क्या योगी सरकार पर पहला धब्बा बनने के रास्ते पर हैं केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के कई फैसले विवादों में घिरे हैं। जिस तरह से उन्होंने अपने अधिकारक्षेत्र में आने वाले विभागों के अंतर्गत कई अहम पदों पर भ्रष्टाचारी अधिकारियों की तैनाती की है, उसके बाद से मौर्य की भ्रष्टाचारियों को लेकर मंशा और ईमानदारी को वापस लाने के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में केशव प्रसाद मौर्य का कद इतना बड़ा है कि भविष्य में उनके फैसलों को लेकर विपक्ष पूरी सरकार की छवि पर सवाल खड़े कर सकता है।

केशव प्रसाद मौर्य ने यूपीआरएनएन (UPRNN) और यूपी सेतु निर्माण निगम में प्रबंध निदेशकों के पद पर जिन इंजीनियरों की तैनाती की उनकी छवि पर बीजेपी और मौर्य खुद ही अप्रत्यक्ष रूप से संदेह करते रहे हैं। ये दोनों ही इंजीनियर पूर्ववर्ती सरकार के करीबी रहे हैं। पिछली सरकार के प्रति इनकी आस्था और समर्पण के कई मामले विभागों में चर्चा का केन्द्र बने हुए हैं। विभाग के ही ईमानदार इंजीनियरों का सोचना है कि भ्रष्टाचार मिटाने का दावा करने वाली बीजेपी ही अब भ्रष्टाचारियों को आगे बढ़ा रही है। विभागों में तो ऐसी खबरें तक तैर रहीं हैं कि इन भ्रष्टाचारी इंजीनियरों ने करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाकर केशव की कृपा प्राप्त की है।

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यूपीआरएनएन के नवनियुक्त एमडी विश्व दीपक की बात करें तो वे अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट आगरा एक्सप्रेसवे से जुड़े रहे इंजीनियरों में सबसे ऊंची कुर्सी पर तैनात रहे हैं। विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने इस प्रोजेक्ट में 10 हजार करोड़ के घोटाले की आशंका व्यक्त करते हुए जांच करवाने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद बीजेपी सरकार ने प्रोजेक्ट की जांच तो शुरू करवा दी, लेकिन इस प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर रहे विश्व दीपक को क्लीन चिट देकर यूपीआरएनएन जैसी सबसे बड़ी निगम का प्रबंध निदेशक बना दिया।

वहीं सेतु निर्माण निगम के नवनियुक्त एमडी राजन मित्तल की बात करें तो वह भी पिछली सरकार में कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव के करीबी रहे और अंत के दिनों में सीएम अखिलेश यादव के कृपापात्र बन गए। पीडब्ल्यूडी के आगरा क्षेत्र का चीफ इंजीनियर रहते उन्होंने अखिलेश यादव करीबी तेल करोबारी शिव प्रकाश राठौर के भाई देवेन्द्र राठौर की कंपनी आरपी इंफ्रावेंचर को 1200 करोड़ के सड़क निर्माण के टेंडर थमा दिए। राजन मित्तल ने आरपी इंफ्रावेंचर पर ऐसी कृपा बरसाई की रातों रात बनी कंपनी को 25 करोड़ की फर्जी एफडीआर और बिना किसी अनुभव के 800 और 458 करोड़ के सड़क निर्माण का ठेका दे​ दिया। इन ठेकों के लिए पीडब्ल्यूडी और आरपी इंफ्रावेंचर का बांड राजन मित्तल के सामने तैयार किया गया।

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आरपी इंफ्रावेंचर को नियमों की अनदेखी कर दिए गए 1200 करोड़ के ठेकों की चर्चा आगरा पीडब्ल्यूडी के दफ्तर में चर्चा का विषय बनी हुई है। जिसमें राजन मित्तल की भूमिका किसी से छुपी नहीं है। मित्तल के कारनामों की जानकारी होने के बावजूद केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें सेतु निर्माण निगम का एमडी बना दिया है।

अखिलेश सरकार के कई दागियों पर है केशव का भरोसा —

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य अपने अब तक के कार्यकाल में अखिलेश सरकार के कई दागियों पर अपना भरोसा जता चुके हैं। अखिलेश सरकार के कमाऊ रहे कुछ नौकरशाहों को भी केशव ने अपनी क्षत्रछाया में लेना शुरू कर दिया है। पिछली सरकारों के करीबी रहे कुछ बड़े कारोबारी भी उनके संपर्क में आकर योगी सरकार में अपनी पैठ बनाने की कोशिश में लगे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि पिछली सरकार में मोटी कमाई करने वाले लोग योगी सरकार में बड़े टेंडरों को हासिल करने के लिए केशव के दरबार में हाजरी लगा रहे हैं।

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क्या योगी सरकार के पहले दागी बनने के रास्ते पर है केशव—

यूपी की पिछली सरकारों की बात करें तो हर सरकार के मंत्रिमंडल में कुछ चेहरे ऐसे रहें हैं जिनकी वजह से पूरी सरकार की छवि धूमिल हुई। निर्वासित अखिलेश यादव की सरकार की बात करें तो उनके खनन मंत्री गायत्री प्रजापति का नाम हमेशा ही भ्रष्टाचार को लेकर उछाला जाता रहा, लेकिन अखिलेश सरकार का उनसे मोहभंग नहीं हुआ। ऐसा ही कुछ मायावती सरकार में हुआ था। जब मायावती के करीबी रहे कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, स्वास्थ्य मंत्री अंटू मिश्रा और सबसे ताकतवर मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के भ्रष्टाचार हमेशा सुर्खियों मेंं रहे। भ्रष्टाचार पर आंखें मूंदे रहने के चलते ही इन सरकारों की विश्वसनीयता खत्म हो गई।

अगर समय रहते सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी ने इस तरह के विवादित फैसलों को गंभीरता से नहीं लिया तो वह दिन दूर नहीं कि भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस का दावा करने वाली नई सरकार की विश्वस​नीयता खत्म हो जाएगी और इसकी तुलना भी पूर्ववर्ती सरकारों से भ्रष्टाचार के मुद्दे को ही लेकर होगी।

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