डॉ. कफील कोरोना मरीजो की करना चाहते हैं मदद, रिहाई की मांग, तीसरे चरण के रोडमैप के लिए PM को लिखा खत

Dr kafil
डॉ. कफील कोरोना मरीजो की करना चाहते हैं मदद, रिहाई की मांग, तीसरे चरण के रोडमैप के लिए PM को लिखा खत

लखनऊ। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रवक्ता एवं बालरोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान पर सीएए, एनपीआर और एनपीए के विरोध के दौरान अलीगढ़ विश्वविद्यालय में गत वर्ष 13 दिसम्बर को कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था। जिसके बाद उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और उन्हे मथुरा के जिला कारागार में रखा गया है। डॉ. कफील खान ने कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों की तारीफ की है और उसके तीसरे चरण में पहुंचने की आशंका प्रकट करते हुए उससे बचने के उपाय सुझाए हैं। उन्होने मरीजो की मदद करने के लिए अपनी रिहाई की मांग के साथ साथ तीसरे चरण के रोंडमैप के बारे में पीएम मोदी को खत लिखा है।

Dr Kafeel Wants To Help Corona Patients Demands Release Wrote Letter To Pm For Third Phase Roadmap :

मथुरा जेल प्रशासन के माध्यम से भेजी गई चिट्ठी में खान ने कोरोना वायरस के संदर्भ में रोडमैप सुझाते हुए लिखा है, ‘मुझे ‘सार्स-कोव 2′ से लड़ने के लिए सरकार द्वारा अपनाए गए उपाय सराहनीय एवं संतोषजनक लगे हैं। परंतु भारत इसके तीसरे चरण में पहुंच सकता है। आशंका है कि ऐसा होने पर देश के तीस-चालीस लाख नागरिक प्रभावित हो सकते हैं। उस स्थिति में तीन से चार फीसद मरीजों की मौत हो सकती है। ऐसे में यह महामारी बहुत ही विस्फोटक हो सकती है।’

उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लगाए 107 निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों में 50,000 मरीजों को देखे जाने का हवाला देते हुए कहा है, ‘हमारी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमराई हुई है। डाक्टरों व नर्सों की बहुत कमी है। 50 फीसदी से ज्यादा बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। आइसीयू केवल शहरों तक सीमित हैं। लोगों में जानकारी के अभाव के कारण यह महामारी बहुत घातक साबित हो सकती है। ऐसे में, स्वास्थ्य सेवाओं को अभी से मजबूत करने की जरूरत है।’

बता दें कि डॉ0 कफील ने 19 मार्च को जेल के अन्दर ही पत्र लिखा था जिसे उनकी पत्नी डॉ. शाबिस्ता खान ने उनके ट्विटर अकाउण्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय एवं संयुक्त राष्ट्र को बुधवार को टैग किया। कफील ने सुझाव दिया कि सरकार दक्षिण कोरिया के समान अधिकाधिक जांच एवं निगरानी तथा चीन के समान अधिक दृढ़ता से सोशल डिस्टेंस लागू किया जाए। इसके अलावा रैपिड लैब टेस्टिंग सेण्टरों की स्थापना, हर जिले में कम से कम 100 आइसीयू, 1000 आइसोलेशन बेड, डाक्टरों-नर्सों, आयुष चिकित्सकों, निजी चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण आदि जैसी कई बातें कहीं हैं।

उन्होंने लिखा है, ‘गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत मामले में जेल से रिहाई के बाद मैंने बिहार में चमकी, उप्र के मस्तिष्क ज्वर, केरल-असम एवं बिहार में बाढ़ के दौरान झारखण्ड-हरियाणा-छत्तीसगढ़-पश्चिम बंगाल-कर्नाटक आदि राज्यों में कुपोषण की जंग, स्वाइन फ्लू या एच1एन1 के मरीज हों, सभी का इलाज किया। मेरा रिसर्च वर्क राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुका है तथा स्वास्थ्य मंत्री द्वारा चुने गए देश के 25 बालरोग विशेषज्ञों में भी मेरा नाम सम्मिलित किया गया है। इसी को लेकर उन्होंने पीएम मोदी से निवेदन किया है कि वह उनकी रिहाई सुनिश्चित करन उन्हें भी कोरोना पीड़ित मरीजों की सेवा करने का मौका दें।

