क्या उत्तर प्रदेश की गठबंधन राजनीति में रोड़ा बन रहे थे राज बब्बर..

Raj Babbar, राज बब्बर

लखनऊ । कांग्रेस केन्द्र की राजनीति में विपक्ष को एक जुट करने में जुटी है। यही कारण था कि उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उप चुनावों में हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशियों को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का समर्थन मिलने के बाद कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों को भी वापस करने का फैसला लिया था। राष्ट्रीय मीडिया ने ब्रेकिंग न्यूज भी चला दी कि ​दिल्ली के नेतृत्व ने यूपी उपचुनाव में अपने प्रत्याशियों को बैठाने का फैसला कर लिया है। खबर चली, लेकिन यूपी कांग्रेस इकाई की ओर से जो प्रतिक्रिया आई उसमें कहा गया कि प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर पार्टी प्रत्याशियों के लिए प्रचार कर रहे हैं। जब तक वह स्पष्ट नहीं करते कांग्रेस चुनाव के मैदान में डटी रहेगी।

Does Raj Babbar Fails Congress Plan Of Coalition Politics In Uttar Pradesh :

कुछ ही घंटों में कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को लड़ाएगी। उपचुनाव के जो नतीजे सामने आए उसमें सपा के उम्मीदवारों ने बसपा के समर्थन से भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनीं दोनों सीटों पर जीत का परचम लहरा दिया।

गोरखपुर और फूलपुर उपचुनावों में सपा और बसपा के कथित गठबंधन को मिली जीत राष्ट्रीय सुर्खी बनी और विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में लगी कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों की जमानत का जब्त होने पर भी जमकर बहस हुई। ये बहस अकारण नहीं थी, क्योंकि कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन कर चुकी थी। उपचुनावों में बसपा द्वारा समर्थन की घोषणा किए जाने के बाद सपा के उम्मीदवारों मजबूत जमीन पर खड़े थे, लेकिन कांग्रेस उनका समर्थन करने का फैसला लेकर पीछे हट गई।

उस समय कांग्रेस ने अपने प्रत्या​शी भी सपा के बसपा स​मर्थित प्रत्याशियों के समर्थन में बैठा दिए होते तो कांग्रेस के पास कहने के लिए बहुत कुछ होता और वह जीते हुए खेमे में खड़ी होती। कांग्रेस की इस रणनीतिक असफलता के लिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर को कारण के रूप में देखा गया। राज बब्बर ने ही कांग्रेस के उम्मीदवारों को बैठाने की खिलाफत की थी। उन्हें लग रहा था कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उप चुनावों के प्रचार में बहुत मेहनत कर चुके हैं, केन्द्रीय नेतृत्व के कहने पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार बैठा दिए तो इस फैसले से कार्यकर्ता निराश होगा।

उप चुनावों को लेकर राज बब्बर की रणनीतिक असफलता को पार्टी हाईकमान ने गंभीरता से लिया है। पार्टी के सूत्रों की माने तो राज बब्बर के इस्तीफे को अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। पार्टी हाई कमान अभी तक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी उपलब्धियों और यूपी की सियासत में उनकी पकड़ का आंकलन कर रही है।

लखनऊ । कांग्रेस केन्द्र की राजनीति में विपक्ष को एक जुट करने में जुटी है। यही कारण था कि उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उप चुनावों में हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशियों को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का समर्थन मिलने के बाद कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों को भी वापस करने का फैसला लिया था। राष्ट्रीय मीडिया ने ब्रेकिंग न्यूज भी चला दी कि ​दिल्ली के नेतृत्व ने यूपी उपचुनाव में अपने प्रत्याशियों को बैठाने का फैसला कर लिया है। खबर चली, लेकिन यूपी कांग्रेस इकाई की ओर से जो प्रतिक्रिया आई उसमें कहा गया कि प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर पार्टी प्रत्याशियों के लिए प्रचार कर रहे हैं। जब तक वह स्पष्ट नहीं करते कांग्रेस चुनाव के मैदान में डटी रहेगी।कुछ ही घंटों में कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को लड़ाएगी। उपचुनाव के जो नतीजे सामने आए उसमें सपा के उम्मीदवारों ने बसपा के समर्थन से भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनीं दोनों सीटों पर जीत का परचम लहरा दिया।गोरखपुर और फूलपुर उपचुनावों में सपा और बसपा के कथित गठबंधन को मिली जीत राष्ट्रीय सुर्खी बनी और विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में लगी कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों की जमानत का जब्त होने पर भी जमकर बहस हुई। ये बहस अकारण नहीं थी, क्योंकि कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन कर चुकी थी। उपचुनावों में बसपा द्वारा समर्थन की घोषणा किए जाने के बाद सपा के उम्मीदवारों मजबूत जमीन पर खड़े थे, लेकिन कांग्रेस उनका समर्थन करने का फैसला लेकर पीछे हट गई।उस समय कांग्रेस ने अपने प्रत्या​शी भी सपा के बसपा स​मर्थित प्रत्याशियों के समर्थन में बैठा दिए होते तो कांग्रेस के पास कहने के लिए बहुत कुछ होता और वह जीते हुए खेमे में खड़ी होती। कांग्रेस की इस रणनीतिक असफलता के लिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर को कारण के रूप में देखा गया। राज बब्बर ने ही कांग्रेस के उम्मीदवारों को बैठाने की खिलाफत की थी। उन्हें लग रहा था कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उप चुनावों के प्रचार में बहुत मेहनत कर चुके हैं, केन्द्रीय नेतृत्व के कहने पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार बैठा दिए तो इस फैसले से कार्यकर्ता निराश होगा।उप चुनावों को लेकर राज बब्बर की रणनीतिक असफलता को पार्टी हाईकमान ने गंभीरता से लिया है। पार्टी के सूत्रों की माने तो राज बब्बर के इस्तीफे को अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। पार्टी हाई कमान अभी तक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी उपलब्धियों और यूपी की सियासत में उनकी पकड़ का आंकलन कर रही है।