की व्यवस्था संस्था को स्वयं की करनी थी।

मोतियाबिंद कैंपों की सच्चाई आई सामने —

केन्द्र और राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयास से प्रतिवर्ष मोतियाबिंद के नि:शुल्क आॅपरेशन करवाने के लिए समाजसेवी संस्थाओं को अनुदान प्रदान किया जाता है। चूंकि यह योजना पूरी तरह से सरकारी खर्चे पर इसलिए सरकार की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर इस तरह के कैंप लगवाने की छूट दी जाती है।

जानकारों की माने तो समाजसेवी संस्थाएं हर साल सैकड़ों आॅपरेशन कर दवा, चश्मा और आंख में आॅपरेशन के बाद डाले जाने वाले लेंस के नाम पर लाखों का अनुदान प्राप्त करतीं हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि इन कैंपों में मरीजों की आंखों के साथ इस तरह के खिलवाड़ होते रहते हैं। अनुभवहीन डॉक्टरों से आॅपरेशन करवाकर तो कभी सस्ते लेंस डालकर ये समाजसेवी संस्थाएं कमाई करने की जुगाड़ में रहती हैं। जिस वजह से कई बार मरीजों की आंखों की रोशनी चली जाती है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेहत के साथ कैसे कैसे खिलवाड़ होते हैं, यह सोमवार को राजधानी लखनऊ के सीमावर्ती जिले उन्नाव के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर देखने को मिला। जहां एक डॉक्टर के मरीज की आॅंख का आॅपरेशन करने के दौरानबिजली चली गई और फिर डॉक्टर साहब ने टॉर्च की रोशनी में आॅपरेशन को पूरा कर डाला।इस मामले में सबसे अच्छी बात यह रही की मरीज को छुट्टी देते समय किसी प्रकार की समस्या…