यादव सिंह की अकूत सम्पत्तियों को खोजने में जुटा ईडी

नोएडा: भ्रष्टाचार के प्रयायवाची बने नोएडा, नोएडा विकास प्राधिकरण और यमुना एक्सप्रेसवे के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह के खिलाफ जाँच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनकी संपत्तियों को खोजना शुरू कर दिया है। जाँच एजेंसी को अंदेशा है कि यादव सिंह ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई जिलों में अकूत संपत्तियां बना रखी है| इसके मद्देनजर ईडी ने लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों को जानकारी जुटाने को कहा है। ईडी के सूत्रों का कहना है कि फर्मों की पड़ताल में हेराफेरी के सुबूत मिलते ही पूछताछ का सिलसिला शुरू होगा। इसके दायरे में यादव सिंह, उसके परिवार के लोग, करीबी और इन फर्मों की देखरेख करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट आ रहे हैं। पूछताछ इसी सप्ताह शुरू होने की संभावना है।

यादव सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। भ्रष्टाचार के जरिए उन पर बीस हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा करने का आरोप है। उन्होंने बसपा और सपा सरकार में कई प्रमुख लोगों को उपकृत किया है और कई बड़े लोगों से उनकी कारोबारी हिस्सेदारी भी है। सीबीआई ने दो मुकदमे पहले ही दर्ज किए थे। नोएडा में 954 करोड़ रुपये की हेराफेरी के बंद हो चुके मुकदमे को फिर से दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है। इसी मुकदमे में सीबीसीआईडी ने यादव सिंह को क्लीन चिट देते हुए मामला रफा-दफा कर दिया था लेकिन सीबीआई ने अब इसके एक-एक बिंदुओं की छानबीन करनी शुरू कर दी है। जिस समय सीबीसीआईडी ने यादव को राहत दी, उस समय इस एजेंसी के प्रमुख जगमोहन यादव थे। अब जगमोहन यादव उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी हैं और जांच की आंच उनकी ओर भी आ रही है।

सूत्रों की माने तो उनका कहना है कि यादव सिंह को संरक्षण देने में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के भाई आनंद कुमार की सबसे अहम भूमिका रही है। आरोप है कि आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता की यादव सिंह के परिजनों की कंपनियों में हिस्सेदारी है। सीबीआइ ने इनके खिलाफ साक्ष्य तलाशने शुरू कर दिए हैं। संकेत मिले हैं कि बहुत जल्द सीबीआई आनंद कुमार और विचित्र लता से पूछताछ करेगी।

ईडी ने सीबीआई से दागी अभियंता व उसके रिश्तेदारों के नाम से बनी फर्मों का ब्यौरा मांगा था। ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग के साक्ष्य जुटाने हैं। यह अंदेशा है कि यादव सिंह ने इन्हीं फर्मों के जरिये अपनी काली कमाई का विदेश या कहीं और निवेश किया। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि यादव सिंह से जुड़ी कंपनियों के निदेशक मंडल में रहने वाली सियासी हस्तियों से एक-एक कर पूछताछ की जाएगी। इस दौरान उनसे कंपनियों की संपत्तियों और बैंक खातों में आई रकम के बारे में सवाल किए जाएंगे। जैसे-जैसे काली कमाई सामने आती जाएगी, उसे जब्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के मुताबिक, सीबीआई जांच के आधार पर ही ईडी अपनी भी तफ्तीश को आगे बढ़ाएगी। सीबीआई जांच से तालमेल के लिए ईडी के एक संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को लगाया गया है। विभिन्न कंपनियों के संबंध में सीबीआई की शुरुआती जांच के आधार पर ही ईडी अपनी तफ्तीश को आगे बढ़ा रही है। ईडी ने पीएमएल एक्ट के तहत केस दर्ज किया है और नोएडा अथारिटी से उन कंपनियों का ब्योरा मांगा है, जिन्हें वर्ष 2007 से 2012 तक काम दिया गया।

साथ ही ईडी के अधिकारी कंपनियों द्वारा नगदी निकासी और बैंक में जमा की गई धनराशि के बारे में भी पड़ताल शुरू की है। ईडी इसी आधार पर कई कंपनियों के निदेशक पद पर रही सियासी हस्तियों से भी पूछताछ करेगी। इसमें सपा के साथ ही बसपा के कई नेताओं के बेटे-बहुओं और भाइयों के नाम शामिल हैं। जांच से जुड़े ईडी के अधिकारियों ने कहा कि जरूरत हुई तो कई बड़ी सियासी हस्तियों से भी पूछताछ की जाएगी।

ईडी ने यादव सिंह की चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा हासिल कर इन्हें सूचीबद्ध करना शुरू कर दिया है। यह कार्यवाही इसलिए की जा रही है क्योंकि ईडी यादव सिंह के आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक पाए जाने वाली संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई करेगी। ईडी ने अभी तक हो रही जांच के दौरान सामने आए यादव सिंह व उसके परिवार के लोगों के नाम से बैंक खातों व लॉकरों की भी जानकारी जुटा ली है।

इनमें कितनी लेन-देन हुई है, इसका ब्यौरा संबंधित बैंकों से मांगा जा रहा है। ऐसे ही जो फर्में सामने आएंगी, उनमें कितनी रकम का किससे लेन-देन हुआ, यह पता किया जाएगा। इसके लिए ईडी यादव सिंह व उसके करीबियों के चार्टर्ड अकाउंटेंटों से पूछताछ भी करेगी। ईडी को पता चला है कि यादव सिंह व करीबियों के नाम से जो फर्में खुली हैं, उनका लेन-देन कोलकाता की कुछ कंपनियों से हुआ है, जिनका विदेश में लेन-देन है। ईडी इस तथ्य की पड़ताल कर रही है।