पैक्फेड घोटाला: कुशवाहा और सौरभ जैन समेत आठ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा समेत 8 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। आरोपपत्र में ईडी ने कुशवाहा समेत मेसर्स डीजी एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड व कम्पनी के निदेशक सौरभ जैन व पत्नी रजनी जैन का नाम शामिल किया है। वहीं मेसर्स सीएनसी मेटल फॉर्मिंग प्राइवेट लिमिटेड, कम्पनी के निदेशक सुनीत सिंघल और मेसर्स दर्पण मर्केन्टाइल प्राइवेट लिमिटेड व भगवत प्रसाद एजुकेशनल ऐंड वेलफेयर्स ट्रस्ट को भी आरोपी बनाया गया है।

Ed File Charge Sheet Against Babu Singh Kushwaha And 7 Others :

ईडी के विशेष वकील कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में परिवार कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव प्रदीप शुक्ला, डीजी परिवार कल्याण डॉ. एसपी राम, पैक्फेड के तत्कालीन एमडी वीके चौधरी, चीफ इंजीनियर एमएम त्रिपाठी, इंजिनियर एके श्रीवास्तव व पैकफेड के तत्कालीन असिस्टेंट इंजिनियर विपुल कुमार गुप्ता के खिलाफ विवेचना अभी जारी है।

आपको बता दें कि इस मामले में आरोपितों की 67 करोड़ रुपये की सम्पत्ति जब्त की जा चुकी है। इनमें कुशवाहा की 60 करोड़ जबकि सौरभ जैन की 7 करोड़ रुपये की चल-अचल संपति शामिल है।

2010-11 का है मामला-

साल 2010-11 में तत्कालीन बसपा सरकार के दौरान बाबू सिंह कुशवाहा परिवार कल्याण विभाग के मंत्री थे। इस दौरान प्रदेश के 89 सरकारी अस्पतालों के अपग्रेडेशन के लिए पैकफेड से जारी राशि में करोड़ों का घोटाला हुआ। पैक्फेड को एनएचआरएम फंड के जरिए हर सरकारी अस्पताल के अपग्रेडेशन के लिए एक-एक करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

मामला सामने आने के बाद सीबीआई ने 18 जनवरी 2012 में पैक्फेड घोटाले में पहली एफ़आईआर दर्ज की। इसके बाद 29 मई व 1 दिसंबर 2012 को सीबीआई ने प्रदीप शुक्ला, बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। 14 अप्रैल, 2012 को ईडी ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत जांच शुरू की।

लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा समेत 8 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। आरोपपत्र में ईडी ने कुशवाहा समेत मेसर्स डीजी एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड व कम्पनी के निदेशक सौरभ जैन व पत्नी रजनी जैन का नाम शामिल किया है। वहीं मेसर्स सीएनसी मेटल फॉर्मिंग प्राइवेट लिमिटेड, कम्पनी के निदेशक सुनीत सिंघल और मेसर्स दर्पण मर्केन्टाइल प्राइवेट लिमिटेड व भगवत प्रसाद एजुकेशनल ऐंड वेलफेयर्स ट्रस्ट को भी आरोपी बनाया गया है। ईडी के विशेष वकील कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में परिवार कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव प्रदीप शुक्ला, डीजी परिवार कल्याण डॉ. एसपी राम, पैक्फेड के तत्कालीन एमडी वीके चौधरी, चीफ इंजीनियर एमएम त्रिपाठी, इंजिनियर एके श्रीवास्तव व पैकफेड के तत्कालीन असिस्टेंट इंजिनियर विपुल कुमार गुप्ता के खिलाफ विवेचना अभी जारी है। आपको बता दें कि इस मामले में आरोपितों की 67 करोड़ रुपये की सम्पत्ति जब्त की जा चुकी है। इनमें कुशवाहा की 60 करोड़ जबकि सौरभ जैन की 7 करोड़ रुपये की चल-अचल संपति शामिल है।

2010-11 का है मामला-

साल 2010-11 में तत्कालीन बसपा सरकार के दौरान बाबू सिंह कुशवाहा परिवार कल्याण विभाग के मंत्री थे। इस दौरान प्रदेश के 89 सरकारी अस्पतालों के अपग्रेडेशन के लिए पैकफेड से जारी राशि में करोड़ों का घोटाला हुआ। पैक्फेड को एनएचआरएम फंड के जरिए हर सरकारी अस्पताल के अपग्रेडेशन के लिए एक-एक करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। मामला सामने आने के बाद सीबीआई ने 18 जनवरी 2012 में पैक्फेड घोटाले में पहली एफ़आईआर दर्ज की। इसके बाद 29 मई व 1 दिसंबर 2012 को सीबीआई ने प्रदीप शुक्ला, बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। 14 अप्रैल, 2012 को ईडी ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत जांच शुरू की।