लखनऊ। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रवक्ता एवं बालरोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान पर सीएए, एनपीआर और एनपीए के विरोध के दौरान अलीगढ़ विश्वविद्यालय में गत वर्ष 13 दिसम्बर को कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था। जिसके बाद उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और उन्हे मथुरा के जिला कारागार में रखा गया है। डॉ. कफील खान ने कोरोना वायरस संकट से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों की तारीफ की है और उसके तीसरे चरण में पहुंचने की आशंका प्रकट करते हुए उससे बचने के उपाय सुझाए हैं। उन्होने मरीजो की मदद करने के लिए अपनी रिहाई की मांग के साथ साथ तीसरे चरण के रोंडमैप के बारे में पीएम मोदी को खत लिखा है। मथुरा जेल प्रशासन के माध्यम से भेजी गई चिट्ठी में खान ने कोरोना वायरस के संदर्भ में रोडमैप सुझाते हुए लिखा है, ‘मुझे ‘सार्स-कोव 2' से लड़ने के लिए सरकार द्वारा अपनाए गए उपाय सराहनीय एवं संतोषजनक लगे हैं। परंतु भारत इसके तीसरे चरण में पहुंच सकता है। आशंका है कि ऐसा होने पर देश के तीस-चालीस लाख नागरिक प्रभावित हो सकते हैं। उस स्थिति में तीन से चार फीसद मरीजों की मौत हो सकती है। ऐसे में यह महामारी बहुत ही विस्फोटक हो सकती है।' उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लगाए 107 निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों में 50,000 मरीजों को देखे जाने का हवाला देते हुए कहा है, ‘हमारी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमराई हुई है। डाक्टरों व नर्सों की बहुत कमी है। 50 फीसदी से ज्यादा बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। आइसीयू केवल शहरों तक सीमित हैं। लोगों में जानकारी के अभाव के कारण यह महामारी बहुत घातक साबित हो सकती है। ऐसे में, स्वास्थ्य सेवाओं को अभी से मजबूत करने की जरूरत है।' बता दें कि डॉ0 कफील ने 19 मार्च को जेल के अन्दर ही पत्र लिखा था जिसे उनकी पत्नी डॉ. शाबिस्ता खान ने उनके ट्विटर अकाउण्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय एवं संयुक्त राष्ट्र को बुधवार को टैग किया। कफील ने सुझाव दिया कि सरकार दक्षिण कोरिया के समान अधिकाधिक जांच एवं निगरानी तथा चीन के समान अधिक दृढ़ता से सोशल डिस्टेंस लागू किया जाए। इसके अलावा रैपिड लैब टेस्टिंग सेण्टरों की स्थापना, हर जिले में कम से कम 100 आइसीयू, 1000 आइसोलेशन बेड, डाक्टरों-नर्सों, आयुष चिकित्सकों, निजी चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण आदि जैसी कई बातें कहीं हैं। उन्होंने लिखा है, ‘गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत मामले में जेल से रिहाई के बाद मैंने बिहार में चमकी, उप्र के मस्तिष्क ज्वर, केरल-असम एवं बिहार में बाढ़ के दौरान झारखण्ड-हरियाणा-छत्तीसगढ़-पश्चिम बंगाल-कर्नाटक आदि राज्यों में कुपोषण की जंग, स्वाइन फ्लू या एच1एन1 के मरीज हों, सभी का इलाज किया। मेरा रिसर्च वर्क राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुका है तथा स्वास्थ्य मंत्री द्वारा चुने गए देश के 25 बालरोग विशेषज्ञों में भी मेरा नाम सम्मिलित किया गया है। इसी को लेकर उन्होंने पीएम मोदी से निवेदन किया है कि वह उनकी रिहाई सुनिश्चित करन उन्हें भी कोरोना पीड़ित मरीजों की सेवा करने का मौका दें।