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जेपी इन्फ्राटेक पर धोखाधड़ी के मामले में ED ने दर्ज किया केस

By रवि तिवारी 
Updated Date

लखनऊ। जेपी इन्फ्राटेक व उसके निदेशकों के खिलाफ नोएडा में निवेशकों से धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। ईडी अब अपने जाँच में ये पता लगा रही है की ये पैसा आखिर जेपी इन्फ्राटेक ने फ्लैट खरीदने के लिए निवेशकों द्वारा दी गई धनराशि को कहां डायवर्ट किया? कहीं रकम को हवाला के जरिए विदेशों में या कहीं और तो निवेश नहीं किया गया है।

ED ने अपने PMLA के केस के लिए ग्रेटर नोएडा के एक्सप्रेस-वे थाने में निवेशकों द्वारा दर्ज करवाई गई सात FIR को आधार बनाया है। ईडी ने अपने केस में जेपी इन्फ्राटेक के निदेशक मनोज गौड़ व समीर गौड़ को नामजद किया है। इससे पहले जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ वर्ष 2016, 2017 और 2018 में लगातार पीएमओ के लोक शिकायत विभाग में निवेशकों द्वारा शिकायत कराई जा रही थी। इन शिकायतों के आधार पर ही जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ ग्रेटर नोएडा में एफआईआर दर्ज हुई थीं। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-128 में जेपी इन्फ्राटेक का दफ्तर है।

लोगों ने 70 से 95 प्रतिशत का भुगतान, लेकिन नहीं मिला आशियाना

निवेशकों ने जेपी इन्फ्राटेक के विश टाउन में फ्लैट के लिए वर्ष 2012 में आवेदन किए थे। बिल्डर ने वर्ष 2014 में फ्लैट देने का वादा किया था, लेकिन वर्ष 2016 तक जब लोगों को फ्लैट पर कब्जा नहीं मिला तो उन्होंने जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ शिकायतें करना शुरू कर दिया। ज्यादातर निवेशकों ने फ्लैट की कुल रकम का 70 से 95 प्रतिशत तक भुगतान कर दिया था, लेकिन न उन्हें फ्लैट मिले और न ही बिल्डर की तरफ से रिफंड हुआ। इसके बाद निवेशकों के जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ केस दर्ज कराना शुरू कर दिया।

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