ट्रंप का भारत को झटका, ईरान से तेल खरीदने पर अमेरिका ने लगाया बैन

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ट्रंप का भारत को झटका, ईरान से तेल खरीदने पर अमेरिका ने लगाया बैन

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत सहित आठ देशों को बड़ा झटका दिया। अब यदि भारत ने ईरान से तेल आयात किया तो अमेरिका से मिलने वाली किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने सोमवार को कहा, ईरान से तेल आयात करने को लेकर देशों को मिली छूट की समयसीमा 2 मई को खत्म होने जा रही है। 2 मई के बाद किसी भी देश को कोई छूट नहीं मिलेगी। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर तमाम प्रतिबंध लगाने के बावजूद 8 देशों को ईरान से तेल आयात करने की सीमित छूट दी थी। इन देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं।

Donald Trump Ends Oil Waivers To 8 Countries Import To Iran Big Challenge For India :

ईरान को अलग-थलग करने में जुटा अमेरिका

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के ऐलान के साथ अब साफ हो गया है कि जो देश ईरान से तेल आयात पूरी तरह बंद नहीं करेगा, उसे अमेरिकी प्रतिबंध झेलना पड़ेगा। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने रविवार को बताया था कि अमेरिका 2 मई के बाद किसी भी देश को ईरान से तेल आयात करने की कोई छूट नहीं देगा।

अमेरिका फैसले का भारत-चीन पर सबसे ज्यादा असर

दरअसल पिछले साल नवंबर में अमेरिका ने 8 देशों को ईरान से तेल आयात के बदले अन्य विकल्प तलाशने के लिए 180 दिनों की छूट दी थी, जो 2 मई को पूरी हो रही है। इन आठ देशों में से तीन देश, यूनान, इटली और ताइवान ने पहले ही ईरान से तेल आयात घटाकर शून्य कर लिया है। अन्य पांच देशों में भारत, चीन, तुर्की, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं जिन्हें अब ईरान से या तो तेल आयात बंद करना होगा या अमेरिकी प्रतिबंध को झेलना पड़ेगा।

हालांकि, भारत ने ट्रंप प्रशासन के प्रतिबंध के बाद से ही ईरान तेल के आयात से धीरे-धीरे दूरी बनाना शुरू कर दिया था। ईरान भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है और भारत के तेल आयात में 10 फीसदी का योगदान रखता है। इसके अलावा, नई दिल्ली के लिए ईरान रणनीतिक तौर पर भी बहुत अहमियत रखता है। भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश किया है जो भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान में पहुंचाता है।

भारत के रणनीतिकार चाबहार बंदरगाह को चीन के पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के जवाब के तौर पर भी देखते हैं। पश्चिम एशिया में भारत के हितों की रक्षा और इस क्षेत्र में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए ईरान एकमात्र रास्ता है।

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत सहित आठ देशों को बड़ा झटका दिया। अब यदि भारत ने ईरान से तेल आयात किया तो अमेरिका से मिलने वाली किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने सोमवार को कहा, ईरान से तेल आयात करने को लेकर देशों को मिली छूट की समयसीमा 2 मई को खत्म होने जा रही है। 2 मई के बाद किसी भी देश को कोई छूट नहीं मिलेगी। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर तमाम प्रतिबंध लगाने के बावजूद 8 देशों को ईरान से तेल आयात करने की सीमित छूट दी थी। इन देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं। ईरान को अलग-थलग करने में जुटा अमेरिका अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के ऐलान के साथ अब साफ हो गया है कि जो देश ईरान से तेल आयात पूरी तरह बंद नहीं करेगा, उसे अमेरिकी प्रतिबंध झेलना पड़ेगा। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने रविवार को बताया था कि अमेरिका 2 मई के बाद किसी भी देश को ईरान से तेल आयात करने की कोई छूट नहीं देगा। अमेरिका फैसले का भारत-चीन पर सबसे ज्यादा असर दरअसल पिछले साल नवंबर में अमेरिका ने 8 देशों को ईरान से तेल आयात के बदले अन्य विकल्प तलाशने के लिए 180 दिनों की छूट दी थी, जो 2 मई को पूरी हो रही है। इन आठ देशों में से तीन देश, यूनान, इटली और ताइवान ने पहले ही ईरान से तेल आयात घटाकर शून्य कर लिया है। अन्य पांच देशों में भारत, चीन, तुर्की, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं जिन्हें अब ईरान से या तो तेल आयात बंद करना होगा या अमेरिकी प्रतिबंध को झेलना पड़ेगा। हालांकि, भारत ने ट्रंप प्रशासन के प्रतिबंध के बाद से ही ईरान तेल के आयात से धीरे-धीरे दूरी बनाना शुरू कर दिया था। ईरान भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है और भारत के तेल आयात में 10 फीसदी का योगदान रखता है। इसके अलावा, नई दिल्ली के लिए ईरान रणनीतिक तौर पर भी बहुत अहमियत रखता है। भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह में निवेश किया है जो भारत को पाकिस्तान से गुजरे बिना अफगानिस्तान में पहुंचाता है। भारत के रणनीतिकार चाबहार बंदरगाह को चीन के पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के जवाब के तौर पर भी देखते हैं। पश्चिम एशिया में भारत के हितों की रक्षा और इस क्षेत्र में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए ईरान एकमात्र रास्ता है।