महाभारत के युद्ध के दौरान श्री कृष्ण ने किये थे ये छल !

जब जब धर्म की हानि होती है तब भगवान इस पृथ्वी पर अवतार लेकर दुष्टों का नाश करने के बाद धर्म की स्थापना करते है। ऐसा धर्म ग्रंथों में कहा गया है। वैसे किसी के साथ छल या धोखा करना पाप माना गया है।लेकिन महाभारत के युद्ध में स्वंय भगवान कृष्ण कई बार छल  कपट का सहारा लेते हुए नजर आते है। महाभारत में धर्म और सत्य का संदेश भगवान कृष्ण देते दिखाई देते है लेकिन युद्ध क दौरान भगवान छल और प्रंवचना का सहारा लेते हुए पांडवों को विजयी बनाते हुए देखे गए।

पितामह भीष्म महान योद्धा थे। उऩको हरा पाना पांडवों के वश की बात नहीं थी। वे ऐसे धनुर्धर थे कि अर्जुन भी उनके सामने नहीं टिक सकता था। लेकिन पितामह भीष्म कभी किसी महिला पर वार नहीं करते थे। इसी बात का फायदा उठाते हुए भगवान कृष्ण ने शिखंडी को पितामह के सामने खड़ा कर दिया जिसका जन्म महिला के रूप में हुआ था। इस कारण पितामह ने उस पर वार नहीं किया।

द्रोणाचार्य़ पांडवों और कौरवों के गुरू थे। और गुरू को पांडवों में से कोई भी नहीं पराजित कर सकता था। भगवान कृष्ण ने उनके वध के लिये भी छल का एक आवरण बनाया। उनहोने अश्वथामा नामक हाथी को मरवाकर युद्धिष्ठिर से बुलवाया कि अश्वथामा मारा गया ।द्रोणाचार्य के पुत्र का नाम भी अश्वथामा था। धर्मराज युद्धिष्ठिर के मुख से यह सुनकर द्रोणाचार्य के हाथ से धनुष बाण छूट गया

जयद्रथ ने अर्जुन के पुत्र अभिमन्‍यु को मार दिया था। इस कारण अर्जुन ने कहा था कि वो या तो एक विशेष धनुष से सांझ तक जयद्रथ का वध कर देंगे  वरना खुद के प्राण त्‍याग देंगे। जब सूर्य अस्‍त से होने से पहले अर्जुन जयद्ऱथ का वध नहीं कर पाए तो वे अग्नि में जसकर भस्म होने जा ही रहे थे। इतने में कृष्ण ने अपने हाथों से ढके सर्य को हटा लिया। और इसके बाद सुबह से छिपकर बैठे जयद्रथ के सामने आते ही अर्जुन ने उसका वध कर दिया।

दानवीर कर्ण के वध में भी कृष्ण ने छल का सहारा लिया था। कृष्ण की चाल के मुताबिक ही अर्जुन ने नीचे की ओर वार करके उसके रथ को जमीन में गाड़ दिया। जब कर्ण उसे निकालने उतरा तो वह निहत्था था, उसी समय उसे सोचने समझने का मौका दिए बिना अर्जुन ने उसका वध कर दिया। इस प्रकार कर्ण, कृष्‍ण की चाल से मारा गया।