यूपी निर्माण निगम का हर दूसरा अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त, स्मारक घोटाले से जुड़े हैं तार

uprnn-smarak-scam
यूपी निर्माण निगम का हर दूसरा अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त, स्मारक घोटाले से जुड़े हैं तार

लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने मायावती सरकार मे हुये 1400 करोड़ का घोटाले में तेजी दिखाते हुए गुरुवार को राजधानी लखनऊ में सात जगह छापेमारी को अंजाम दिया है। ईडी की टीमों ने गोमतीनगर, हजरतगंज में यूपी के निर्माण निगम और खनन विभाग के इंजीनियरों, ठेकेदारों व अन्य लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। बता दें कि स्मारक घोटाले की जांच सतर्कता अधिष्ठान पहले से ही कर रहा है। विजिलेंस डेढ़ साल पहले दो आरोपों में सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांग चुका है, लेकिन मामला गृह विभाग में लंबित है।

Ed Raid On Contractor Engineers Bases In Monument Scandal :

गोमतीनगर के विशालखंड के मकान नंबर 2/263 को गुरुवार को ईडी की टीम ने खंगाला। ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि इंजीनियरों के साथ मिलीभगत कर मार्बल सप्लायर और ठेकेदारों ने ऊंचे दामों पर एक ही तरह के पत्थर को तीन अलग-अलग दामों पर बेचा। जिससे चलते सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। यही नहीं, यूपी निर्माण निगम के इंजीनियर्स ने अपने रिश्तेदारों को ही पत्थरों की सप्लाई का काम सौंप दिया।

पत्थरों को मिर्जापुर से राजस्थान ले जाया गया ताकि वहां उन्हें तराशा जा सके। इससे उनकी लागत कई गुना बढ़ गयी। राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियमों को धता बताते हुए पत्थरों का खनन करने के लिए कंसोर्टियम बनाकर लीज दी जाती रही। इंजीनियरों और ठेकेदारों ने घोटाले की काली कमाई का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने और विदेश घूमने में भी किया।

सूत्रों की मानें तो इसमें अहम भूमिका निभाने वाले निर्माण निगम के तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर की संलिप्तता थी। इसके बाद ईडी ने उनके ठिकानों पर छापे मारने का फैसला लिया। साल 2007 से 2012 में मायावती सरकार के दौरान हुए आंबेडकर स्मारक परिवर्तन स्थल लखनऊ, मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल, गौतमबुद्ध उपवन, इको पार्क, नोएडा आंबेडकर पार्क, रामबाई आंबेडकर मैदान स्मृति उपवन के निर्माण में 14 अरब 10 करोड़ 83 लाख 43 हजार रुपये के घोटाले का आरोप लगा था।

सूत्रों की माने तो ईडी की जांच में सात प्रमुख अनियमितताएं सामने आई हैं। ईडी सूत्रों ने बताया कि मामले की जांच के दौरान आरोपितों को समन किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। जांच में पाया गया कि पत्थर मीरजापुर से वाया राजस्थान लाया गया। मीरजापुर में एक साथ 29 मशीनें लगाई गईं और कागजों में दिखाया गया था कि पत्थरों को राजस्थान ले जाकर वहां कटिंग करवाई गई।

इन नेताओं पर हो चुकी कार्रवाई

तत्कालीन बसपा सरकार के दौरान लखनऊ और नोएडा में हुए 1400 करोड़ रुपये स्मारक घोटाले में दो पूर्व मंत्रियों नसीमुद्दीन सिद्दकी और बाबू सिंह कुशवाहा समेत 19 लोगों के खिलाफ वर्ष 2014 में एक जनवरी को मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह एफआईआर सतर्कता अधिष्ठान ने लोकायुक्त की जांच के बाद गोमती नगर थाने में लिखायी थी। जांच में ठेकेदार, अधिकारी, पूर्व विधायक समेत 199 लोग आरोपी पाये गए थे।

इन लोगों के नाम हैं शामिल

नसीमुद्दीन सिदद्की, बाबू सिंह कुशवाहा, सलाहकार सुहैल अहमद फारुखी, राजकीय निर्माण निगम के पूर्व एमडी सीपी सिंह, इंजीनियर एसके सक्सेना, केआर सिंह, राजीव गर्ग, पीके जैन, एसपी गुप्ता, एसके अग्रवाल, आरके सिंह, बीडी त्रिपाठी,मुकेश कुमार, हीरा लाल, एसके चौबे, एसपी सिंह, मुरली मनोहर, एसके शुक्ला और तत्कालीन अपर परियोजना प्रबन्धक राकेश चन्द्रा के नाम शामिल हैं।

लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने मायावती सरकार मे हुये 1400 करोड़ का घोटाले में तेजी दिखाते हुए गुरुवार को राजधानी लखनऊ में सात जगह छापेमारी को अंजाम दिया है। ईडी की टीमों ने गोमतीनगर, हजरतगंज में यूपी के निर्माण निगम और खनन विभाग के इंजीनियरों, ठेकेदारों व अन्य लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। बता दें कि स्मारक घोटाले की जांच सतर्कता अधिष्ठान पहले से ही कर रहा है। विजिलेंस डेढ़ साल पहले दो आरोपों में सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांग चुका है, लेकिन मामला गृह विभाग में लंबित है। गोमतीनगर के विशालखंड के मकान नंबर 2/263 को गुरुवार को ईडी की टीम ने खंगाला। ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि इंजीनियरों के साथ मिलीभगत कर मार्बल सप्लायर और ठेकेदारों ने ऊंचे दामों पर एक ही तरह के पत्थर को तीन अलग-अलग दामों पर बेचा। जिससे चलते सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। यही नहीं, यूपी निर्माण निगम के इंजीनियर्स ने अपने रिश्तेदारों को ही पत्थरों की सप्लाई का काम सौंप दिया। पत्थरों को मिर्जापुर से राजस्थान ले जाया गया ताकि वहां उन्हें तराशा जा सके। इससे उनकी लागत कई गुना बढ़ गयी। राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियमों को धता बताते हुए पत्थरों का खनन करने के लिए कंसोर्टियम बनाकर लीज दी जाती रही। इंजीनियरों और ठेकेदारों ने घोटाले की काली कमाई का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने और विदेश घूमने में भी किया। सूत्रों की मानें तो इसमें अहम भूमिका निभाने वाले निर्माण निगम के तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर की संलिप्तता थी। इसके बाद ईडी ने उनके ठिकानों पर छापे मारने का फैसला लिया। साल 2007 से 2012 में मायावती सरकार के दौरान हुए आंबेडकर स्मारक परिवर्तन स्थल लखनऊ, मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल, गौतमबुद्ध उपवन, इको पार्क, नोएडा आंबेडकर पार्क, रामबाई आंबेडकर मैदान स्मृति उपवन के निर्माण में 14 अरब 10 करोड़ 83 लाख 43 हजार रुपये के घोटाले का आरोप लगा था। सूत्रों की माने तो ईडी की जांच में सात प्रमुख अनियमितताएं सामने आई हैं। ईडी सूत्रों ने बताया कि मामले की जांच के दौरान आरोपितों को समन किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। जांच में पाया गया कि पत्थर मीरजापुर से वाया राजस्थान लाया गया। मीरजापुर में एक साथ 29 मशीनें लगाई गईं और कागजों में दिखाया गया था कि पत्थरों को राजस्थान ले जाकर वहां कटिंग करवाई गई।

इन नेताओं पर हो चुकी कार्रवाई

तत्कालीन बसपा सरकार के दौरान लखनऊ और नोएडा में हुए 1400 करोड़ रुपये स्मारक घोटाले में दो पूर्व मंत्रियों नसीमुद्दीन सिद्दकी और बाबू सिंह कुशवाहा समेत 19 लोगों के खिलाफ वर्ष 2014 में एक जनवरी को मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह एफआईआर सतर्कता अधिष्ठान ने लोकायुक्त की जांच के बाद गोमती नगर थाने में लिखायी थी। जांच में ठेकेदार, अधिकारी, पूर्व विधायक समेत 199 लोग आरोपी पाये गए थे।

इन लोगों के नाम हैं शामिल

नसीमुद्दीन सिदद्की, बाबू सिंह कुशवाहा, सलाहकार सुहैल अहमद फारुखी, राजकीय निर्माण निगम के पूर्व एमडी सीपी सिंह, इंजीनियर एसके सक्सेना, केआर सिंह, राजीव गर्ग, पीके जैन, एसपी गुप्ता, एसके अग्रवाल, आरके सिंह, बीडी त्रिपाठी,मुकेश कुमार, हीरा लाल, एसके चौबे, एसपी सिंह, मुरली मनोहर, एसके शुक्ला और तत्कालीन अपर परियोजना प्रबन्धक राकेश चन्द्रा के नाम शामिल हैं।