एमसी सक्सेना मेडिकल कॉलेज में बिना मान्यता लिए गए MBBS में एडमिशन, अब छात्रों को देने होंगे 25-25 लाख

लखनऊ| हाईकोर्ट ने डॉ एमसी सक्सेना मेडिकल कॉलेज पर गलत तरीके से मेडिकल छात्रों के 150 दाखिले लेने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कॉलेज से सभी छात्रों की फीस वापस करने को कहा है| साथ ही कोर्ट ने सभी छात्रों को हर्जाने के रूप में 25-25 लाख रुपये देने का आदेश भी दिया है|




हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस कोर्स के लिए 11 लाख से 18 लाख रुपये की फीस तय की है| अब कॉलेज 150 छात्रों को 25-25 लाख के हिसाब से 37.50 करोड़ रुपये दो महीने में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा के यहां जमा करे| इसमें स्टूडेंट्स को हुए नुकसान का कुछ मुआवजा भी शामिल है| महानिदेशक वेरिफिकेशन के बाद छात्रों को पैसा लौटाएंगे| हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कॉलेज हर्जाना देने में देरी या आनाकानी करे तो महानिदेशक और जिलाधिकारी यह रकम कॉलेज के लैंड रेवेन्यू से वसूल करें|

कोर्ट ने यह फैसला दौडिया नारायण दिलीपभाई, स्मृति गंगवार, दीप्ति सिंह, रोशनी सक्सेना, अंशधा सिंह, असीम की याचिका पर दिया| कोर्ट ने पाया कि कॉलेज ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दरकिनार किया| कॉलेज ने काउंसलिंग में भी पारदर्शी प्रकिया को नहीं अपनाया| सुनवाई के दौरान स्टूडेंट्स ने दलील दी कि वह पढ़ाई पूरी कर चुके हैं इसलिए उन्हें दूसरे कॉलेजों में समायोजित कर परीक्षा कराई जाए, लेकिन कोर्ट ने इसे नहीं माना|

दरअसल, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने एमसी सक्सेना कॉलेज की मान्यता पिछले साल स्थगित कर दी थी| इसके बावजूद कॉलेज ने यूपी कंबाइंड मेडिकल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (यूपीसीएमईटी) के जरिए 150 सीटों पर दाखिले लिए| इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एमसीआई की याचिका पर 29 सितम्बर, 2015 को आदेश दिया कि कॉलेज कोई दाखिले नहीं ले सकता| 10 मार्च, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने फिर साफ कर दिया कि कॉलेज को एमबीबीएस में दाखिले का कोई अधिकार नहीं है|