कहीं आपका स्मार्टफोन आपके लिए डिप्रेशन का कारण न बन जाये

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कहीं आपका स्मार्टफोन आपके लिए डिप्रेशन का कारण न बन जाये

लखनऊ। क्या आप भी हमेशा स्मार्टफोन से चिपके रहते हैं? अगर हां, तो हो सकता है कि आप डिप्रेशन में हों। दरअसल, हाल ही में आया एक शोध में पता चला कि, स्मार्टफोन हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। लेकिन इससे ज्यादा नजदीकी अच्छी नहीं। अगर आप हमेशा स्मार्टफोन से चिपके रहते हैं, तो यह मत समझिए कि यह सामान्य है। यह संकेत है कि आप डिप्रेशन का शिकार हैं।

Does Being On Your Phone Causes Depression :

  • कहा जाता है कि जो लोग अकेले होते हैं या फिर भावानात्मक रूप से कमजोर होते हैं, उनमें चिंता और तनाव का स्तर सामान्य लोगों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होता है। व्यक्ति अगर डिप्रेशन में होता है, तो सिगरेट, शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की लत लग जाती है।
  • लेकिन ऐसा भी नहीं है कि डिप्रेशन होने पर केवल नशीले पदार्थों के सेवन की ही लत लगती है बल्कि कई ऐसे लोग हैं जिन्हे डिप्रेशन होने पर स्मार्टफोन की लत भी लग सकती है।
  • ऐसे लोग जो चिंता और डिप्रेशन से पीड़ित होते हैं, उन्हें स्मार्टफोन की लत लगने की आशंका ज्यादा होती है। शोध में पाया गया है कि भावनात्मक रूप से कम स्थिर होना, स्मार्टफोन व्यवहार से जुड़ा हुआ है।
  • रिसर्च में पाया गया कि ऐसे लोग जो अपने मानसिक स्वास्थ्य से संघर्ष करते हैं, उनमें स्मार्टफोन के इस्तेमाल की संभावना ज्यादा होती है। ये लोग अपने फोन का इस्तेमाल मेडिकल थेरेपी के रूप में करते हैं।
  • बीमारियों का खतरा डिप्रेशन में स्मार्टफोन से ज्यादा नजदीकी होने पर नींद न आने की समस्या हो सकती है। स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से दिल से जुड़ी बीमारियां होने का डर भी रहता है।
  • मोबाइल से निकलने वाली रोशनी, आंखों की रोशनी पर भी बुरा असर डालती है। बिना पलक झपकाएं देर तक मोबाइल देखते रहने से आंखें शुष्क हो जाती हैं। जिससे जलन पैदा होना, धुंधला दिखाई देना आदि दिक्कतें आने लगती हैं।
  • स्मार्टफोन की लत से गर्दन में दर्द, रीढ़ की हड्डी में परेशानी, सिरदर्द आदि समस्या हो सकती हैं। भूख में कमी, बेचैनी भी स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से ही होता है।
लखनऊ। क्या आप भी हमेशा स्मार्टफोन से चिपके रहते हैं? अगर हां, तो हो सकता है कि आप डिप्रेशन में हों। दरअसल, हाल ही में आया एक शोध में पता चला कि, स्मार्टफोन हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। लेकिन इससे ज्यादा नजदीकी अच्छी नहीं। अगर आप हमेशा स्मार्टफोन से चिपके रहते हैं, तो यह मत समझिए कि यह सामान्य है। यह संकेत है कि आप डिप्रेशन का शिकार हैं।
  • कहा जाता है कि जो लोग अकेले होते हैं या फिर भावानात्मक रूप से कमजोर होते हैं, उनमें चिंता और तनाव का स्तर सामान्य लोगों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होता है। व्यक्ति अगर डिप्रेशन में होता है, तो सिगरेट, शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की लत लग जाती है।
  • लेकिन ऐसा भी नहीं है कि डिप्रेशन होने पर केवल नशीले पदार्थों के सेवन की ही लत लगती है बल्कि कई ऐसे लोग हैं जिन्हे डिप्रेशन होने पर स्मार्टफोन की लत भी लग सकती है।
  • ऐसे लोग जो चिंता और डिप्रेशन से पीड़ित होते हैं, उन्हें स्मार्टफोन की लत लगने की आशंका ज्यादा होती है। शोध में पाया गया है कि भावनात्मक रूप से कम स्थिर होना, स्मार्टफोन व्यवहार से जुड़ा हुआ है।
  • रिसर्च में पाया गया कि ऐसे लोग जो अपने मानसिक स्वास्थ्य से संघर्ष करते हैं, उनमें स्मार्टफोन के इस्तेमाल की संभावना ज्यादा होती है। ये लोग अपने फोन का इस्तेमाल मेडिकल थेरेपी के रूप में करते हैं।
  • बीमारियों का खतरा डिप्रेशन में स्मार्टफोन से ज्यादा नजदीकी होने पर नींद न आने की समस्या हो सकती है। स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से दिल से जुड़ी बीमारियां होने का डर भी रहता है।
  • मोबाइल से निकलने वाली रोशनी, आंखों की रोशनी पर भी बुरा असर डालती है। बिना पलक झपकाएं देर तक मोबाइल देखते रहने से आंखें शुष्क हो जाती हैं। जिससे जलन पैदा होना, धुंधला दिखाई देना आदि दिक्कतें आने लगती हैं।
  • स्मार्टफोन की लत से गर्दन में दर्द, रीढ़ की हड्डी में परेशानी, सिरदर्द आदि समस्या हो सकती हैं। भूख में कमी, बेचैनी भी स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से ही होता है।