यूपी के इस IAS ने लिखी माता-पिता पर किताब, राज्यपाल ने किया लोकार्पण

फैजाबाद। कविताओं के माध्यम से माता पिता की ममता, प्रेम, वात्सल्य का वर्णन करने वाली कृति पारस-बेला अनूठी है। आज के समय में ऐसी कृतियों का सृजन कम हो रहा है। जननी और जन्मभूमि की वन्दना कविताओं के द्वारा किया जाना सराहनीय है। ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ का भाव मन में धारण करके कवि और आईएएस डाॅ. अनिल कुमार पाठक ने इस कृति से समाज को अच्छा संदेश दिया है।

राज्यपाल रामनाईक ने फैजाबाद में डाॅ0 राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के विवेकानन्द सभागार में कहा, ऐसी कृतियों की विशेष आवश्यकता है अच्छी पुस्तकें पाठकों को खरीद कर पढ़नी चाहिए। यह वक्तव्य उन्होने कवि एवं जिलाधिकारी फैजाबाद डाॅ0 अनिल कुमार पाठक की पुस्तक पारस-बेला के लोकार्पण के अवसर पर दिया। यह आयोजन प्रभात प्रकाशन द्वारा किया गया।
वहीं इस कार्यक्रम मे प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि यह काव्यकृति पुण्यश्लोक स्व0 पारसनाथ पाठक प्रसून और पूज्यचरण बेला देवी के प्रति डाॅ. अनिल कुमार पाठक का भक्ति भाव है। उन्होने कहा कि भौतिक दिनचर्या में हम अपने मूल से कटते जा रहे हैं जिसमें समूची ग्रामीण व्यवस्था और परिवार संस्कृति की उपेक्षा हो रही है। यही इन कविताओं का मुख्य संदेश है।
मातृ पितृ भक्त के साथ-साथ कवि ने इसमें आंचलिक संस्कृति को बड़ी सफलता के साथ चित्रित किया है। उन्होंने कहा कि पारस बेला कृत को 5 खण्डों में विभक्त किया गया है। प्रत्येक खण्ड की रचनाएं सोद्येश्य लिखी गयी है। श्रवणाख्यान पुराख्यानों से लेकर लोकनाट्यों एवं गाथाओं में विस्तार पूर्वक प्रस्तुत किया गया है। भक्त श्रवण की कथा का सार संक्षेप भी कविताओं के माध्यम से कवि ने किया है।

{ यह भी पढ़ें:- महकमा मेहरबान तो सरकारी भवन बना प्राइवेट 'गोदाम' }

Loading...